आप सभी को सदा का नमस्कार ....
जैसा की आज जुलाई माह का दूसरा बुधवार है ... और ये दिन हर दिन की हलचल से कुछ हटकर लिंक्स लाता है इस बार की खास हलचल में जिक्र है बारिश का और फिसलती बूंदों के साथ उसी से सम्बंधित रचनाओं का ... लेकिन इन्हीं बूंदों के साथ जाने कितनी रचनाओं का सुनहरा संसार समेटे हुए एक विशिष्ट अतिथि भी हमारे साथ हैं ... आप सब उनकी कलम और उनके लेखन से खूब परीचित हैं कहीं आलेख तो कहीं कविताओं का चर्चा होता है जहां ... तो कहीं वह लोगों के मन में इसलिए अपनी एक खास जगह क़ायम रखती हैं क्योंकि एक संवेदनशील, भावुक और न्यायप्रिय व्यक्तित्व है आपका .. अपने स्तर पर अपने आस पास के लोगों के जीवन में खुशियाँ जोड़ने की यथासम्भव कोशिश में जुटे रहना इन्हें बेहद प्रिय है .. इनकी पसन्द के गीतों का आनन्द ले सकते हैं यहां ... तराने - सुहाने
*** हमारी विशिष्ट अतिथि ***
आदरणीय साधना वैद्य जी
जिनका हम हलचल के सभी सदस्यों की ओर से हार्दिक अभिनन्दन करते हैं .. जिनके स्नेह व मार्गदर्शन से हम निरन्तर आगे बढ़ रहे हैं आगे भी उनसे हम यही अभिलाषा रखते हैं ... उनके ब्लॉग के साथ चर्चा उनकी नई पोस्ट सुमित्रा का संताप ... के बाद चलते हैं सबसे पहले ... हम आनन्द लेने इनका ...
बारिश आती है,
तो कितनी यादें साथ लाती है
चन्द बूंदों से खेलता
फिसलता पानी
सतह पर पानी के
छमछम का शोर
थिरकती बूंद
सीधी अपनी रीढ़ करें हम
प्रकृति भी अब
भीग भीग मुस्काई
लो देखो देखो
बरखा बहार आई
एक जादू है पल-पल बारिश
ख्वा़ब की ताजा कोंपल बारिश
धरती की प्यास बढ़ी
चातक की आस बढ़ी
गगन के भर आए नैन
आज सखि अंबर के
भर आए नैन
देखो! वह आदमी फिसल गया
वह पेड़ गिर गया
ऑटो टकरा गया मारुति से
अचानक सब थम गया
ये बारिश
फैली हो हरियाली चहुँ ओर
नाच उठे धरती का मनमोर...!
बारिश की तेज बौछारें,
मंद-मंद हवाएं !
हल्की ठण्ड का आलम है............
एक गर्मागर्म कॉफी हो जाए! चलते - चलते ....
इसी के साथ इस गीत के साथ इजाज़त लेती हूँ .... शुभ दिन के साथ शुभकामनाएँ
जैसा की आज जुलाई माह का दूसरा बुधवार है ... और ये दिन हर दिन की हलचल से कुछ हटकर लिंक्स लाता है इस बार की खास हलचल में जिक्र है बारिश का और फिसलती बूंदों के साथ उसी से सम्बंधित रचनाओं का ... लेकिन इन्हीं बूंदों के साथ जाने कितनी रचनाओं का सुनहरा संसार समेटे हुए एक विशिष्ट अतिथि भी हमारे साथ हैं ... आप सब उनकी कलम और उनके लेखन से खूब परीचित हैं कहीं आलेख तो कहीं कविताओं का चर्चा होता है जहां ... तो कहीं वह लोगों के मन में इसलिए अपनी एक खास जगह क़ायम रखती हैं क्योंकि एक संवेदनशील, भावुक और न्यायप्रिय व्यक्तित्व है आपका .. अपने स्तर पर अपने आस पास के लोगों के जीवन में खुशियाँ जोड़ने की यथासम्भव कोशिश में जुटे रहना इन्हें बेहद प्रिय है .. इनकी पसन्द के गीतों का आनन्द ले सकते हैं यहां ... तराने - सुहाने
*** हमारी विशिष्ट अतिथि ***
आदरणीय साधना वैद्य जी
जिनका हम हलचल के सभी सदस्यों की ओर से हार्दिक अभिनन्दन करते हैं .. जिनके स्नेह व मार्गदर्शन से हम निरन्तर आगे बढ़ रहे हैं आगे भी उनसे हम यही अभिलाषा रखते हैं ... उनके ब्लॉग के साथ चर्चा उनकी नई पोस्ट सुमित्रा का संताप ... के बाद चलते हैं सबसे पहले ... हम आनन्द लेने इनका ...
बारिश आती है,
तो कितनी यादें साथ लाती है
चन्द बूंदों से खेलता
फिसलता पानी
सतह पर पानी के
छमछम का शोर
थिरकती बूंद
सीधी अपनी रीढ़ करें हम
प्रकृति भी अब
भीग भीग मुस्काई
लो देखो देखो
बरखा बहार आई
हर इक पत्ता निखर जाता है
धुल जाता है बारिश में। एक जादू है पल-पल बारिश
ख्वा़ब की ताजा कोंपल बारिश
धरती की प्यास बढ़ी
चातक की आस बढ़ी
गगन के भर आए नैन
आज सखि अंबर के
भर आए नैन
देखो! वह आदमी फिसल गया
वह पेड़ गिर गया
ऑटो टकरा गया मारुति से
अचानक सब थम गया
ये बारिश
फैली हो हरियाली चहुँ ओर
नाच उठे धरती का मनमोर...!
बारिश की तेज बौछारें,
मंद-मंद हवाएं !
हल्की ठण्ड का आलम है............
एक गर्मागर्म कॉफी हो जाए! चलते - चलते ....
इसी के साथ इस गीत के साथ इजाज़त लेती हूँ .... शुभ दिन के साथ शुभकामनाएँ

शुभप्रभात .... !
ReplyDeleteआदरणीय साधना वैद्य जी का स्वागत और नमस्कार .... !!
मन को भिगोंती हलचल .... !!
सदा जी
ReplyDeleteशुभ प्रभात
आज की विशिष्ठ अतिथि,
आदरणीय साधना दीदी का
हार्दिक अभिनन्दन करती हूं
और सदा जीजी,
सुनी हूँ कल दुश्मनों तबियत नासाज थी
फिर भी इतना सुन्दर पोस्ट प्रस्तुत किया आपने
साधुवाद
सादर
आज बारिश के पानी में भीगी है हलचल... विशिष्ठ अतिथि आदरणीय साधना जी का हार्दिक अभिनन्दन .... "अंजुरी में धरती" को स्थान देने के लिए आपका बहुत - बहुत आभार...
ReplyDeleteबारिश की बूंदों से सजी है आज की हलचल ,
ReplyDeleteसावन के मौसम ने किया ब्लोगों पर भी अपना असर ,
दीदी ''सदा'' शुभकामना सजाओ यूँ ही लिंक ,
देख कर याद आता है मुझे अपना वतन अजीज .
मोहब्बत नामा
मास्टर्स टेक टिप्स
अहा ! क्या तो हलचल है ...सुंदर प्रविष्टियाँ ली हैं ...आभार
ReplyDeleteआदरणीया सदा जी
ReplyDeleteसाधना आंटी के परिचय के साथ आज की हलचल बहुत अच्छी बनी है। सारे लिंक्स को देखने की कोशिश है।
सादर
साधना वैद्य जी का स्वागत ..अच्छे लिक्स सुन्दर हलचल...
ReplyDeleteबहुत सुन्दर सदा जी. badhai.
ReplyDeletehtt://siddequi.jagranjunction.com
साधना जी का हार्दिक अभिनन्दन!
ReplyDeleteइस सुन्दर हलचल के लिए सदा जी का आभार!
सदा जी अभिभूत हूँ आज की इस हलचल में स्वयं को पाकर ! आपने मुझे जो मान दिया उसके लिए ह्रदय से आभारी हूँ ! इसी प्रकार स्नेह बनाए रखियेगा ! आज की सावनी हलचल मन को भी भिगो गयी ! बहुत बहुत धन्यवाद आपका !
ReplyDeleteबहुत प्यारी बरसा के फुहारों से भरी हलचल प्रस्तुति ..
ReplyDeleteसावन के झूले पड़े गीत से कभी जब हम भी झूला करते थे .वो दिन याद आने लगी..
आभार..
जैसे भीग गए बारिश में...!!!
ReplyDeleteकलमदान को स्थान देने के लिए धन्यवाद ..!