Wednesday, March 28, 2012

मधुर- मधुर मेरे दीपक जल ...


आप सभी को सदा का नमस्‍कार ...
आप सभी का स्‍वागत है बुधवार की इस हलचल में जिसमें नये लिंक्‍स तो हैं ही आप सभी के लिए पर दो ब्‍लॉग ऐसे भी शामिल हैं जिनकी पहली पोस्‍ट पर होगी आपकी नज़र ... जहां शब्‍दों के भाव एक हो गए हैं कुछ इस तरह ... हम मंजिल के मोड़ पर आकर रूके हुए से हैं ...जहां होता है कई बार .अनमने से मन को मनाना  .. .मुझे अब कुछ नहीं चाहिए  ... वक्‍त का साथ गर मिल जाए तो जिन्‍दगी के मायने बदल जाएं ... कुछ बुजुर्गों की नज़र इस राह से हटती नहीं ....


  चुंदड़ी हर विवाहिता का श्रृंगार है , जिसे पहनकर वह इठलाती , गुनगुनाती है ... मैं ना पहनूं थारी चुंदड़ी ....


  रूह से रूह का ऐतबार आज हो गया ... नसीब से आज दीदार - ए - यार हो गया


  मुझे अब कुछ नहीं चाहिए हो सके तो  ... तू तू ..मैं मैं ...


  पांच विकारों में एक विकार ... क्रोध


  हम मंजिल के मोड़ पर आकर रूके हुए से हैं .... तस्‍वीरें भी बोलती हैं


  अनमने से मन को मनाना चाहता हूं ... गुनगुनी सी रात


  ना जनम लिया न फूंका तन वैसे का वैसा ही मन ... पीपल


  नव युग के नव ज्योत जला तूफानों से होड़ लगा ... आव्‍हान



  जैसे आये थे बापू इस देश में बनकर कोई मेहमान ... क्यों जता रहे हो यह अहसान ?


  आए जो तू तो मुस्‍कराऊं मैं बहार सी .... तेरे इंतजार में


  कुछ बुजुर्गों की नज़र इस राह से हटती नहीं .... लौटना बच्चों का बाकी है अभी तक गाँव में ...


  युग- युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रति पल ... मधुर - मधुर मेरे दीपक जल


  मेरे प्रेम में ... लिख सको तो ...

                                .... ये है इनके ब्‍लॉग की पहली पोस्‍ट ....


  तुम लिखकर अपनी कहानी ... तुम न जाने कहां खो गए ...


  वक्‍त का साथ गर मिल जाए तो जिन्‍दगी के मायने बदल जाएं ... वक्‍त और जिन्‍दगी


  इसी के साथ आप सबसे इज़ाजत लेती हूं ... हलचल की अगली कड़ी के आने तक ...







                                                                 रे काले कउए से डरियो ...

शुभ दिन के साथ शुभकामनाएं ...


23 comments:

  1. सशक्त पठन सूत्रों (लिंक)से सजी हलचल
    हमारे 'क्रोध' को यहाँ उजागर करने का शुक्रिया!!:)

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  2. अच्छी हलचल...
    स्थापित ब्लोगर्स की पहली रचना पढ़ कर अच्छा लगा...

    शुक्रिया.
    सस्नेह

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  3. आदरणीया सदा जी
    बेहतरीन लिंक्स हैं।


    सादर

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  4. बहुत सुंदर लगा . आभार .

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  5. सार्थक हलचल ॥सभी लिंक्स बेहतरीन

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  6. लाजवाब हलचल ... शुक्रिया मुझे भी शामिल करने का ...

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  7. लाजवाब हलचल ..हलचल में मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद..सदा जी..

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  8. pyare sabhi lnks se parichay ho gya dhanyavad.

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  9. बढ़िया प्रस्तुति संयोजन और चयन सभी बढ़िया .

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  10. विविध रंगों से सजी आज कि हलचल के के लिए बधाई स्वीकार कीजिये सदा जी ! और मुझे स्थान देने के लिए अलग से आभार !

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  11. सुंदर हलचल... बढ़िया लिंक्स...
    सादर आभार।

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  12. सदा जी , सदा की भांति सदाबहार हलचल के लिए बधाई..

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  13. बहुत बढ़िया हलचल और अंत में सामयिक व्यंग ..जाने क्या क्या छुपा कब बाहर आ जाय सुनकर अब तो बहुत आश्चर्य नहीं होता ...आदत से हो गयी है .. ..हश्र सभी देखते है ...
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति हेतु आभार

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  14. मेरी रचना को हलचल में शामिल करने के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद! बहुत ही प्रभावशाली और सार्थक हलचल रही आज की ।

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