नमस्कार! सोमवार की हलचल मे आनंद लीजिये इन खास लिंक्स का--
(1)
किस्म-किस्म के फूल
हैं हर तरफ मगर
कुछ खास है
अप्रैल फ़ूल से मुलाक़ात होना
(2)
विचारों का बादल...
घुमड़ घुमड़ कर
लिखवा दिया करता है
यह क्षणिकाएं
(3)
तुमसे मिलने की यात्रा....!!
करते हुए
सरकार की नाक में दम,
कर गया लेटर बम
(4)
ऐसा क्यूँ होता है?
कि
ज़िंदगी की किताब में,,, कुछ पन्ने बहुत हसीन होते हे!!!!
वक़्त गुज़र जाता है,,,
और बस यादें रह जाती है . . . . .!!!!
(5)
समय का दर्द हो
इस हलचल की
दीवारें सुनती हैं सब
और इस मस्त गाने के साथ ही आज के लिए इजाजत दीजिये यशवंत माथुर को-
आभार ।
ReplyDeleteबढ़िया प्रस्तुति ।।
बढ़िया हलचल ॥सभी लिंक्स अच्छे लगे ...
ReplyDeleteइतने सारे और खूबसूरत से पेश किये गये लिंक्स के लिए आभार |
ReplyDeleteमस्त गाने के साथ हलचल भी मस्त है.मेरी रचना को हलचल में स्थान देने के लिए बहुत -बहुत धन्यवाद..यशवन्त..
ReplyDeleteशुक्रिया यशवंत जी , मेरे ब्लॉग को शामिल करने के लिये
ReplyDeleteआपके बेहतरीन अंदाज़ का एक और नमूना पेश किया है.लोगों के लिखे हुए को एक काव्यमय अंदाज़ में प्रस्तुति काविले तारीफ है...
ReplyDelete"समय का दर्द हो
या कस्तूरी प्रीत !
इस हलचल की
दीवारें सुनती हैं सब"
लाजबाब !
सादर...!
बहुत बढ़िया खुबशुरत हलचल,यशवंत जी ...बधाई
ReplyDeleteMY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: मै तेरा घर बसाने आई हूँ...
प्रस्तुति तो आपकी बढ़िया होती ही है.........
ReplyDeleteलिंक्स अब देखती हूँ....बढ़िया ही होंगे...
सस्नेह.
अच्छी हलचल
ReplyDeleteआभार !
ReplyDeleteबहुत बढ़िया !
ReplyDeleteभाग्य बदलते देर नहीं लगती !
वाह ...बहुत ही बढिया।
ReplyDeleteVERY NICE .THANKS
ReplyDeleteYE HAI MISSION LONDON OLYMPIC -like this page and show your passion of indian hockey
बढ़िया हलचल.
ReplyDeleteयशवंत अंकल, इस कविता जैसी हलचल में मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए ढेर सारा थंक्यू....:)
ReplyDeleteबढ़िया चर्चा, सुंदर लिंक्स.
ReplyDeleteमेरी पोस्ट को शामिल करने के लिये धन्यबाद.
सभी रचनाये बढ़िया है...वाह
ReplyDeleteकल मैं यहाँ पर उपस्थित नहीं हो सकी क्योंकि इंटरनेट बाधित था...
ReplyDeleteअभी सारे लिंक्स देखे...सभी अच्छे लगे.
मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार.