नमस्कार! सोमवार की हलचल मे आपका स्वागत है। अभी कल मैंने फेसबुक पर संगीत प्रेमी मित्रों के लिए एक ग्रुप बनाया है। अगर आप फेसबुक पर हैं तो इस ग्रुप का हिस्सा बन सकते हैं और अपनी पसंद के गाने वहाँ पोस्ट कर सकते हैं।
तो ये रहे आज के लिंक्स--
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| साभार :गूगल इमेज सर्च |
तो ये रहे आज के लिंक्स--
(1)
नकल का सिद्धांत
बताती हुई
तुम अक्सर मेरी कविताओं में आती हो...
मैं जान जाता हूँ
अपनी औकात
(2)
वक़्त की डाली पर
खिलने को तरसती हैं.............
प्यार की कली
(3)
पूरी करने की चाह में
एक कविता अधूरी सी
लिखते हुए यह -क्षणिकाएं -
गुनगुना रहा हूँ
वन्दे मातरम्
लिखते हुए यह -क्षणिकाएं -
गुनगुना रहा हूँ
वन्दे मातरम्
(4)
दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँ
पर यह भी
एक सच है कि
एक सच है कि
हर एक इंसान अपने आप में एक दुनिया है
(5)
फूल कुमारी उदास है...
क्योंकि वह
नहीं समझ सकती
डॉट्स . . . की भाषा !
और इस गाने के साथ ही आज के लिये इजाजत दीजिये यशवन्त माथुर को --

दिल में यही तमन्ना है सारी दुनिया की सैर करूँ .....
ReplyDeleteएक सच यह भी है कि ,
हर एक इंसान अपने आप में एक दुनिया है ....
" तो फिर ".... ??
मन में कुछ बाकी नहीं रखना चाहिये, दो दिन की जिंदगी है,कोई अरमान नहीं बाकी रहना चाहिये |अच्छी हलचल मचाई है |
ReplyDeleteआशा
वाह!!!
ReplyDeleteजवाब नहीं आपका यशवंत....
पूरी करने की चाह में
एक कविता अधूरी सी
लिखते हुए यह -क्षणिकाएं -
गुनगुना रहा हूँ
बढ़िया प्रस्तुति.
सस्नेह.
वन्दे मातरम्
आभार
ReplyDeleteबड़ी सुन्दरता से पिरोया है!
ReplyDeleteआभार!
बेहतरीन प्रस्तुति,सुन्दर हलचल...
ReplyDeleteRECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....
RECENT POST...फुहार....: रूप तुम्हारा...
बेहतरीन क्षणिकएं.... अच्छी हलचल
ReplyDeleteहलचल तो हलचल ही है .....
ReplyDeleteउसपर निराली क्षणिकाएं ...
नित-नित नई बनायें ...
शुभकामनायें ...
वाह ...बहुत ही बढि़या
ReplyDeleteसुंदर लिक्स...बधाई और मुझे शामिल करने का शुक्रिया..
ReplyDelete.सभी क्षणिकाओ ने बहुत सुन्दर हलचल मचाया है......मेरी कविता शामिल करने के लिए धन्यवाद।..
ReplyDeleteसुंदर हलचल
ReplyDeleteलिंक्स तो अच्छे हैं ही ,
ReplyDeleteउन्हें शानदार तरीके से क्षणिकाओं में पिरोया गया है|
मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार!
अच्छी हलचल रही सब लिंक्स पर तो नहीं जा पाया हाँ मगर जिनपर भी गया किसी ने भी निराश नहीं किया ...मेरे अनुसार सेलेक्शन ऑफ द डे रहा श्री अरुणकुमार निगम जी की गज़ल (मेरा निजी विचार नो विवाद :)
ReplyDeleteऔर अंत में आपकी अपनी शैली में एक प्यार सा गीत ...."अपने लिए जिए तो क्या जिए"
वाह ! वैसे जीते फिर भी सभी अपने लिए ही हैं :)))
अरे हाँ शुक्रिया इस नाचीज़ की भी हौसला अफजाई करने के लिए !
बढ़िया हलचल.
ReplyDeleteहर बार प्रतीक्षा रहती है इस सृजनपूर्ण हलचल की।
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