दोस्तों! कल वसन्त पंचमी का दिन था, बहुत ही खूबसूरत दिन। चारों तरफ़ हर्ष और उल्लास से मनाया गया यह उत्सव याद दिला देता है रंगों की। माँ ने कहा आज के दिन देवता गुलाल से खेलते हैं। सुनकर बहुत अच्छा लगा। यह उनका कहना है, लेकिन यह सच नही तो क्या है कि चारों दिशाओं में रंग-बिरंगे फूल खिले हैं। प्रकृति की यह अनुपम सुंदरता इश्वर का खेल नही तो और क्या है?
आज सुबह-सुबह ठण्डी हवा के झोंके मुझे छूकर यह अहसास दिला रहे हैं कि हम अब जाने वाले हैं। लेकिन हाँ आयेंगे दोबारा।
तो दोस्तों आज एक बार हम फिर मिल बैठेंगे…आप मै और… चाय…J
तो दोस्तों आज एक बार हम फिर मिल बैठेंगे…आप मै और… चाय…J
आज तो चाय के साथ-साथ थोड़ा स्वाद का सफ़र भी कर ही लिया जाये… लेकिन दुविधा में हूँ कि स्वाद का सफ़र दो ब्लॉग हैं दोनो की एक सी रेसिपी अब जाऊँ कहाँ खुद ही फ़ैसला कीजिये…
हलचल करना सचमुच बहुत ही अच्छा लगता है किन्तु ब्लॉग यात्रा करते-करते कई बार अच्छे तो कई बार ऎसे लोग दिखाई दे जाते हैं जो सारा मज़ा किरकिरा कर देते हैं जैसे दाल में कंकड़ L का करिये जी का करिये एसैन चोर का?अब यह पोस्ट ही पढ़िये...कितना सुंदर नज़ारा जब कोई चोर कवि आपकी ही कविता को ताल ठोक कर मंच पर सुनाता है और आप उसे मुस्कुराते हुए गुलदस्ता दे आते हैं J
दोस्तों एक प्रश्न और है मन में देखों हँसना नही कुछ लोग कहते हैं देखो वसंत आया कुछ कहते हैं लो बसंत आई थोड़ा कनफ़्यूजन है भई वसंत आया या आई ? J
आप कहेंगे शानू जी आपको तो बाल की खाल निकालने की आदत है। अरे नही ऎसा कुछ नही है… अपुन का तो पेशा ही ऎसा है। बस जरा आदत है मुस्कुराने की थोड़ा गुनगुनाने की। अब आप ही बताईये ये दिल किसके बस में है ? J
शास्त्री जी अगर पावर हाऊस फ़ूँक गया तब भी कर सकते हैं चर्चा तो क्यों न हम भी करें मोमबत्ती जला कर चर्चा। हाँ दोस्तों लाईट नही है आज L मगर क्या करें जो हलचल न मचाईबे तो का करिबे?
कोई करता है बातें खुद से तो कोई चला जा रहा है जिंदगी के खामोश सफ़र में… तो कहीं स्पंदन है अंतर्मंथन में। चलिये रहने दीजिये मेरी लेखनी नही बनाना चाहती कोई बतगंड़।
मेरी अनुभूतियाँ जब दिल की कलम से उतर आती है कागज़ पर तो हो जाती है खुद्-ब-खुद हलचल जी हाँ वही …नई पुरानी हलचल…
अब इजाजत दीजिये मुझे यानि की सुनीता शानू को फिर हाजिर होंगे आज ही के दिन अगले रविवार कुछ खट्टी कुछ मीठी नई पुरानी हलचल के साथ J
नमस्कार

अच्छी लिंक्स और प्रस्तुति शानू जी
ReplyDeleteआशा
धन्यवाद आशा जी।
Deleteवाह ... अच्छी प्रस्तुति शानू जी॥ अब एक एक लिंक पर सैर की जाय
ReplyDeleteशुक्रिया पद्म सिहं जी।
Deleteबहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
धन्यवाद शान्ति जी
Deleteसुप्रभात शानू जी !
ReplyDeleteबहुत अच्छे लिनक्स , लेकिन उसकी प्रस्तुति , उससे भी अच्छी.... :):)
धन्यवाद विभाजी अपना स्नेह बनाये रखियेगा।
DeleteDear! Basant and Basanti both are coming. Welcome them.
ReplyDeleteजी हाँ आप ठीक कह रहे हैं।
Deleteअत्यन्त रोचक सूत्र..
ReplyDeleteधन्यवाद प्रवीण जी।
Deleteआदरणीया सुनीता जी
ReplyDeleteबहुत अच्छी और मज़ेदार रही आज की हलचल।
बसंत आया या आयी क्या फर्क पड़ता है...ज़्यादा सोचने से अच्छा बसंत ऋतु के खुशनुमा मौसम का आनंद उठाना है।
सादर
बहुत फ़र्क पड़ता है यशवंत आया और आई में तो बहुत बड़ा बवाल है...हहहह वैसे आपको भे वसन्तोत्सव की अनेक बधाईयाँ...
Deleteसुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार ।
ReplyDeleteधन्यवाद डॉ साहेब...:)
DeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteजबरदस्त |
ReplyDeleteचर्चा मंच की चर्चा कर
जबरदस्त हलचल
मचा दी आपने ||
बहुत बहुत आभार --
धन्यवाद रविकर जी। आपको चर्चा पसंद आई बहुत-बहुत धन्यवाद।
Deleteसुनीता जी, धन्यवाद आपका जो आपने मेरी पोस्ट का लिंक यहाँ दिया|
ReplyDeleteपर आपने मेरी पोस्ट का लिंक देते हुए लिखा है "हलचल करना सचमुच बहुत ही अच्छा लगता है किन्तु ब्लॉग यात्रा करते-करते कई बार ऎसे लोग दिखाई दे जाते हैं जो सारा मज़ा किरकिरा कर देते हैं जैसे दाल में कंकड़ का करिये जी का करिये एसैन चोर का?" इसको पढ़ कर ऐसा लग रहा है जैसे मेरी पोस्ट पढ़ कर आपका मजा किरकिरा हो गया|
कृपया विस्तार से बताएं कि आपको क्या बात पसंद नहीं आई, जिससे उसको दोहराने से बचा जा सके|
उत्तर की प्रतीक्षा में, योगेन्द्र पाल
Sunder links.... Bahut Badhiya Halchal...
ReplyDeleteशुक्रिया मोनिका जी।
Deleteयोगेंद्र जी,
ReplyDeleteआपके ब्लॉग का सिर्फ़ लिंक दिया गया है क्योंकि आपने ब्लॉग यात्रा पोस्ट लिखी है मेरा आशय है कई बार हलचल के लिये ब्लॉग खोजते-खोजते ऎसे ब्लॉग पकड़ में आ जाते हैं जो सारा मजा किरकिरा कर देते हैं। कृपया अन्यथा न लें। नीचे अलबेला जी के ब्लॉग का जिक्र किया गया है चोर वह है जिसने उनकी कविता को मंच पर अपना कह कर सुना डाला।
सादर
सुनीता शानू
जबरदस्त हलचल....हमेशा की तरह ...
ReplyDeleteधन्यवाद अनुपमा जी।
Deleteमोमबत्ती जला कर हलकी रोशनी में ज़बरदस्त हलचल .. अब मतलब दूसरा न लगा लेना :):)
ReplyDeleteआज कल चाय से कुछ फुरसत तो मिली होगी ?
नही आप जो कह रही हैं मतलब मै वही निकाल रही हूँ। चाय पीने पिलाने से फ़ुर्सत तो कभी मिल ही न पाये यही आशीर्वाद दीजिये...आपसे मिले बहुत दिन हो गये शायद बुक-फ़ेयर में मुलाकात हो पाये...:)
Deletedil mere bas mein to nahee hai
ReplyDeletekyaa karoon nayee puraanee halchal par aanaa hee padtaa hai
chaay kaa swaad bhee muft mein mil jaataa hai
क्या बात है डॉ साहब दिल होता ही ऎसा है किसी और के बस में पहले हो जाता है खुद के नही...:) हहहह
Deleteसुनीता जी और यशवंत जी आप दोनों का बहुत बहुत आभार ... इतने सुन्दर लिंकों के बीच योगेन्द्र जी ब्लॉग यात्रा को शामिल करने के लिए | योगेन्द्र जी , मेरी और पूरी ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से हार्दिक धन्यवाद !
ReplyDeleteशुक्रिया शिवम जी।
DeleteKahan hai aap,shaanu ji?
ReplyDeletemere laptop aur net men samsya hai.
doosre laptop par hindi type nahi kar paa raha hun.
halchal to hoti hai aapki hamesha hi mast ji
par aapke junthhe vaade se main ho raha hun past ji.
basant panchami ki haardik shubhkamanayen.
मोको कहाँ ढूँढे रे बन्दे मै तो तेरे पास में... राकेश भाई प्रभु की आपपर असीम कृपा है इसीलिये जब-तब नाराज़ होने की धमकी दे देते हैं। अबके मै नाराज़ हूँ कि आप कन्जूस बहुत हैं मुझसे नम्बर गुम गया तो आप फ़ोन तक नही करते की आपकी बहन बेचारी मोमबत्ती जला कर कैसे हलचल कर पा रही है...:(
Deleteसच विषम परिस्थिति में जिस तरह से आप लोग इतना सब कर लेते हैं यह आपकी समर्पित भावना ही है.. हम तो भागम भाग भरी जिंदगी में बमुश्किल अपना एक छोटा सा ब्लॉग भी चलाना मुश्किल जान पड़ता है...
ReplyDeleteसुन्दर हलचल प्रस्तुति हेतु आभार
हहह कविता जी हमारे साथ भी यही है अपना ब्लॉग पोस्ट को तरस रहा है रोज गाना गा रहा है सूना सूना लागे...:) और हम करते हैं चर्चा सबकी... दर असल इसमे मज़ा ही कुछ और है आप भी करके देखिये तो जरा...:)
Deleteधन्यवाद।
अच्छी हलचल है
ReplyDeleteशुक्रिया मंहेन्द्र जी।
Deletesundar post hae|
ReplyDeleteशुक्रिया संगीता जी।
Deleteबहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
ReplyDeleteबसंत पचंमी की शुभकामनाएँ।
शुक्रिया शान्ति जी।
Deleteआज की हलचल पढ़ने में देर हुई...क्या करूँ सुनीता जी...चाय की चुस्कियां लेते वक्त जाने कैसे खिसक गया :-)
ReplyDeleteबहुत अच्छी हलचल...शुक्रिया.
सस्नेह
विद्या जी समय निकाल कर आप आई तो सही। बहुत-बहुत धन्यवाद।
Deleteक्या बात है ...बढ़िया हलचल मचाई है सुनीता जी !
ReplyDeleteबहोत अच्छे ।
ReplyDeleteनया ब्लॉग
http://hindidunia.wordpress.com/
शुक्रिया कैलेश जी
Deleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ReplyDeleteनमस्कार शास्त्री जी आपके आशीर्वाद रूपी कमैंट के बगैर तो यह चर्चा अधूरी ही थी। धन्यवाद।
Deleteप्रस्तुति चयन ,संयोजन सभी खूबसूरत .
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