Sunday, May 13, 2012

हे माँ तेरी जय हो...

मेरी माँ

सुप्रभात मित्रों,

आज की हलचल में आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन है।
आप सभी जानते हैं आज मदर्स डे है। माँ तुम जैसी...       संगीता स्वरुप ( गीत  
आज की रचनाओं मे मेरी एक कविता जो मैने माँ की याद में लिखी थी...

मेरी माँ

माँ बनकर ये जाना मैने
माँ कि ममता क्या होती है
सारे जग में सबसे सुंदर
माँ की मूरत क्यों होती है...
माँ! 
क्या कल भी निहार रही थी 
तुम मेरी राह,
क्या कल भी रोई थी तुम
आश्रम की चारदीवारी से लग कर
फूट-फूट... जार जार!!

माँ का जन्मदिन

 आज वे बच्ची हैं, मैं हूँ माँ। घुघूती बासूती

बस माँ ही जानती है ... कलई चढ़ाना ... बर्तनों पर भी ,रिश्तों पर भी .. वाणी गीत





माँ ताउम्र हरपल, हरदिन अपने घर परिवार के लिए दिन-रात एक कर अपना सर्वस्व निछावर कर पूर्ण समर्पित भाव से अपने घर परिवार, बच्चों को समाज में एक पहचान देकर स्वयं की पहचान घर चारदीवारी में छुपा कर रखती है। निरंतर संघर्ष कर उफ तक नहीं करती, ऐसी माँ का एक दिन कैसा होगा! कविता रावत
मैं वही हूँ ,
जो तुम्हारे आँचल की छाँव में,
प्यार और दुलार में,
पली-बढ़ी,
नन्ही कली से फूल बनकर खिली,
तब तुमने सुन्दर सपने देखे,
मेरे लिए ,

एक बार जन्म लेने दे माँ... संध्या शर्मा

गृहणी हूँ.....मेरा काम है अनमोल

वो घर की रीढ है। सबके दुख-सुख की भागीदार उसका जीवन भले ही एक परीधि में सिमटा हो, वो पूरा संसार संभालती है। वो ही है जो माँ, पत्नी या बहू, बेटी हर रूप में वो घर-परिवार  के सदस्यों के जीवन की रफ्तार को कायम रखने वाली ऊर्जा बनती है


सबको अपनी-अपनी माँ प्यारी होती है,
मुझको अपनी माँ सबसे प्यारी लगती है !
सरल सुन्दर मन की मधु, मिश्री-सी मीठी,
प्रेम और ममता की सरिता लगती है !

     माँ ! वो पारस है !

कभी माँ के थके पैरों को दबा कर देखो
ख़ुशी जन्नत की अपने दिल में तुम पा जाओगे .

जिसने देकर के थपकी सुलाया है तुम्हे
क्या उसे दर्द देकर चैन से सो पाओगे ?
शिखा कौशिक

नाम से ही सिरहन हो जाती है |
कैसे भूले  हम उस माँ को 
जिसने हमें बनाया है |

इसके साथ ही इजाजत चाहूंगी।
नमस्कार
सुनीता शानू


20 comments:

  1. शुभप्रभात .... !!
    माँ को नमन .... !!
    सबको अपनी-अपनी माँ प्यारी होती है,
    मुझको अपनी माँ ,प्रेम और ममता की सरिता लगती है.... !!
    एक आना दूजे का जाना , ये क्या हलचल मची है ,मन दुखी है .... !!

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    1. नमस्कार विभा जी, आपका शुक्रिया भी। आना जाना तो लगा रहेगा। आप सभी के लिये मेरी शुभकामनाएं। व्यस्तता अधिक है न हलचल कर पाती हूँ न टिप्पणी। इसीलिये सोचा आप लोगों के जिम्मेदार कँधे ज्यादा उपयुक्त हैं।
      सादर

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  2. माँ तुझे शत् शत् नमन,
    माँ को पता होता,
    माँ सब जानती है,
    माँ क्या नहीं कर सकती
    ये शब्द मुझे याद है
    मैं कहा करती थी अपने बचपन में
    आज मुझे फिर चाहिये माँ का साया
    दीदी मत जाओ न प्लीज
    सादर

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    1. जा नही रही हूँ बस हलचल नही कर पा रही हूँ इसीलिये ऎसा लिखा है। जब फ़ुर्सत मससूस करूँगी लौट आऊँगी। आप लोगों का प्यार जो है जाने किसे देता है :)

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    2. अँगुली पकड़ चलना सिखलाया
      चाल चलन का भेद बताया
      संस्कारों का दीप जलाया
      ओ मेरी माँ वो तू ही है ।....दीप्ति शर्मा

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  3. नमन माँ |
    शुभकामनायें ||

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  4. जब फ़ुरसत हो तब आईए………महतारी दिवस की बधाई………… सुप्रभात

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  5. बहुत सुंदर और सामयिक लिक्स का चयन किया आपने
    अच्छी हलचल

    ऐ अंधेरे देख ले, मुंह तेरा काला हो गया,
    मां ने आंखे खोल दी, घर मे उजाला हो गया।।

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  6. बहुत बढ़िया लिनक्स लिए हलचल.....
    शुभकामनायें

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  7. बहुत सुंदर लिनक्स लिए हलचल.
    .MY RECENT POST ,...काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

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  8. बढ़िया लिनक्स लिए हलचल.....
    शुभकामनायें...

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  9. माँ ने जिन पर कर दिया, जीवन को आहूत
    कितनी माँ के भाग में , आये श्रवण सपूत
    आये श्रवण सपूत , भरे क्यों वृद्धाश्रम हैं
    एक दिवस माँ को अर्पित क्या यही धरम है
    माँ से ज्यादा क्या दे डाला है दुनियाँ ने
    इसी दिवस के लिये तुझे क्या पाला माँ ने ?

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  10. बहुत सुंदर लिक्स का चयन किया है आपने.अच्छी हलचल...शुभकामनायें...

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  11. सुनीता ,

    तुम्हारे प्यार और सम्मान के लिए शुक्रिया .... आज कल थोड़ा व्यस्त हूँ .... फुर्सत से लिंक्स देखूँगी ....

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  12. बढ़िया लिनक्स, बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति.

    माँ है मंदिर मां तीर्थयात्रा है,
    माँ प्रार्थना है, माँ भगवान है,
    उसके बिना हम बिना माली के बगीचा हैं!

    संतप्रवर श्री चन्द्रप्रभ जी

    आपको मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं..
    आपका
    सवाई सिंह{आगरा }

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  13. आ.सुनीता जी,

    व्यस्त होने की वजह से बहुत मुश्किल से नेट एक्सेस कर पा रहा हूँ.

    आज की हलचल बहुत अच्छी दी है आपने हालांकि लिनक्स पढना संभव नहीं होगा.

    हलचल छोड़ने का आपका यह तरीका (सीधे ब्लॉग पर सूचित करना) मेरी समझ से परे है.वो भी तब जबकि आपको यह पता था की मैं ११ से १५ मई तक फोन और नेट की पहुँच रहूँगा.

    जिस तरह से मैंने हलचल जोड़ने के लिए औपचारिक आमंत्रण देने से पूर्व आपको व्यक्तिगत मेल से सूचित किया था आप भी यदि चाहती तो हलचल को छोड़ने की सूचना मुझे मेल -SMS या फोन से दे सकती थीं.

    खैर कोई बात नहीं.

    आपके भविष्य की योजनाओं के लिए मेरी और से हार्दिक शुभकामनाएं.


    सादर

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    1. ये लो कुछ ज्यादा बुद्धि नही लगा दी यशवंत आपने... :) ब्लॉग पर डायरेक्ट मेरे उन दोस्तों के लिये लिखा है जिन्हे व्यक्तिगत मेल नही कर पाऊँगी। और भाई ऎसा है मुझे मालूम था आप पंद्रह तारीख तक नही हो यहाँ इसीलिये आज की हलचल की है। अगली हलचल से पहले आप आ जायेंगे यह भी मालूम था। कोई ओचित्य नही है मेल करने का जब मालूम हो कि आप नेट से दूर हैं। पंद्रह को आपको मेल मिल ही जाती।
      रही बात हलचल न करने की कुछ व्यक्तिगत कारण हो गये है वो भी कुछ समय के लिये कह नही सकती कब तक। हलचल का नियम है और मै अभी किसी भी नियम में बँधने में खुद को असमर्थ महसूस कर रही हूँ।
      मुझे लगता है आपको मेरा यहाँ लिखना अच्छा नही लगा। मै हटा लेती हूँ।

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  14. सचमुच माँ हमेँ ईश्वर की सर्वोत्तम देन है।
    बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से मातृदिवस की शुभकामनाएँ।

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  15. बहुत अच्छे लिंक्स..........माँ के नाम शामिल करने के लिए धन्यवाद

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ब्लॉग्स्पॉट मे चल रही कुछ तकनीकी गड़बड़ी से कुछ कमेंट्स स्पैम मे जा रहे हैं जिन्हें तत्काल प्रकाशित करने का प्रयास रहता है फिर भी यदि आपका कमेन्ट यहाँ तत्काल न दिखाई दे तो निश्चिंत रहें आपका कमेन्ट प्रकाशित ज़रूर होगा।

आशा है सहयोग बनाए रखेंगे।