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*नयी-पुरानी हलचल पर दिये गए लिंक्स का चयन पूरी तरह प्रस्तुतकर्ता की पसंद पर निर्भर है यद्यपि रचनाओं की अधिकतम मौलिकता पर भी लिंक्स का चयन करते समय ध्यान रखा जाता है।


इस ब्लॉग पर आने वाले सभी पाठकों /रचनाकारों/ब्लोगर्स से निवेदन है कि यदि किसी लिंक अथवा लिंक की गयी रचना को कहीं से चुराया गया पाएँ तो तत्काल हमारा ध्यान उस ओर अवश्य दिलाएँ जिससे समय रहते इस प्रकार के लिंक्स को हटाया जा सके।
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Tuesday, February 28, 2012

Day Of Celebretion

आज मंगलवार यानी सबका मंगल ही मंगल हो.... !! मेरी तीसरी प्रस्तुती , नई-पुरानी हलचल का.... !! "क्यूँ कि कल हमलोगों के बहुत अपनों का पुस्तक विमोचन हुआ....... इस लिए आज हमलोगों के लिए "Day Of Celebretion" है...मन में थोड़ी कसक है, कल दिल्ली में पुस्तक-मेला था और मैं नहीं जा सकी....:) निमंत्रण था , बहुतो ने आमंत्रित किये थे.... ! खैर.... आँखों देखा ,देख नहीं सकी तो क्या हुआ..... आँखों देखा पढ़ तो सकती हूँ न.... ? आइये..... आप अपने अनुभव में मुझे हिस्सेदार बनाते हुए , नीचे दिए गए लिंक्स पर नजर डालिए.....

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वैसे तो इंटरनेट के रथ पर सवार ‘ऑनलाइन डायरी’ के रूप में विकसित हुए ब्लॉग जगत में दूर से देखने पर आज भी पुरूषों का वर्चस्व दिखाई पड़ता है, लेकिन यदि गहराई से देखा जाए, तो बिना शोर-शराबा किए पूरी गंभीरता के साथ लगातार काम करने वाले ब्लॉतगर्स में महिलाओं का प्रतिशत अच्छा खासा है। दिलचस्पी की बात यह है कि यह प्रतिशत प्रिंट मीडिया के मुकाबले कहीं ज्यादा है।
http://za.samwaad.com/2012/02/popular-hindi-lady-bloggers.html

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ .... की बोर्ड वाली ये ओरतें... मेरी दुनिया मेरे सपने

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हिंदुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला में ब्लागर अक्षिता और  'पाखी  की दुनिया' की चर्चा
http://pakhi-akshita.blogspot.in/2012/01/blog-post_03.html

Akshitaa (Pakhi).... पाखी की दुनिया…. 

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रात की रागिनी करती हमारा इन्तजार
अपनी पनाहों में लेने को
चाँद भी चांदनी को भेजता ज़मी पर
हमे अपनी भीनी भीनी रौशनी में जगमगाने को
http://amrendra-shukla.blogspot.in/2011/02/blog-post_24.html

amrendra "amar”….. आने वाली शाम…. यादें - अमरेन्द्र शुक्ल 'अमर'  

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सोने की चिड़िया (कोहिनूर हीरा) को लुटते देखा है.... !!
विश्व मार्गदर्शक के रूप में स्वर्णिम इतिहास देखा है
तो संघर्षमय, पीड़ा, वेदना से भरा पृष्ठ भी देखा है
पाश्चात्य संस्कृति के दलदल में फंसा ही सही
किन्तु अब इससे उभरता हुआ अपनी जड़ों में लौटते देखा है,
फिर से परम वैभव की ओर बढ़ते देखा है।
http://apnapanchoo.blogspot.in/2012/02/blog-post_19.html

lokendra singh rajput.... मैंने भारत को करीब से देखा है.... अपना पंचू....

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जनगणना के प्रारंभिक आकंड़ोँ के अनुसार जयपुर शहर 30 लाख की शहरी जनसंख्या के साथ टॉप टेन शहरोँ की सूची मेँ आखिरी पायदान पर है जबकी देश की आर्थिक राजधानी मुबंई
भारत का सबसे भीड़-भाड़ वाला शहर बन गया है।
जनगणना के प्रारंभिक आंकड़ोँ मेँ मुंबई 1.84 करोड़ की आबादी के साथ जनसंख्या के लिहाज से टॉप पर है।
http://indiadarpan.blogspot.in/2011/11/30.html

खबरनामा….जयपुर 30 लाख पार, मुबंई खचाखच…. खबरनामा….

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 आज कल किसी के पास ज्यादा पढ़ने के लिए वक्त ही नही है । लंबे और बड़े लेख तो लोग देखते ही छोड़ देते है । कभी उन्हें काफी नुकशान भी उठाना पड़ता है । पर वे इसकी परवाह नही करते । कम शब्दों में भी बातें कही जा सकती है । सरल व सहज बातें असर भी करती है । कभी कभी तो वे दिलों दिमाग पर छा जाती है ।
http://markrai0.blogspot.in/2009/04/blog-post_9609.html

मार्क राय.... वक्त नही है….. जीवन के रंग….

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बसपा से कई आरोपों के चलते निकाले गए कुशवाहा को भाजपा ने लपक लिया। भाजपा की मंशा तो उनके जरिए पिछड़ा वर्ग की राजनीति चमकाने की थी लेकिन दांव उलटा पड़ गया और उनकी दागदार छवि की वजह से हंगाम बरप गया। पार्टी में ही दो धड़े हो गए। इतना हल्ला मचा कि भाजपा को फिलहाल उनकी सदस्यता स्थगित करनी पड़ी।
http://sandhyasanjh.blogspot.in/2012/01/blog-post_2905.html

संध्या.... सर्दियों में चुनावी सरगर्मी.... संध्या....  

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इस वीडियो में आपको निम्न प्रश्नों के उत्तर मिल जायेंगे ...
१) लोकपाल बिल जब आ चुका है तो अन्ना क्या मांग कर रहे हैं.?
२) अन्ना की कितनी मांगे इस सरकारी लोकपाल में मान ली गई हैं ?
३) इस बिल के पास होने से लोगों को फायदा है या नुकसान ?
४)सरकारी अधिकारी जिसके खिलाफ शिकायत की जाएगी उसे शिकायत के बाद कितनी सुविधा दी गई है ?
५)शिकायतकर्ता को शिकायत करने के बाद कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है ?
६) जन समूहों (पब्लिक ट्रस्टों ) को किस तरह से सरकार ने अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया है ?
७)सरकारी तंत्र की जाँच फिर से किस तरह सरकार के प्रभाव में ही है ?
http://josochanahi.blogspot.in/2012/01/blog-post.html

रेखा.... सरकारी लोकपाल की खामियां…. राहें जो अनजानी सी थी... 

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 ताल विहीन “संगीत” ,नासिका विहीन मुख की भांति बताया गया है |ताल से अनुशासित होकर ही संगीत विभिन्न भावों और रसों को उत्पन्न कर पता है |ताल की गतियाँ स्वरों की सहायता के बिना भी रस -निष्पत्ति में सक्षम होती हैं ||http://swarojsurmandir.blogspot.in/2012/01/blog-post.html
Anupama Tripathi…, ताल और रस... स्वरोज सुर मंदिर….

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चाँद पागल है,अंधेरे में निकल पड़ता है
रोज तारो की नुमाइश में खलल पड़ता है
उनकी याद आई है,सांसो जरा धीरे चलो
धडकनों से भी इबादत पे असर पड़ता है
http://dheerendra21.blogspot.in/2011/10/00000-00000-00000-00000-00000.html

dheerendra..... एस एम् एस.-शायरी...... फुहार...

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सच ! नहीं है रंज मुझे, तेरी जुदाई का
तेरी पनाह में, क्या कम उदास थे ??
ज़िंदा तो हूँ, पर ज़िंदा नहीं हूँ
जिंदगी ने, जीने का यह सलीका भी सिखा दिया है यारो !
http://kaduvasach.blogspot.in/2012/02/blog-post_11.html

उदय – uday.... सलीका भी सिखा दिया है यारो.... कडुवा सच

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 जो भी है ,ज्ञान से परे,
दृष्टि से दूर ,जिह्वा से अकथनीय
कानों से अश्रव्य
बस , बार-बार वही
खींच लेता है , अज्ञात का आकर्षण

http://shalini-anubhooti.blogspot.in/2012/02/blog-post_19.html

saline… अज्ञात का आकर्षण.... Anubhooti…

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 छड़ी पड़ती लैला के हथेली पर ,निशाँ ,मजनू के हथेली पर होता...
तूफ़ान उसके देस में चला
आशियाँ मेरा उजड़ गया
बादल उसके शहर पे बरसे
सैलाब में घर मेरा बहा

http://alkasainipoems-stories.blogspot.in/2012/02/blog-post_07.html

अलका सैनी....सजा.... अलका सैनी की कहानियाँ और कविताएँ.....

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 सागर से साक्षात्कार उसकी लहरों के माध्यम से ही होता है। किनारे पर खड़े हो विस्तृत जलसिन्धु मंक लुप्त हो जाती आपकी दृष्टि, कुछ कुछ कल्पनालोक में विचरने जैसा भाव उत्पन्न करती है, पर इस प्रक्रिया में आप सागर में खो जाते है। पानी की लहराती कृशकाय सिहरन आपके पैरों को नम कर जाती है,
http://praveenpandeypp.blogspot.in/2012/02/blog-post_15.html

प्रवीण पाण्डेय…. लहरों से खेलना….. न दैन्यं न पलायनम्….

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 साहब बन कर
यूं ही
अपनी शान
दिखाने की
पर
न जाने क्यों
मुझे हो रहा था
गर्व
खुद के
"सड़क छाप"...... ही क्यों.....
होने पर ।

http://jomeramankahe.blogspot.in/2012/02/blog-post_22.html


यशवंत माथुर…. सभ्यता या ......? मेरा मन कहे…. 

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 कभी हाथ जोड़े मुझसे मेरा हाल तो पूछते
अपने स्वार्थ , अपनी मंशा के दरवाज़े बन्द कर
मुझे कोलाहल से मुक्त तो करते
एक बार मेरी जगह पर आकर
मेरा दर्द समझते
परिवार सिर्फ तुम्हारा नहीं
मेरा भी है .... "
........... फिर क्यूँ
कब तक ......... आखिर कब तक !
कब तक ......... आखिर कब तक......................... ?
एक ऐसा सवाल जो दिल और दिमाग को झंझकोर रहा है.... !!
कब तक ......... आखिर कब तक......................... ?
http://lifeteacheseverything.blogspot.in/2012/02/blog-post_25.html

रश्मि प्रभा…. क्यूँ करूँ…. मेरी भावनायें

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मुझे इन्तजार है और रहेगा "पुस्तक-मेला" का आँखों देखा हाल जानने का ,तो मुझे दीजिये इजाजत और आप सोचिये शुरुआत कहाँ से करनी है.... |
विभा रानी श्रीवास्तव 
comments

19 comments:

  1. बहुत ही अच्छे लिनक्स..... सुंदर हलचल

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  2. अच्छी और कई लिंक्स |पुस्तक मेले काऔर पुस्तक विमोचन का आखों देखा हाल जानने की उत्सुकता है |आज पढने के लिए पर्याप्त लिंक्स हैं |
    आशा

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  3. विभा जी, बडे जतन से आपने हलचल के लिए लिंक जुटाए हैं। बधाई स्‍वीकारें।

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    ..की-बोर्ड वाली औरतें।

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  4. अच्छे लिंक्स मिले....
    सादर आभार.

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  5. शुद्ध, सुगढ़ साहित्यिक हलचल...

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  6. vibha ji ... behatreen charchaa ... nirantartaa banaaye rakhen ...

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  7. विभा जी,...अच्छी हलचल प्रस्तुति करने के लिए बधाई,....
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए बहुत२ आभार,....

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  8. सुन्दर प्रस्तुति!
    May there be more such reasons and days of celebration:)

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  9. बहुत ही अच्छे लिनक्स..... सुंदर हलचल

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  10. सार्थक और सुन्दर हलचल .....मेरी पोस्ट को इसमें शामिल करने के लिए आभार

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  11. बहुत ही अच्छे लिंक्स दिये हैं आंटी!


    सादर

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  12. सुंदर लिंक्स का चयन ... सार्थक हलचल ...

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  13. लिंक्स देने के लिए आभार आपका.

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  14. बहुत अच्छी हलचल...
    बधाई..

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  15. बहुत ही बढिया लिंक्‍स संयोजन ..जिनके साथ मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार ।

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दिये गए लिंक्स पर आपके विचारों का स्वागत है। कृपया अपने सुझाव भी दें जिससे इस हलचल के प्रस्तुतीकरण/स्वरूप को सुधारा जा सके।
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ब्लॉग्स्पॉट मे चल रही कुछ तकनीकी गड़बड़ी से कुछ कमेंट्स स्पैम मे जा रहे हैं जिन्हें तत्काल प्रकाशित करने का प्रयास रहता है फिर भी यदि आपका कमेन्ट यहाँ तत्काल न दिखाई दे तो निश्चिंत रहें आपका कमेन्ट प्रकाशित ज़रूर होगा।
आशा है सहयोग बनाए रखेंगे।