नमस्कार!
सोमवार की हलचल मे आप सभी का स्वागत है !
प्रस्तुत हैं लिंक्स के साथ एक कविता और एक क्षणिका -----
(1)
मैं कवि हूँ
दिल से कवि हूँबना देता हूँ कभी रेत के महल
कभी वनवास मे चला जाता हूँ
द्वापर या कलयुग बन जाता हूँ
मैं गरीब कि भूख हूँ
कभी मेरे गीतों में तुम ढूंढते हो
दर्द और एहसास को
बाज़ार की प्रवृति को
नयी भोर...! की नयी लहर को
कुछ मुक्तक को
प्रीत की रीत को
और कभी
तलाशते हो मेरे शब्द चित्रों मे
आज़ाद भारत के गलियारे में शिक्षा की बुनियादी हकीकत को मैं कवि हूँ
दिल से कवि हूँ
तुम मानो या न मानो
मुझ को पढ़ने तुम्हारा आना !!!और फिर मुस्कुराना
लगता है जैसे कुछ कहने की
इजाजत नहीं है मैं कवि हूँ
दिलाता हूँ यादसर्द मौसम मे कैसा लगता है
सूजी का हलुवा
जिसका स्वाद बना रहता है
जुबां पर कई दिनों तक
मैं कवि हूँ
सच में
एक छोटा सा कवि हूँ :)
(2)
माँ को नमन हम करते रहें
चर्चा का सार्थक स्वरूप देखने को मिला। बधाई।
ReplyDeleteअच्छी चर्चा.....
ReplyDeleteमैं एक कवी हूँ मुझको पढने तुम्हारा आना फिर मुस्कुराना अच्छा लगता है '
ReplyDeleteबहुत अच्छी प्रस्तुति नई पुरानी हलचल की |
आशा
सुप्रभात यशवंत जी...
ReplyDelete"मेरे गीतों में" हलचल पैदा करने का शुक्रिया...
बाकी हलचल अब पढ़ती हूँ :-)
kya baat hai yashwant ji .. waah waah , aapki kala aur kavita dono kee tareef karna padenga .. maine pahle kavita ko padh , phir dekha ki posts ka link bhi hai .. maza aa gaya sir.
ReplyDeletejaldi hi aapki sewa me phir aaunga
aapka
vijay
काव्यात्मक अंदाज, चर्चा का..
ReplyDeleteहलचल प्रस्तुत करने का आपका काव्यमय अंदाज़ आजकल बहुत अच्छा लगता है ! मेरे मुक्तकों को इसमें स्थान देने के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया !
Deleteसुन्दर संयोजन..
ReplyDeletekalamdaan.blogspot.com
सुन्दर काव्यात्मक हलचल!
ReplyDeleteकवि ह्रदय की जबरदस्त हलचल ...!!
ReplyDeleteबहुत बढ़िया ...बधाई यशवंत जी ...इस प्रयास के लिए .....!!
अच्छी हलचल...
ReplyDeleteसादर आभार...
वाह ! ये बदली बदली सी हलचल बड़ी
ReplyDeleteअच्छी लगी ! मेरी रचना को स्थान
देने के लिए बहुत शुक्रिया!
Sunita Kumari जी की मेल पर प्राप्त टिप्पणी--
ReplyDeleteशिक्षा भोजन-पानी और हवा के बाद एक जरुरी चीज है.इसका सभी तक बराबर पहुंचना उससे भी अति आवश्यक है.हम जिस क्षेत्र से आते हैं वहाँ पर यह सब एक भांप के अतिरिक्त कुछ नही है.उन्हें ठीक-ठीक यह भी नही ज्ञानत कि क्या-क्या योजनाएं उनके लिए मुहैया कराई गयी है ऐसे में इन सबका व्यापक फलक पर प्रचार-प्रसार किया जाना समय की मांग है.जिसे हल्के में नही लिया जा सकता है.उम्मीद है हलचल के मंच से यह अपना विस्तार रूप लेगा.
सादर...!
मान गए कि आप सच में कवी हैं ...ऐसा सृजन करना आसान नहीं है .. बहुत बढ़िया लगी हलचल ..
ReplyDeleteबहुत बढ़िया कड़ियों का समायोजन । मेरी रचना को स्थान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।
ReplyDeleteaap ke kavi hone me koi shak nahi hai....halchal bahut hi umda hai tarif ke kabil hai....bdhaai...
ReplyDeleteमैं कवि हूँ
ReplyDeleteदिल से कवि हूँ
तुम मानो या न मानो
मुझ को पढ़ने तुम्हारा आना !!!
और फिर मुस्कुराना
लगता है जैसे कुछ कहने की
इजाजत नहीं है
बेहतरीन प्रस्तुति ।
सभी हलचल शानदार..शुक्रिया कवि महोदय का.
ReplyDelete:-)
आज के दिन के लिए काफी कुछ मिल गया.जाते हैं.
ReplyDeleteमैं कवि हूँ
Deleteदिल से कवि हूँ
तुम मानो या न मानो.waah......mai to man gai .
एक लाजवाब हलचल बेहतरीन कविता के साथ
ReplyDeleteनया और बेहतरीन अंदाज़ ।
ReplyDeleteशुक्रिय| , आपने मुझे नई-पुराणी हलचल में स्थान दिया|आज के शेष लिनक्स शानदार हैं |साथ ही समस्त ब्लोगर्स को गणतंत्र की हार्दिक बधाई|
ReplyDeletesundar kavyamayee halchal prastuti..
ReplyDeleteकाव्य में ढली बहुत ही सरस और मनभावन हलचल । सभी links को यूँ काव्य में पिरोना आसान नहीं! आपकी प्रतिभा का प्रमाण है ये "हलचल" । मेरी "प्रीत" को इसमें पिरोने के लिये आभार।
ReplyDeleteआप कवि हैं इसमें कोई शक है क्या... बहुत सुहानी हलचल ! आभार!
ReplyDeleteYSHVANT JEE,
ReplyDeleteकाव्य मय लिंकों का प्रस्तुतीकरण बहुत अच्छा लगा,...बधाई...
new post...वाह रे मंहगाई...
sundar kavmay prastuti...
ReplyDeleteयशवंत ,तुम कितना श्रम करते हो ,
ReplyDeleteऔर हम लोगों को बिना श्रम किये ,
इतने अच्छे लिंक्स एक साथ मिल जाते ,
हैं पढने को, तुम और तुम्हारी टीम ,
बधाई के पात्र हैं |
बधाई आपको ...
ReplyDeleteअच्छा लगा यहाँ आना ... आभार ..
बहूत हि बेहतरीन कमाल के लिंक्स है
ReplyDeleteबहूत हि अच्छी तरह से इसे बनाया है
बेहतरीन हलचल
बहुत खूब अचछी रचना ..
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