Thursday, May 17, 2012

आज की नयी पुरानी हलचल में ....ज़िंदगी मासूम ही सही ...

नमस्कार ...  आज की  हलचल में  आप सभी का स्वागत है ... नए पुराने लिंक्स ले कर हाजिर हूँ आशा है आपको पसंद आएंगे ...


मेरा फोटो  समीर लाल  जी प्रवासी होने के कारण कवि बन गए हैं ..... पढ़िये उनकी रचना ...खोया  मुसाफिर 
मैथली शरण गुप्त ने लिखा है कि राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है, कोई कवि बन जाय सहज संभाव्य है। इस पर आपातकाल के दौरान बंद नेताओं के छुटने पर उनकी काव्य प्रतिभा का देश को एकाएक ज्ञान हुआ जिसमें अटल बिहारी बाजपेयी के कवि होने पर हरि शंकर परसाई कहते हैं, कि कारागार निवास स्वयं ही काव्य है, कोई कवि बन जाय सहज संभाव्य है। मेरा मानना है कि विदेश प्रवास स्वयं ही काव्य है, कोई कवि बन जाय सहज संभाव्य है। तो बस उसी काव्य धारा में, प्रवासी पीड़ा को दर्शाती मेरी यह प्रस्तुति:

बहुत खुश हूँ फिर भी न जाने क्यूँ
ऑखों में एक नमीं सी लगे
मेरी हसरतों के महल के नीचे
खिसकती जमीं सी लगे
मेरा फोटो  रश्मि प्रभा जी  खुद की तलाश – 7  के साथ लायीं  हैं विश्वास  की भावना -----
बच्चे तो पौधों के सदृश्य होते हैं , जैसा आकार दो . हमारे हर शब्द अंकुरित होते हैं उनके भीतर . तो निःसंदेह बीज का चयन सही होना चाहिए . जीवन तो यूँ भी एक संघर्ष है , भय कैसा ? बस सोच सकारात्मक होनी चाहिए , उनके अन्दर विश्वास होना चाहिए कि---

" हवा के रुख को मोड़ने की चाह रखो
अपने अन्दर इतना विश्वास रखो
लोग तुम्हे भरमायेंगे
अनगिनत राह दिखायेंगे
चयन तुम्हारे हाथ है

मेरा फोटो  विश्व परिवार दिवस पर मनोज जी के विचार पढ़िये ...टूटते  परिवार .... बिखरता  समाज
इसमें कोई संदेह नहीं कि वृद्ध व्यक्ति में उत्साह एवं शक्ति कमी होती हैक्योंकि वे स्वजनों द्वारा ही तिरस्कृत होते हैं। आज की युवा पीढी बूढों को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। शायद भौतिकतावादी इस युग में उन्हें धन ही सबसे बड़ी चीज़ दिखती है।
  शिखा वार्ष्णेय  की जिजीविषा  देखते ही बनती है ----उछलूं...लपकूँ  और छू  लूँ ...
आसमान के ऊपर भी
एक और आसमान है ,
उछ्लूं लपक के छू लूं
बस ये ही अरमान है।
                               बना के इंद्रधनुष को
                                  अपनी उमंगों का झूला ,
My Photo संजय मिश्रा  जी माँ के प्रति समर्पित एक रचना लाये हैं ... संग तुम अविराम हो
माँ दहकती धूप में तुम छांव हो तुम शाम हो।
स्वेद से जब मन भरा हो, सांस हो, आराम हो।
दीप आशा हो तुम्हीं, तुम आरती हो श्लोक भी,
जब जुबां खोली, निकलता, एक पावन नाम हो।
My Photo  हेमा दीक्षित  आज की लड़कियों की बात किस खूबी से बयान कर रही हैं ...पढ़िये उनकी रचना ...संकल्प  सन्यास

"लड़कियों की अक्ल 
घुटनों में होती है " 
घुटनों में सिर गाड़े 
डूबती है 
मोटी 'निषिद्ध पोथियों' में
  अनन्या  को पढ़िये .... उसी मोड़  पर
उसी रास्ते के किनारे 
उसी मोड़ पर
आज  भी एक  गीली सी याद लिए
गुज़रती हूँ मैं ...
मगर ना तो अब वहां
वो दरख़्त है
और ना वो पीला पत्ता
My Photo  यथार्थ को कहती मीता जी लायी हैं एक खूबसूरत खयाल ....चेहरा
तूने देखा जिसे
वो मैं नहीं ... इक चेहरा था.
और अकसर
मेरा चेहरा बदलता रहता है.
मेरे हर चेहरे से तू प्यार नहीं कर सकता.
मेरा फोटो  वंदना गुप्ता का कहना है कि ---क्योंकि  मुहब्बत चूड़ियों की सलामती की मोहताज नहीं होती
दुआ आखिर कब तक मांगे कोई  और क्यों 
क्या तुमने कभी ऐसी कोई दुआ की 
नही ना  फिर भी मै सलामत हूँ ना 
तो बताओ तो ज़रा  क्या सिर्फ़
एक मेरी दुआ से क्या होगा
मेरा फोटो  धीरेन्द्र जी  का  मानना  है  कि  जीने के लिए ----एक  हमसफर  चाहिए
जीने के लिए एक जुनू चाहिए
कुछ करने जज्वा जिगर चाहिए
मंजिले मिलेगी मगर -
पाने के लिए एक डगर चाहिए ,
My Photo  आज की ज्वलंत समस्या पर कैलाश जी के विचार जानिए ---किशोरों  में  बढ़ती  अपराध प्रवृति
क्या कारण है किशोरों में इस बढ़ती हुई अपराध प्रवृति का ? संयुक्त परिवारों के विघटन और माता पिता दोनों के अपने अपने कार्यों में व्यस्त होने के कारण बच्चों की उचित देखभाल का अभाव और उन्हें उचित संस्कार न दे पाना एक मुख्य कारण है.
मेरा फोटो डा॰ राजेन्द्र  तेला  निरंतर  बता रहे हैं कि ....वोगेनवेलिया   किनसे   अच्छे हैं ...
बोगेनवेलिया
तुम्हारे पुष्प तो बहुत
सुन्दर होते हैं
लाल पीले सफ़ेद नारंगी
और भी कई रंगों के
दूर से ही लुभाते हैं
My Photo  यशवंत माथुर के मन का पंछी  भर रहा  है उड़ान ....
मन का पंछी !
बोल सकता है
मौन मे भी
जी सकता है
निर्वात मे भी
My Photo डा॰ शरद सिंह  एक गंभीर मुद्दे पर लेखनी चलाती हुयी कह रही हैं ---
न  आना इस देश मेरी लाडो 
इसमें कोई संदेह नहीं है कि ग़रीबी की आंच सबसे पहले औरत की देह को जलाती है। अपने पेट की आग बुझाने के लिए एक औरत अपनी देह का सौदा शायद ही कभी करे, वह बिकती है तो अपने परिवार के उन सदस्यों के लिए जिन्हें वह अपने से बढ़ कर प्रेम करती है और जिनके लिए अपना सब कुछ लुटा सकती है
My Photo  मधुरेश  आज के युवाओं की भावनाओं को कुछ यूं  कह रहे हैं ---उसका बोझ भारी है 
युवा आज का
कर्मी है, साक्षी भी,
युग-परिवर्तन का.
युवा आज का
सामंजस्य है
पाश्चात्य औ' पुरातन का.
My Photo  ब्लोगिंग के बारे में  अपने अनुभव बाँट  रही हैं  सुनीता शानू ---ब्लोगिंग का फैलता मकड़जाल
एक शिशु जो आज वयस्क हो चुका है, जिसने अपने प्रकाश से समस्त विश्व में क्रांति की लहर उत्पन्न कर दी है, और जो आज हमारे सामने अपनी बेमिसाल क्षमता के साथ एक चुनौती बन कर खड़ा हुआ है। जी हाँ! हम बात कर रहे हैं इंटरनेट की दुनियां की ,
  विवेक जैन को पढ़िये ----ज़िंदगी मासूम ही सही.....
हर रात जब नज्में कागज़ पर उतरती हैं तो लगता है, कुछ ये से दिन भी थे जिनका हिसाब नहीं माँगा जा सकता और कुछ ये से दिन थे जिन्हें फिर से जीने कि कवायते तुम अक्सर करते हो. कभी कभी जब पलाश को लफ़्ज़ों में उतारता हूँ तो लगता है, भरी दोपहरी में भी उसकी पीली रंगत लौट आई हो. अक्सर तुम्हारी उम्मीद से बेहतर वही दिन होता है, जो स्वप्न की  तरह आता है और हकीक़त बन निकल जाता है.....
मेरा फोटो  साधना वैद  जी की संवेद्नशीलता उनकी हर रचना में झलकती है ....आज वह क्या कह रही हैं पढ़िये ----मेरा दिल तब तब रोता है...
अपनी इस रचना में मैंने अपने आस पास के जीवन से उद्धृत दो विभिन्न प्रकार के दृश्यों को चित्रित करने का प्रयास किया है ! ये दृश्य हम प्रतिदिन देखते हैं और शायद इतना अधिक देखते हैं कि इनके प्रति हमारी संवेदनाएं बिलकुल मर चुकी हैं !
My Photo सोनल रस्तोगी जी की कहानियाँ कुछ लीक से हट कर होती हैं ....आज पढ़िये उनकी कहानी ---मन का रेडियो  बजने दे ज़रा
आजकल एक गीत हर जगह बज रहा है "मन का रेडियो बजने दे जरा", जब सूना तो पहले तो लगा मन क्या एक रेडियो हो सकता है ...फिर लगा क्यों नहीं अगर मन को कोई बात परेशान कर रही तो, वाकई दूसरा चैनेल लगा कर ध्यान बटाया जा सकता है...
पड़ोस की छत पर खडा मोहित अभी तक टकटकी लगाकर शुची की खिड़की की तरफ देख रहा है ,शायद खिड़की खुले और एक झलक दिख जाए दो दिन हो गए घर से निकली भी नहीं,मोबाइल भी स्विच ऑफ कर रखा है, सारी रात जागते हुए बीती है,समझ में नहीं आ रहा क्या हो गया.......
मेरा फोटो  डा ॰  निधि टंडन का कहना है कि ---
 प्रेम से खूबसूरत कुछ ... नाह रे 



प्रेम को जब तक देखते हैं 
दूर से ... 
बहुत खूबसूरत और प्यारा लगता है ..हैं न ?! 
जब यह घटित हो जाता है 
अपने जीवन में 
तब, समझ आता है कि

आज के लिए बस इतना ही .... अब इजाज़त दीजिये .....   संगीता स्वरूप



23 comments:

  1. शुभप्रभात .... !!
    प्रेम से खूबसूरत कुछ ... नाह रे

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  3. बहुत ही सुन्दर प्रयास, एक मंच पर ही इतनी सारी सुन्दर रचनाओं का मिलन

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  4. सुन्दर संकलन संगीता आंटी... और पोस्ट शामिल करने के लिए आभार...

    सादर
    मधुरेश

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  5. सुंदर लिंक्स चयन ...प्रभावशाली हलचल .....!!
    चलती रहे ...ऐसे ही ....
    शुभकामनायें संगीता जी ....!!

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  6. संगीता जी ..बहुत ही खुबसूरती से सजाया है आप ने आज की हलचल और सभी संकलन बहुत सुन्दर हैं..

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  7. कुछ लिंक पढ़े, काफी अच्छे लगे। बाकी पढ़ने बाकी हैं..

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  8. संगीता जी बहुत सुन्दर लिंक्स का चयन किया है आज आपने ! मेरी रचना को भी इसमें स्थान दिया आभारी हूँ आपकी !

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  9. लिंक्‍स संयो‍जन और प्रस्‍तुति बहुत ही बढिया ... आभार आपका

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  10. bahut hee acche sahitykaron ke acche chuninda link ..sadar badhayee ke sath

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  11. बहुत खूबसूरत लिंक्स संजोये हैं। शानदार हलचल्।

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  12. गज़ब के खूबसूरत लिंक्स.बहुत आभार मेरी रचना को भी स्थान देने का.

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  13. बहुत सुन्दर लिंक्स संयोजन...बहुत रोचक हलचल....आभार

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  14. वाह,,,,,बहुत लिंक्स सजाये है ,,,,संगीता जी.
    मेरी रचना को हलचल में स्थान देने के लिए आभार .....

    MY RECENT POSTफुहार....: बदनसीबी,.....

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  15. बहुत सुन्दर हलचल....
    सादर आभार

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  16. बहुत अच्छी हलचल है आंटी।
    कोशिश है कि सभी लिंक्स पढ़ सकूँ।

    सादर

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  17. बहुत सुन्दर लिंक्स के साथ सार्थक हलचल प्रस्तुति ..आभार

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  18. अच्छे लिंक्स के चयन हेतु ,साधुवाद.मेरी रचना को शामिल करने के लिए,आभार!!

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  19. अच्छी लिंक्स के लिए बधाई संगीता जी

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  20. आपकी तरह हलचल करना अभी तक नही आया। कैसे इतनी खूबसूरती से साफ़-सुथरी पोस्ट लिखते हैं आप फ़ोटू भी लगा देते हो :) एक हम है सारी पोस्ट में कहीं बड़े अक्षर तो कहीं छोटे बताओ कोई बात है।

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आशा है सहयोग बनाए रखेंगे।