Tuesday, August 7, 2012

श्री कृष्ण जन्माष्टमी





आज मैं अपने साथ अपने ससुर जी को भी आपलोगों से मिलाने लाई हूँ  .... !


जिस पर वे सो रहे हैं ,वो पानी से भरा गद्दा है ,जिससे उन्हें bed - sore ( लगातार पलंग पर सोये रहने के कारण पीठ पर हो जाने वाला जख्म) नहीं होगा .... !!


जब वे :- विभा === हे विभा === ये हो विभा === विभा बाबु === बाबु ,हमार बाबु ....
बीच-बीच में मेरा :- जी === बोल  जा === सुनत बानी ,कहीं ===  चुप हो जाती हूँ
ससुर जी :- अब ,   , इखे ,बरदासत हो  .... कुछ खी   के मा   .....
तब मुझे  ,कैसा लगता है ,उसे शब्द में व्यक्त करने में असमर्थ हूँ ....


सब कहने लगे हैं ,एक बेटी से बढ़ कर रही हूँ .... 
सब क्यों नहीं सोच पाते .... मैं एक इन्सान हूँ .... बहु बाद में .... 


मैं और मेरे ससुर जी ....
मेरे मदद के लिए एक स्टाफ ....
दिन तो जैसे -तैसे कट जाता .... :(
12 घंटे रात का ,भयानक सन्नाटा ....  कट ही जाता है  !!
मेरे ससुर जी ....
पल-पल कहरते ....
तिल-तिल मरते ....
एक-एक कदम ,
मोक्ष की तरफ बढ़ते ??

मैं ....
देख-देख हलकान होती ....
सोच-सोच परेशान होती ....
उफ़ ...... -_- --- :'(
ऐसे में कैसा  श्री कृष्ण जन्माष्टमी  ?
कैसी उसकी तैयारी ?
कैसे उस पर कोई रचना ? 


राखी के साथ-साथ ही श्री कृष्ण जन्माष्टमी की धूम शुरू होजाती है .... सभी इन्हें कृपा करने वाले , दयावान , कष्ट हरने वाले  कहते  है तो  कुछ चमत्कार करें ना  .... !!


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भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का दिन बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। कृष्ण जन्मभूमि पर देश–विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती हें और पूरे दिन व्रत रखकर नर-नारी तथा बच्चे रात्रि 12 बजे मन्दिरों में अभिषेक होने पर पंचामृत ग्रहण कर व्रत खोलते हैं। कृष्ण जन्म स्थान के अलावा द्वारकाधीश, बिहारीजी एवं अन्य सभी मन्दिरों में इसका भव्य आयोजन होता हैं , जिनमें भारी भीड़ होती है। 

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क्यों प्रीति की बेल बढ़ाई तब ,
क्यों  विरह की आग लगाई अब , 
कहें कौन हुआ अपराध है कब , 
जब साथ रहीं हम उनके तब  ?
बेचैन करें मथुरा में जा ,
                हमें गोकुल लगता दु:ख सागर !




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मात यशोदा का है दुलारा,
सबकी आँखों का है तारा
अपनों गोविन्द मदन गोपाल
.......... 
भयो नन्द लाल ........

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी


जिस स्थान पर ईश्वर या देवता  अपनी दिव्य  शक्ति के रूप में विराजमान होते हैं वह तीर्थ कहलाता है  व उस स्थान को तीर्थ स्थान कहते हैं | इसी प्रकार जिस दिन परमेश्वर स्वयं अवतरित होते हैं वह दिन पूज्य, पवित्रता देने वाला व पर्वमय हो जाता है |










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श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव


स्कूल प्रांगण श्रद्धालुओं से खचाखच भर जाता है। लोग आसपास के मकानों की छत पर बैठकर और सड़क पर खड़े रहकर भी कार्यक्रम देखते हैं।



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पावस 

डूबूं इस रस में कि बन्द हो ,रोज रोज का आना जाना

पाने को पूर्णता प्रेम की , आतुर एक भ्रमर दीवाना .... !

(यह प्रेम का पराकाष्ठा है .... !!)

बन्द पंखुड़ी में होने को, जब नलिनी की ओर मुड़ा है

तभी मदरसे में हमने ,दीवानेपन का सबक पढ़ा है

अब यकीं  हो गया ,आपने जो पढ़ा है ,सही पढ़ा है ....



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         भगवन मेरे, सब कुछ तुम्ही 

                               भगवन मेरे, सब कुछ तुम्ही
                                 हाँ ! बस तुम्ही हो मेरे ।
                            जो तुम न देखो,जो तुम न जानो
                               शिकवा कोई भी नहीं है

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श्री कृष्ण-जन्माष्टमी की बधाइयाँ

 इस पर्व पर भगवान श्री कृष्ण का पुनीत स्मरण करते हुए समस्त धरावासियों के लिए सुख-समृधी-आरोग्य की कामना है. इस अनुपम पर्व कृष्ण-जन्माष्टमी पर आप सभी को शुभकामनायें और बधाइयाँ. भगवान श्री कृष्ण आपकी सभी मनोकामनाओं को पूरी करें !!

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 कृष्ण जन्माष्टमी

कृष्ण पूर्ण अवतार थे। वे प्रेम के उच्चतम प्रतीक हैं। राधा भी प्रेम की उच्चतम अभिव्यक्ति हैं। इसीलिए राधाकृष्ण एक साथ कहा जाता है। 

 



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कृष्ण लीला 

तुमने मेरा मन चुरा लिया
मेरा तन घर में रहता है
चंचल मन दिन रात
तुम्हारे पीछे फिरा करता है

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अब मुझे दीजिये इजाजत  .... फिर मिलती  हूँ ....

                                    विभा रानी श्रीवास्तव 


22 comments:

  1. जेहि बिध राखे राम .सेवा ईश्वर का सर्वोत्तम वरदान है .सेवा से ही मिलता है मेवा .
    _______________

    ram ram bhai
    सोमवार, 6 अगस्त 2012
    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

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  2. दीदी प्रणाम
    मेरे भाग जो दर्शन हो गए पापा जी के
    ईश्वर सब की रक्षा करता है
    इतने व्यस्त रहने का बावजूद
    इन लिंकों का चयन एक असंम्भव सा कार्य है
    साधुवाद आपको

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  3. आपके पिता जी ( ससुर ) के बेहतर स्वास्थ्य की ईश्वर से कामना करते हैं। वैसे तो आज बेटी और बहू में फर्क करना बेमानी है, आप और बेहतर तरीके ससुर जी की सेवा कर सके,ईश्वर आपको वो ताकत दें।


    लिंक्स के क्या कहने
    राधे राधे

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  4. आज तो कृष्णमय हो गया ब्लॉगजगत..

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  5. बहुत ही अच्छे लिंक्स दिये हैं आंटी। जन्माष्टमी पर हमारी यही कामना है कि आदरणीय अंकल जी जल्दी से ठीक हों।


    सादर

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  6. 'योगी राज श्रीकृष्ण'ने 'कर्म' पर ध्यान केन्द्रित किया है और आप अपना कर्म बखूबी कर रही हैं। प्रातः 08 बार और सोते समय 08 बार इस स्तुति का वाचन भी अपने कर्म मे जोड़ कर देखें शायद कुछ लाभ हो सके। लिंक यह है---
    http://janhitme-vijai-mathur.blogspot.in/2011/10/blog-post.html

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  7. आपके विचार अनुकरणीय हैं .... सुंदर हलचल प्रस्तुत की

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  8. आपकी सेवभाव से मन गदगद है .... स्वसुर जी के शब्दों से उनकी की पीड़ा समझ सकती हूँ .... आज की हलचल कृष्णमय हो उठी है .... कृष्ण ही बेड़ा पार लगाएंगे ।

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  9. विभा ..आज तो सारी की सारी हलचल कृष्णमय होगई है ..शायद बुजुर्गो की सेवा का प्रसाद ही है जो इतनी व्यस्थता के बाद भी हमारे लिए समय निकाल लेती हो..और ्जाने अनजाने हमें भी प्रेरणा देती रहती हो...

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  10. आपकी निष्ठा एवं समर्पण को सलाम विभाजी ! आपके श्वसुर जी शीघ्र स्वास्थ्य लाभ करें यही कामना है ! आजकी कृष्णमयी हलचल बहुत अच्छी लगी ! 'उन्मना' से मेरी माँ की रचना, 'ये नयन बने कारे बादर', के चयन के लिये आपका बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद !

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  11. गहन पीड़ा से जूझते स्वजन के साथ घरेलू और बाहरी काम निपटाने ही होते हैं . आपके जुझारूपन को नमन . ईश्वर पिताजी को कष्ट से मुक्ति दें !

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  12. विभा जी आपके ससुर जी के बारे मे जानकर मन दुखी हो गया समझ सकती हूँ कितने कष्ट मे होंगे वो और आप भी कुछ ना कर पाने मे जब अपने को असमर्थ महसूस कर रही होंगी तो कैसा लग रहा होगा बस ईश्वर से ही प्रार्थना की जा सकती है कि उन्हे कष्ट सहने की शक्ति दे या कम कष्ट दे ………इन हालातों मे रहकर भी हलचल लगाना आपके समर्पण और निष्ठा को दर्शाता है ………नमन है आपको।

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  13. विभा जी आपके पिताजी जल्दी स्वास्थ्य लाभ करें ऐसी अपेक्षा है |आज की नई पुरानी हलचल पूरी कृष्णमय है |बहुत अच्छी लगी | आपकी लगन और समर्पण सराहनीय है |
    आशा

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  14. आज की हलचल को कृष्‍णमय बनाने के लिए आपका बहुत - बहुत आभार ... आपके पिताजी को शीघ्र ही स्‍वास्‍थ्‍य लाभ मिले यही शुभकामनाएं हैं ... आपकी कर्तव्‍यनिष्‍ठा को मन आपके प्रति श्रद्धान्‍वत हो जाता है ...

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  15. भगवन मेरे, सब कुछ तुम्ही
    हाँ ! बस तुम्ही हो मेरे ।
    जो तुम न देखो,जो तुम न जानो
    शिकवा कोई भी नहीं है
    उस का खेल वो ही जाने...हम मात्र अपना-अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभा सकते हैं..प्रभु स्वास्थ्य प्रदान करे...

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  16. आपकी सेवा फले ...और आपके भाव हिम्मत बनी रहें यूँ ही ,...हलचल अच्छी लगी ....सुंदर लिंक .....

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  17. इस निस्वार्थ सेवा से मिलने वाला संतोष एक पुरुस्कार है रब की ओर से.......खुदा मरीज़ को फैज़ दे और आपको सुकून.....आमीन।

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  18. हृदय से प्रार्थना ईश्वर आपको संबल दें और श्वसुर जी को स्वास्थ्य लाभ....
    विपरीत परिस्थितियों में आपके जज्बे को सादर सलाम।

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  19. विभा जी,आपसी बहु उन्हें मिली ये उनका भाग्य है...
    आपकी भावनाओं को नमन..
    ईश्वर आप दोनों को शक्ति दें...
    आभार
    अनु

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  20. सुंदर प्रस्तुति,,,आपके श्वसुर जी को स्वास्थ्य लाभ हो ईश्वर से प्रार्थना है,,,,

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  21. बचपन से ही अक्सर पापा को एक भजन की कुछ पंक्तियाँ गुनगुनाते सुनता आ रहा हूँ ... "जब जानकीनाथ सहाय करें तो कौन बिगाड़ करे नर तेरो ... "

    बाबूजी और आपको प्रणाम !

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ब्लॉग्स्पॉट मे चल रही कुछ तकनीकी गड़बड़ी से कुछ कमेंट्स स्पैम मे जा रहे हैं जिन्हें तत्काल प्रकाशित करने का प्रयास रहता है फिर भी यदि आपका कमेन्ट यहाँ तत्काल न दिखाई दे तो निश्चिंत रहें आपका कमेन्ट प्रकाशित ज़रूर होगा।

आशा है सहयोग बनाए रखेंगे।