सुप्रभात मित्रों,
आज न कोई कहानी न कोई कविता। लेकिन चर्चा है उन चिट्ठों की जो सचमुच ब्लॉग जगत की शान रहे हैं। पिछले कई सालों से सम्भाल रखा था जिन्हे मैने, आज आप सबके सामने ले आई हूँ। आप सब भी आनन्द ले कुछ नये कुछ पुराने चिट्ठों का...भारतीय़ अध्यात्मिकता की नयी शुरुवात - गोवर्धन कथा ये हैं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। ये हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखते हैं - उन्मुक्त, छुट-पुट,और लेखये हैं मसिजीवी कहते हैं... ठेठ हिंदीवाला पढ़ने पढ़ाने लिखने और सोचने के अलावा कुछ सोचता तक नहीं रवीश जी के शब्दों में... भारत के संविधान के तहत। कस्बा ने कई रिश्तेदारियां दी हैं। कमेंटबाज़ मेरे घर के सदस्य लगते हैं। ब्लॉग हम सब का एक मेंटल ब्लॉक है जिसके प्रखंड विकास पदाधिकारी भी हमी हैं।
अकस्मात , स्वछन्द एवम उन्मुक्त विचारों को मूर्त रूप देना तथा उन्हे सही दिशा व गति प्रदान करना - अपनी भाषा हिन्दी में ।
व्हाटेवर डे. अज़दक में ... सुखी कैसे हों की तकलीफ़देह पड़ताल में जुटे प्रमोद सिंह की नोटबुक घुघूतीबासूती-- इन्हे कौन नही जानता? वर्तमान में भारत के अहमादाबाद (कर्णावती) शहर से मीडिया कम्पनी चला रहा हूँ, हिन्दी के प्रति मोह राष्ट्रवादी विचारधारा की छाया में पनपा. मुझे जिस काम में सबसे ज्यादा आनन्द मिलता है वे है अभिकल्पना और वेब-अनुप्रयोगों का हिन्दीकरण. मैं रेखाचित्र भी बना लेता हूँ और थोड़ा-बहुत लिखने-पढ़ने में भी रूची है. तरकश.कॉम ऐसा उत्पाद है, जिससे भावनाएं जुड़ी हुई है. शेष परिचय पन्ने पर... शब्द की तलाश दरअसल अपनी जड़ों की तलाश जैसी ही है।शब्द की व्युत्पत्ति को लेकर भाषा विज्ञानियों का नज़रिया अलग-अलग होता है। मैं न भाषा विज्ञानी हूं और न ही इस विषय का आधिकारिक विद्वान। जिज्ञासावश स्वातःसुखाय जो कुछ खोज रहा हूं, पढ़ रहा हूं, समझ रहा हूं ...उसे आसान भाषा में छोटे-छोटे आलेखों में आप सबसे साझा करने की कोशिश है। उड़न तश्तरी... जबलपुर से कनाडा तक...सरर्रर्रर्र जिन्दगी मे काफी उतार चढाव देखे……अपनों को बदलते देखा, गैरों को हाथ बढाते देखा…शायद यही दुनिया है. इन्ही के शब्दों में...“ये गंजो को पहले कंघा, फिर आईना और फिर बाल उगाने वाला तेल भी बेच सकता है.” कानपुर की पैदाइश, इलाहाबाद और दिल्ली में शिक्षा के नाम पर टाइमपास करने के बाद कई बरसों से मुम्बई में - फ़िल्म और टैलिवीज़न के बीच; ख़ुदमुख़्तारी और मजूरी के बीच; रोज़गार, सरोकार और बेकार की चिन्ताओं के बीच। कभी-कभी धमकाना भी जरुरी होता है .... :) यूं तो हम है इलाहाबादी ,रहने वाले दिल्लीके पर आजकल ईटानगर मे बसे है । ब्लॉगिंग के जरिये अपने जीवन के अनुभवआप सबसे बांटने की कोशिश रहे है। मध्यप्रदेश के दमोह शहर में पैदा हुआ । और म0प्र0 के कई शहरों में पला बढ़ा । बचपन से ही संगीत, साहित्य और रेडियो में गहरी दिलचस्पी रही । सन 1996 से मुंबई स्िथत देश के प्रतिष्ठित रेडियो चैनल विविध भारती (vividh bharati) में एनाउंसर । नए पुराने तमाम अच्छे गीतों में गहरी रूचि । दुनिया भर की फिल्मों में रूचि । कविताएं और अखबारों में लेखन भी । आज के इन्ही चिट्ठों के साथ सुनीता शानू को विदा दीजिये फ़िर मिलेंगे।
नमस्कार
सुप्रभात मित्रों,
आज न कोई कहानी न कोई कविता। लेकिन चर्चा है उन चिट्ठों की जो सचमुच ब्लॉग जगत की शान रहे हैं। पिछले कई सालों से सम्भाल रखा था जिन्हे मैने, आज आप सबके सामने ले आई हूँ। आप सब भी आनन्द ले कुछ नये कुछ पुराने चिट्ठों का...
आज न कोई कहानी न कोई कविता। लेकिन चर्चा है उन चिट्ठों की जो सचमुच ब्लॉग जगत की शान रहे हैं। पिछले कई सालों से सम्भाल रखा था जिन्हे मैने, आज आप सबके सामने ले आई हूँ। आप सब भी आनन्द ले कुछ नये कुछ पुराने चिट्ठों का...
भारतीय़ अध्यात्मिकता की नयी शुरुवात - गोवर्धन कथा ये हैं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। ये हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखते हैं - उन्मुक्त, छुट-पुट,और लेख
कानपुर की पैदाइश, इलाहाबाद और दिल्ली में शिक्षा के नाम पर टाइमपास करने के बाद कई बरसों से मुम्बई में - फ़िल्म और टैलिवीज़न के बीच; ख़ुदमुख़्तारी और मजूरी के बीच; रोज़गार, सरोकार और बेकार की चिन्ताओं के बीच।
कभी-कभी धमकाना भी जरुरी होता है .... :) यूं तो हम है इलाहाबादी ,रहने वाले दिल्लीके पर आजकल ईटानगर मे बसे है ।
ब्लॉगिंग के जरिये अपने जीवन के अनुभवआप सबसे बांटने की कोशिश रहे है।
मध्यप्रदेश के दमोह शहर में पैदा हुआ । और म0प्र0 के कई शहरों में पला बढ़ा । बचपन से ही संगीत, साहित्य और रेडियो में गहरी दिलचस्पी रही । सन 1996 से मुंबई स्िथत देश के प्रतिष्ठित रेडियो चैनल विविध भारती (vividh bharati) में एनाउंसर । नए पुराने तमाम अच्छे गीतों में गहरी रूचि । दुनिया भर की फिल्मों में रूचि । कविताएं और अखबारों में लेखन भी ।

नई - पुरानी हलचल की हलचल बहुत दूर-दूर तक है..... आभार शानू जी.... !!
ReplyDeleteआदरणीय विभा जी सचमुच हलचल बहुत दूर-दूर तक है। मुझसे ठीक भी नही हो रही कोशिश कर रही हूँ...
Deleteधन्यवाद
शानू
मैंने भी कोशिश की पर ठीक करने के चक्कर मे और गड़बड़ हो जा रहा है। ऐसे ही रहने दीजिये।
Deleteसभी शानदार लिंक्स ...
ReplyDeleteदो पोस्ट के बीच खाली स्थान अखरता है !
वाणी जी धन्यवाद। यह खाली स्थान कुछ तकनीकी परेशानी हुई है उसी से हो गया है। ठीक नही हो पा रहा। कोशिश कर रही हूँ।
Deleteअरे ब्लॉग हमारा अपना...काहे परेशान होना...खाली जगह से ताज़ा हवा का झोंका आता महसूस कीजीये..बाकी हर जगह तो भीड़ है आजकल..
Delete:-)
बहुत बेहतरीन....
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।
यही तो है वास्तविक परिचय...
ReplyDeleteबहुत मस्त हलचल आज की।
ReplyDeleteसादर
बहुत सार्थक चिट्ठों से परिचय कराया ... अच्छी हलचल
ReplyDeleteबहुत अच्छी प्रस्तुति..बेहतरीन
ReplyDeleteMY NEW POST ...सम्बोधन...
आज की हलचल कुछ अलग सी थी....
ReplyDeleteशुक्रिया सुनीता जी..
बहुत सुखद अहसास होता है यहाँ आ कर|यह प्रयोग भी अभिनव है|
ReplyDeleteआशा
बहुत सुन्दर हलचल
ReplyDeleteपुराने साथियों का जिक्र देखकर अच्छा लगा....आभार याद करते रहने के लिए...
ReplyDeleteसुन्दर हलचल.
ReplyDeleteफिर कब मिलेंगीं?शानू जी.
मुझे न भुला दीजियेगा.
'मेरी बात..'पर आपका इन्तजार है.
इस सम्मान के लिये आभार।
ReplyDeleteबहुत ही अच्छी हलचल और लिंक्स संयोजन ...आभार ।
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