नमस्कार !
अभी अभी फेसबुक से पता चला है कि आज संगीता आंटी का जन्मदिन है। नयी पुरानी हलचल की ओर से हम आपके दीर्घ और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं। (@8:15 AM)












































आसमां का इक छोटा सा टुकडा
जिन्दगी जी कैसे जाती हैं























तुम्हारे
मस्तिष्क तक जा रहे हैं, सभी स्वर-तरंगे भी



























































































































































अभी अभी फेसबुक से पता चला है कि आज संगीता आंटी का जन्मदिन है। नयी पुरानी हलचल की ओर से हम आपके दीर्घ और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं। (@8:15 AM)
सोमवार की इस हलचल मे अपने पाठकों के लिए हम ले कर आए हैं यह खास लिंक्स---























अपनी साँसों में भर लाना
कोयल की मीठी कूक
अपनी आवाज़ में उतार लाना
पगडंडियों की धूल से अपने पाँव सान लाना
कोयल की मीठी कूक
अपनी आवाज़ में उतार लाना
पगडंडियों की धूल से अपने पाँव सान लाना






















आसमां का इक छोटा सा टुकडा
जिसमें देखती हूँ मै
खुद को उडते हुये
उस स्वच्छंद आकाश में














































जिन्दगी जी कैसे जाती हैं
जाते जाते यादे भी जा रही हैं
जिन्दगी अब किस के मोह मे
बाकी हैं ???














































जब कोई कहे
तुम्हारा कान कोई कौया ले गया
तो बेटा !
कौया को नहीं
अपने कान को देखना























इस तरह एक रक्षाबंधन वो भी था , जब हिन्दू मुसलमान एक हो गये थे । आज के दौर में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गयी है .....














































राग-रंग नहीं करना तुझको
संयम है तेरा बल
मानव जीवन तुझे मिला है
रखना इसे निर्मल.























संयम है तेरा बल
मानव जीवन तुझे मिला है
रखना इसे निर्मल.























ये मेरे सपने मुझी पर तो गए हैं
अस्त हो कर के दुबारा पल रहे हैं























अस्त हो कर के दुबारा पल रहे हैं























'टच इज नॉट अ स्किन सेन्स...इट्स अ हार्ट सेन्स'. फिर जैसे उसे समझाने के
अंदाज़ में बोली...'स्पर्श को हम दिल से महसूस करते हैं...आपको ऐसा नहीं
लगता?'
'शायद'...























'शायद'...























ओ पुरुष! तू पुरुषार्थ के
क्यों दंभ से भीगा हुआ?
क्या तू नहीं है जानता?
मेरे जनम से जो जग बना
मेरे अंत से मिट जायेगा...























क्यों दंभ से भीगा हुआ?
क्या तू नहीं है जानता?
मेरे जनम से जो जग बना
मेरे अंत से मिट जायेगा...























तुम्हारे
या मेरे
दिल में हों
पलकों में
या आँखों से........
मस्तिष्क तक जा रहे हैं, सभी स्वर-तरंगे भी
लेकिन,
कानों मे बहरापन फिर भी लगता है














































इंतज़ार की घड़ियाँ जब खत्म होती
तो मेरा मन करता है उसको पूजा की
थाली दिखाऊं या फूलो का हार पहनाऊं























बुरे ख़याल से जो हो चुके सियाह बदन,
क़मर पैकर ही हमसफ़र तलाशते हैं वो।
क़मर पैकर ही हमसफ़र तलाशते हैं वो।






















भारतवासी की माता अब
सुमन बहुत लाचार है गंगा
सुमन बहुत लाचार है गंगा























स्वर्ण अक्षरों में हर उपलब्धि में .....
तेरा नाम लिया जायेगा |
हाँ नारी है तू , आदिशक्ति है तू
,
इसी आत्मविश्वास और हिम्मत की दास्ताँ को
हर शख्स बारी - बारी अब दोहराएगा |























तेरा नाम लिया जायेगा |
हाँ नारी है तू , आदिशक्ति है तू
,
इसी आत्मविश्वास और हिम्मत की दास्ताँ को
हर शख्स बारी - बारी अब दोहराएगा |























धूल माटी में चेहरा छुपाए
सबकी नज़र बचाए
दुबक गयी बेचारी सडक
क्या हमारी ही तरह वो भी
प्रतीक्षा कर रही है
किसी मसीहे का.
loneliness, i bore
life, just waiting
rebukes galore
smiles, kept waiting
life, just waiting
rebukes galore
smiles, kept waiting























जाति, धर्म, समाज की,
दीवार कोई ना मैं ढ़ोती,
ना सरहद की सीमाओं में,
बंधी बंधी मैं रोती,
काश मैं पंछी होती.






















दीवार कोई ना मैं ढ़ोती,
ना सरहद की सीमाओं में,
बंधी बंधी मैं रोती,
काश मैं पंछी होती.






















I'm going to be away,,
And will remain incomplete in my way....!!!!!






















हाँ,शायद यही बात है....
मेरे भीतर भी
मेरे भीतर भी
एक नन्हे पंछी की तरह
कुछ पल को अपने नरम घोंसले में जा छिपने की आस जगी है शायद......






















बह गई काजल के संग .....
श्यामल मन की...
घन-घोर ,कारी-अंधियारी ....!!
कर गयी उजियारी ....
मेरे क्लांत से मन को ....
मुस्कुराती छवि तुम्हारी ...!!
श्यामल मन की...
घन-घोर ,कारी-अंधियारी ....!!
कर गयी उजियारी ....
मेरे क्लांत से मन को ....
मुस्कुराती छवि तुम्हारी ...!!






















और इस गजल को सुनते हुए इजाजत दीजिये अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक--
शुभप्रभात .
ReplyDeleteआभार यशवंत जी बहुत आभार ...
हलचल यूँ ही चलती रहे .....!!
शानदार हलचल करती सुंदर लहरें
ReplyDeleteअहा, बड़े ही सुन्दर सूत्र..
ReplyDeleteअच्छे लिंक्स !
ReplyDeleteसुंदर लिंक्स का चयन. धीरे धीरे जाऊँगी उन पर. मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिये आभार.
ReplyDeleteहां संगीता दी को उनके जन्मदिन की बहुत शुभकामनाएँ. मेरा यह सन्देश उन तक पहुंचा दें. धन्यबाद.
ReplyDeleteशुक्रिया रचना
Deleteदीदी मेरी तरफ से भी जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें :)
Deleteसुन्दर लिंक संयोजन... आभार माथुर जी
ReplyDeleteबहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण.....
ReplyDeleteऔर लिंक्स भी लाजवाब............
हमारी रचना को स्थान देने का शुक्रिया यशवंत....
जुग-जुग जियो :-)
सस्नेह.
अनु
खूबसूरत रचनाओं से सजा लिंक ... मेरी रचना शामिल करने के लिए आपका धन्यवाद यशवंत !!!
ReplyDeleteThanks for including my link on this halchal :)
ReplyDeletehttp://apparitionofmine.blogspot.in/2012/05/alone-in-my-way.html
~Noopur~
हलचल पर भी संगीता जी को आज के दिन की ढेरों शुभकामनायें .....!!!आज वाकई जबरदस्त हलचल है .....!!
ReplyDeleteअनुपमा .... शुक्रिया
Deletebahut hi shandar link sajai hai yashwant ji ! dheere sab ko padhne ki koshish karunga . meri post shamil karne ke liye shukriya .
ReplyDeleteवाह बहुत ही सुन्दर लिंक्स संकलन... संगीता जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...
ReplyDeleteसंध्या जी .... शुक्रिया
Deleteअति सुन्दर |
ReplyDeleteआभार ||
संगीता जी को जन्मदिवस की बहुत बहुत बधाई। लिंकों पर फुरसत में लौटेंगे।
ReplyDeleteदीपिका ..... शुक्रिया
Deletebahut sundar yashwant.... meri taraf se sangita jee ko janamdin ki dadhai
ReplyDeleteसोनिया ...शुक्रिया
Deleteसुंदर प्रस्तुतीकरण.....धन्यवाद & शुभकामनायें!!!
ReplyDeleteबहुत ही सुव्यवस्थित हलचल है आज की यशवंत जी ! हरिहरन जी की मधुर आवाज़ में इतनी कर्णप्रिय गज़ल सुनवाने के लिये शुक्रिया !
ReplyDeleteसुन्दर लिक्स..संगीता जी को जन्म दिन की बधाई...
ReplyDeleteमहेश्वरी जी ...शुक्रिया
Deleteसंगीता जी को जन्म दिन की बहुत२ बधाई...शुभकामनाए
ReplyDeleteबहुत अच्छी लिंक्स प्रस्तुति,....
RECENT POST....काव्यान्जलि ...: कभी कभी.....
धीरेन्द्र जी .... शुक्रिया
Deleteबहुत सुन्दर यशवंत ...बहुत अच्छे लिंक्स मिले ..
ReplyDeleteहमारी रचना को सम्मान देते रहने का बहुत - बहुत शुक्रिया यशवंत जी और भी बहुत सुन्दर लिंक्स पढ़ने को मिले धन्यवाद |
ReplyDeleteachhe link hai sabhi aaj ... maza aa gaya ...
ReplyDeleteसगीता जी को हमारी और से भी जन्मदिन के हार्दिक शुभकामनाएं और आपका सुन्दर हलचल प्रस्तुति के लिए आभार
ReplyDeleteकविता जी .... शुक्रिया
Deleteसंगीतादीदी(बुरा मत मानियेगा न जाने क्यों दीदी कहने का जी कर गया) को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाये .... :D
ReplyDeleteआप मुझे दीदी कहें और मैं बुरा मानूँ ...भला क्यों ? अच्छा लगा कि आपने मुझे अपना समझा ... बहुत बहुत शुक्रिया
Deletesangeeta ji janm din kee bahut bahut badhae
ReplyDeleteyash ji thanjks . aur music to hamesa k tarah bemisaal hi aap select karte ho ....
पलाश ...शुक्रिया
Deleteयशवंत हलचल बहुत सुंदर लगाई है .... आज लिंक्स नहीं पढ़ पायी हूँ ...कल देखूँगी :):) शुक्रिया
ReplyDeletewaah....kyaa baat hai. anek kaam ke links mile.
ReplyDeleteबहुत ही बढ़िया लिंक्स दिये हैं आपने आभार ....
ReplyDeleteSangeetaji ko janamdin ki shubhkamnayen
ReplyDeleteaapke nirantar sneh ke liye hriday se abhaar. aap is layak samjhte hain ye utsahvardhan karta hai.
anya suder chunaav ke liye bhi abhaar avum badhai.
shubhkamnayen