Monday, April 9, 2012

दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँ

नमस्कार! सोमवार की हलचल मे आपका स्वागत है। अभी कल मैंने फेसबुक पर संगीत प्रेमी मित्रों के लिए एक ग्रुप बनाया है। अगर आप फेसबुक पर हैं तो इस ग्रुप का हिस्सा बन सकते हैं और अपनी पसंद के गाने वहाँ पोस्ट कर सकते हैं। 

साभार :गूगल इमेज सर्च


तो ये रहे आज के लिंक्स--

(1)

नकल का सिद्धांत

बताती हुई 

तुम अक्सर मेरी कविताओं में आती हो...

मैं जान जाता हूँ
अपनी औकात

(2)

वक़्त की डाली पर

खिलने को तरसती हैं.............

प्यार  की कली 

(3)

पूरी करने की चाह में
एक कविता अधूरी सी
लिखते हुए यह -क्षणिकाएं -
गुनगुना रहा हूँ
वन्दे मातरम्
 

(4)

दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँ

पर यह भी 
एक सच है कि

हर एक इंसान अपने आप में एक दुनिया है


(5)

फूल कुमारी उदास है...

क्योंकि वह

नहीं समझ सकती

डॉट्स . . . की भाषा !




 और इस गाने के साथ ही आज के लिये इजाजत दीजिये यशवन्त माथुर को --



16 comments:

  1. दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँ .....
    एक सच यह भी है कि ,
    हर एक इंसान अपने आप में एक दुनिया है ....
    " तो फिर ".... ??

    ReplyDelete
  2. मन में कुछ बाकी नहीं रखना चाहिये, दो दिन की जिंदगी है,कोई अरमान नहीं बाकी रहना चाहिये |अच्छी हलचल मचाई है |
    आशा

    ReplyDelete
  3. वाह!!!

    जवाब नहीं आपका यशवंत....

    पूरी करने की चाह में
    एक कविता अधूरी सी
    लिखते हुए यह -क्षणिकाएं -
    गुनगुना रहा हूँ

    बढ़िया प्रस्तुति.
    सस्नेह.
    वन्दे मातरम्

    ReplyDelete
  4. बड़ी सुन्दरता से पिरोया है!
    आभार!

    ReplyDelete
  5. बेहतरीन क्षणिकएं.... अच्छी हलचल

    ReplyDelete
  6. हलचल तो हलचल ही है .....
    उसपर निराली क्षणिकाएं ...
    नित-नित नई बनायें ...
    शुभकामनायें ...

    ReplyDelete
  7. वाह ...बहुत ही बढि़या

    ReplyDelete
  8. सुंदर लि‍क्‍स...बधाई और मुझे शामि‍ल करने का शुक्रि‍या..

    ReplyDelete
  9. .सभी क्षणिकाओ ने बहुत सुन्दर हलचल मचाया है......मेरी कवि‍ता शामि‍ल करने के लि‍ए धन्‍यवाद।..

    ReplyDelete
  10. लिंक्स तो अच्छे हैं ही ,
    उन्हें शानदार तरीके से क्षणिकाओं में पिरोया गया है|
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार!

    ReplyDelete
  11. अच्छी हलचल रही सब लिंक्स पर तो नहीं जा पाया हाँ मगर जिनपर भी गया किसी ने भी निराश नहीं किया ...मेरे अनुसार सेलेक्शन ऑफ द डे रहा श्री अरुणकुमार निगम जी की गज़ल (मेरा निजी विचार नो विवाद :)
    और अंत में आपकी अपनी शैली में एक प्यार सा गीत ...."अपने लिए जिए तो क्या जिए"
    वाह ! वैसे जीते फिर भी सभी अपने लिए ही हैं :)))
    अरे हाँ शुक्रिया इस नाचीज़ की भी हौसला अफजाई करने के लिए !

    ReplyDelete
  12. हर बार प्रतीक्षा रहती है इस सृजनपूर्ण हलचल की।

    ReplyDelete


ब्लॉग्स्पॉट मे चल रही कुछ तकनीकी गड़बड़ी से कुछ कमेंट्स स्पैम मे जा रहे हैं जिन्हें तत्काल प्रकाशित करने का प्रयास रहता है फिर भी यदि आपका कमेन्ट यहाँ तत्काल न दिखाई दे तो निश्चिंत रहें आपका कमेन्ट प्रकाशित ज़रूर होगा।

आशा है सहयोग बनाए रखेंगे।