Saturday, June 9, 2012

हलचल शनिवार की..... कुछ नई कुछ पुरानी



बहुत असमंजस में बीत रहा है ये सप्ताह....... बारिश की आस थी वो बरसी तो जरूर........ 
पर पूरे सप्ताह भर ऊमस का उपहार....लगातार दे रही है.........
खैर...... प्रकृति के विपरीत लिखा तो जा सकता है... 
पर प्रकृति विरुद्ध तो स्वयं प्रकृति भी नहीं जा सकती.........
चलिये चलें काम पर ....

   
कुछ क्षणिकाएं ….. 
अभिव्यक्ति में मंजू शर्मा
आँखों की कोर दलदली लब कांपते हुए
अंतर के जख्म अपना बदन ढांपते हुए

मुक्तिका: मुस्कुराते रहो... --संजीव 'सलिल' 
मुस्कुराते रहो, खिलखिलाते रहो
स्वर्ग नित इस धरा पर बसाते रहो..
गैर कोई नहीं, है अपरिचित अगर
बाँह फैला गले से लगाते रहो..

दिल में है दर्द, तो गजल करना पडेगा…
सुनील गुप्ता श्वेत की रचना
हिन्दी साहित्य काव्य संकलन में
अपने शब्दों को थोडा सरल करना पडेगा.
दिल में है दर्द, तो गजल करना पडेगा..
गर बनना है सूरज, चमकने के लिये तो.
दोस्तों अन्दर ही अन्दर, जलना पडेगा..

झीना सा पर्दा
राजेन्द्र तेला 'निरंतर'
हिन्दी साहित्य काव्य संकलन में
खूबसूरत
गुलाबी चेहरा
नागिन से लहराते
बाल
झील सी गहरी
नीली आँखें

Self Improvement and Success Tips in Hindi
दे रही हैं मोनिका जैन 'पंछी'
दोस्त बनिये पर सबसे पहले खुद अपने
  अक्सर कुछ लोग अपनी ज़िंदगी से नाख़ुश होते हैं.
उन्हें अपने भाग्य, अपनी किस्मत से शिकायत रहती है
जैसे “मैं जो भी चाहता हूँ मुझे कभी नहीं मिलता,
मेरा भाग्य मेरा साथ कभी नहीं देता
या हर कार्य में मुझे असफलता मिलती है”.


रिश्ते... खट्टे-मीठे
अना जी “कविता” में
रिश्ते है ख्वाब  मानिंद -
आज सच कल धोखा है ,
ख़ुशी में छुपा वो दर्द
गम के पटल पर दीखता है ।।

एक ग़ज़ल : ऐसी भी हो ख़बर कभी
 हँसते हँसाते रहो में...... आनन्द पाठक
ऐसी भी हो ख़बर कभी अख़बार में लिखा
कल इक ’शरीफ़’ आदमी था रात में दिखा
लथपथ लहूलुहान ना हो जाए वो कहीं
आदम की नस्ल आख़िरी को या ख़ुदा! बचा

फिर पीड़ा का पाणिग्रहण कौन करे ?
जख्म.... जो फूलों ने दिये में वन्दना जी
गुमसुम अंतस की पीड़ा
शब्द कैसे उकेर पाएंगे
क्या पीड़ा को शब्द दे पायेंगे
असली जामा पहना पाएंगे
यूँ तो कंधे पर झोला लटकाए
घूम रहे हैं ना जाने कितने अशरार

"रार का सिलसिला नहीं होता"
 उच्चारण में
आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' की कलम द्वारा प्रसवित
बात का ग़र ग़िला नहीं होता
रार का सिलसिला नहीं होता
ग़र न ज़ज़्बात होते सीने में
दिल किसी से मिला नहीं होता
आम में ज़ायका नहीं आता
 वो अगर पिलपिला नहीं होता

मौन का उत्सव 

अनीता जी..मन पाए विश्राम कहाँ में
मौन का उत्सव
ठठा कर हँसा वह
नजरें जो टिकीं थीं सामने
लौटा लीं खुद की ओर
और तभी गूंज उठा था सारा जंगल 

 


चन्दन सिंह भाटी बाड़मेर न्यूज ट्रेक में ..नई दिल्ली समाचार....
 नॉर्थ ईस्ट के लोगों पर कॉमेंट करने से पहले अब सावधान हो जाइए। 
कहीं ऐसा न हो कि आपको जेल की हवा खानी पड़े 
क्योंकि अब नॉर्थईस्टर्न्स को 'चिंकी' कहने से 5 साल की जेल हो सकती है 
आमतौर पर नॉर्थ ईस्ट इलाकों- असम, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम 
राज्यों के लोगों को उनके मंगोलियन फीचर्स के चलते चिंकी कहकर बुलाते हैं। 
अब इसे नस्लीय टिप्पणी मानकर सजा दी जाएगी।

अम्मा ...
स्वन मेरे.... में दिगम्बर नासवा
छुपा कर बेटे बहु से
वो आज भी सहेजती है
बासी अखबार
संभाल कर रखती है
पुरानी साडियां
जोड़ती रहती है
घर का टूटा सामान

सोलवां साल.......
मृदुला जी अपने mridula's blog में
किसी को अनुरोध न टाल सकी और याद कर बैठी
अपने अतीत को कुछ इस तरह
सोलवां साल.....यानि........एक जादू ,..........एक आकर्षण,
एक निमंत्रण,...............कुछ  अलग सा...........मिजाज़........
तो  मेरी बच्ची,..........अब करनी होगी तुम्हें.....अपने ही....कदमों की पहरेदारी 

दीप मेरे घर का जलता क्यों नहीं

"धरोहर" से ममता किरण की रचना
कब तलक भागा फिरेगा ख़ुद से वो
साथ आख़िर अपने मिलता क्यों नहीं
गर बने रहना है सत्ता में अभी
गिरगिटों सा रंग बदलता क्यों नहीं

मौन स्वयं एक जवाब

 रश्मि प्रभा के
वट वृक्ष में
खुद में उदास होकर भी बैठ जाना ...एक समय के बाद सुकून देता है 

कि अच्छा हुआ.... मैंने कुछ नहीं कहा ...
 चपल रसना के लिए...कत्तई मुश्किल नहीं है.......धृष्ट से धृष्टतम......सवालों का जवाब
देना इस तरह कि......निर्लज्जता भी.....लज्जा से....पानी- पानी हो जाए ..

अब इजाजत माँगती है यशोदा....
आप सभी का सप्ताहांत शुभ हो.....



 









31 comments:

  1. शुभप्रभात छोटी बहना .... !!
    *दिल में है दर्द, तो गजल करना पडेगा…**रिश्ते... खट्टे-मीठे*??
    कुछ सवालों का जबाब मिलता क्यों नहीं .... ??
    *दीप मेरे घर का जलता क्यों नहीं* .... ?

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    1. दीदी प्रणाम
      आप, इतने सुबह कैसे उठ जाती हैं
      मैं तो तभी उठती हूं जब उठाया जाता है

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    2. राज की बात

      मेरी उम्र को छू लो

      पता चलेगा .... !!

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  2. good morning :) sundar halchal..meri rachna shamil karne ke liye aabhar :)

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    1. मिष्ठी,
      जय जिनेन्द्र
      आभार

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  3. एक से बढ़ कर एक लिंक दिये हैं दीदी।

    बहुत ही खास हलचल।

    सादर

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    1. भाई
      आपको पसंद आई
      मेहनत रंग लाई
      सादर

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  4. बहुत सुन्दर लिंक्स ...सभी पढ़ लिए .... आभार

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    1. दीदी प्रणाम
      आपका स्वागत है
      आप ही के घर में

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  5. बढीया लिंक्स
    बेहतरीन हलचल...

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    1. प्रवीण भाई
      धन्यवाद

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  7. badhiya padhaya apaane aur naye logon se mulakat bhi hui. aabhar !

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    1. रेखा बहन
      आपको पसंद आए ये लिंक्स
      श्रम सफल हुआ
      सादर

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  8. सुंदर हलचल
    लिंक्स का अच्छा संकलन

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    1. धन्यवाद महेन्द्र भाई

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  9. यशोदा जी सभी लिंक्स बहुत सुन्दर .....आभार

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    1. शुभ प्रभात
      शुक्रिया महेश्वरी बहन

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  10. बहुत सुन्दर लिंक्स..सार्थक हलचल ..
    आभार !

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    1. शुभ प्रभात
      शुक्रिया कविता बहन

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  11. सुंदर लिंकों के साथ सार्थक हलचल,,,,

    MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

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    1. शुभ प्रभात
      शुक्रिया भाई धीरेन्द्र जी

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  12. Replies
    1. भाई जी
      शुभ प्रभात
      शुक्रिया

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  13. Suhavni halchal ... Mast link ... Shukriya mujhe shamil Karne ka ...

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  14. बहुत बढ़िया हलचल यशोदा जी....................

    सुन्दर लिंक्स ...प्यारी प्रस्तुति....

    अनु

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  15. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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