Tuesday, April 3, 2012

नयी पुरानी हलचल मे आज---

"अप्रेल" का नाम आते होटों पर हंसी आ जाती .... मन सोचने लगता है ... किसे हमलोग मूर्ख बनाए ... कोई हमें मूर्ख न बना दे ,चौकने भी रहते है .... अत: ... किसी के द्वारा मूर्ख बना दिए जाने  पर बुरा नहीं मानना चाहिए ..... ?? आपने किसे-किसे "अप्रेल-फूल" बनाया.... ? आप लोगों को पता है .... मुझे जलेबी बहुत पसंद है .... एक बार मेरी पड़ोसन की बेटी एक ढंका डोंगा लेकर आई और बोली मेरी माँ आपके लिए जलेबी भेजी है .... सुबह का समय और गर्म-गर्म जलेबी ..... न कुछ सोची न समझी और डोंगा लेकर जलेबी खाने टूटी लेकिन डोंगा खोलते उसमे से मिटटी के बड़े-बड़े लड्डू निकले और मैं मूर्ख बनी ..... "1अप्रेल" जो था.... हाँ हाँ हाँ हाँ ......

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http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/#%21/2012/03/blog-post.html


प्रेम संबंधों के शुरूआती चरण में इसका स्तर विधाई भूमिका निभाता है .आकर्षण की प्रबलता और टिकाउपन का पैमाना बनता है
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http://ekprayas-vandana.blogspot.in/2011/04/blog-post_21.html


अहंकार के दो बच्चे
" मैं " और " मेरा "
खूब फ़ुले फ़ले

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http://sada-srijan.blogspot.in/2009/05/blog-post_23.html



सपने देखना किसे अच्‍छा नहीं लगता, सबकी आंखों में कोई न कोई सपना बसा होता है, हां ये बात जरूर है कि सबके सपने पूरे नहीं हो पाते लेकिन फिर भी लोग सपने देखना बन्‍द तो नहीं कर देते,

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http://mylifescan.blogspot.in/2010/12/blog-post.html
मैं संग तेरे चलूंगी तेरा  साया बन रहूंगी पर,
तेरे गुमान ने बेतरतीबी से ठुकराया है मुझे |
जीते जी मैंने खुद को मिट्टी बना डाला था, 
तेरे भरोसे पे ऐतबार  ने मिटा डाला था मुझे

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http://jazbaattheemotions.blogspot.in/2010/12/blog-post.html


कुछ तो मुर्दापरस्ती का दस्तूर था
यूँ भी हर कोई रस्मो से मजबूर था

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http://punamsinhajgd.blogspot.in/2011/04/blog-post.html
बस ....
एक आत्मसम्मान बाकी है 
उस दामन में जो नितांत मेरा है

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http://swarnakshar.blogspot.in/2011/04/blog-post.html


ये सुन्दर वायुमंडल और साथ में ऐसी काया| हरित, श्यामला तल और नीला नभ ये कैसे पाया.

बड़े प्रेम से धरती बोली जिसने मुझको रचा है| जो सर्जन करता है सबका ये भी उसका रचा है.



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बहुत ज़्यादा लिंक्स जो आपके पढ़ने की खुराक हो,जुटा नहीं पा रही हूँ,अफसोस है ,लेकिन मेरी मजबूरी है की मैं आपका साथ छोडना भी नहीं चाहती। 


विभा रानी श्रीवास्तव


16 comments:

  1. एक और अच्छी प्रस्तुति |
    ध्यान दिलाती पोस्ट |
    सुन्दर प्रस्तुति...बधाई
    दिनेश पारीक
    मेरी एक नई मेरा बचपन
    http://vangaydinesh.blogspot.in/
    http://dineshpareek19.blogspot.in/

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  2. सुन्दर लिंक्स ………बढिया हलचल

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  3. जो भी और जितने जुटाए हैं ,

    लिंक्स सुन्दर जुटाए हैं आपने ,गुणवत्ता लिए आयें हैं ,सबका मन लुभाएँ हैं .

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  4. बहुत बढिया हलचल
    …आभार

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  5. शुक्रिया विभा जी जज़्बात की पोस्ट को यहाँ जगह देने का ।

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  6. बढ़िया हलचल....
    सादर आभार।

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  7. वाह ...बहुत खूब ।

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  8. अच्छी हलचल ... कोशिश रहेगी सब लिंक्स पर हाज़री लगाने की ... धन्यवाद ... !!

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  9. सुन्दर लगी यह हलचल... और यहाँ खुद को पा कर और भी अच्छा लगा... आपका शुक्रिया

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  10. बहुत अच्छे लिंक्स दिये हैं आंटी!


    सादर

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  11. बहुत सही लिखा है।

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  12. क्या कहने
    बहुत सुंदर हलचल

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ब्लॉग्स्पॉट मे चल रही कुछ तकनीकी गड़बड़ी से कुछ कमेंट्स स्पैम मे जा रहे हैं जिन्हें तत्काल प्रकाशित करने का प्रयास रहता है फिर भी यदि आपका कमेन्ट यहाँ तत्काल न दिखाई दे तो निश्चिंत रहें आपका कमेन्ट प्रकाशित ज़रूर होगा।

आशा है सहयोग बनाए रखेंगे।