नमस्कार ... आप सभी का स्वागत है बुधवार की हलचल में सदा की तरफ से ... जहां चर्चा हैज़िन्दगी का बीज़ से फूल तक .. जिससे हम कभी सवाल करते हैं तो कभी ढूंढते हैं जवाब लेकिन .. ज़िन्दगी की गाड़ी चलाने का लुत्फ़ तभी आ सकता है, जब आपकी जिंदगी रुपी गाड़ी में 'विवेक' रुपी वाइपर लगा हो ..कितने सहज़ शब्दों में जीवन को अर्थ दे रहे हैं ये शब्द किस विधि हम मन को मनाते हैं, एक बाई स्कोप में मानो तस्वीर घूम रही हो, हर सांस बस एक सवाल पूछती है .. जिन्दगी तू ऐसे जिन्दा क्यों है... पहेली सी कभी हो जाती है जिन्दगी ... तो कभी एकदम ले आती है सबको एकदम करीब ...
ठहरे हुए वक्त ... .. सरगोशी तो यही रही कि वक़्त ठहरता नहीं पर जाने कितने वक़्त ठहरे हुए हैं ...
जब आपकी जिंदगी रुपी गाड़ी में 'विवेक' रुपी वाइपर लगा हो .. " वाइपर और ज़िन्दगी ...." ..
वो आँखें .. कितनी खुशी थीं ...
कब होगी तरक्की ? कब बनुंगा .. अधिकारी ?
उम्मीद .. इस बार, चेहरे नहीं, शब्द विजित होंगे !!
किस विधि हम मन को मनाते हैं ... कुछ भूले बिसरे पन्ने: २
स्मृतियाँ .... .. एक बाई स्कोप में मानो तस्वीर घूम रही हो ...
कोई नहीं समझ सकता .... बंद दरवाजों का सच
ज़िन्दगी तू ऐसे ज़िंदा क्यों है ? .. हर साँस बस एक सवाल पूछती है ....
बदली दर्द की बरस कर पलकों पर रह गई .. बात दिल की फ़िर होंठों तक आ कर रह गई
खिड़कियां ... मैं कभी इनसे बोर नहीं होता ...
दो पल का ही सही ..वो एक ख्वाब था
क्या यही प्रेम है प्रभु ......? क्या इसी भाव से उपजती है कविता ....?
प्यार और नफ़रत .. तब भी यह मेरा ह्रदय है
किसी भी कला के लिए ये ज़रूरी हैं .. ताल और रस
बीज़ से फूल तक .. अपना सौंदर्य और सुरभि सौंप बच जायेगा ...
राधे तूने मुरली .. क्यूँ है चुराई
आप लगायें पता जब तक मुरली की चोरी का यहां .... और मुझे दीजिए इज़ाजत अगली हलचल तक ...
लेकिन चलने से पहले यह गाना ...आपके लिए
आप लगायें पता जब तक मुरली की चोरी का यहां .... और मुझे दीजिए इज़ाजत अगली हलचल तक ...
लेकिन चलने से पहले यह गाना ...आपके लिए
आप सभी को शुभ दिन के साथ शुभ कामनाऍं ....
सदा जी ज़िन्दगी की बातें बताती आज की हलचल ....मन में हलचल मचा रही है ....!!बहुत खुशकिस्मत हूँ मैं आपने मुझे इस काबिल समझा कि हलचल के इस मंच पर मैं प्रेम ...और लय दोनों कि बात कर पा रही हूँ ... आभार ...आभार ......!!बहुत बढ़िया लिंक्स लिए हैं ....!!
ReplyDeleteshaandaar-jaandaar charchaa ...
ReplyDeleteइन जिंदादिल बातों को हम तक पहुंचाने का शुक्रिया।
ReplyDeleteहलचल में स्वयं को पाकर मन पुलकित हुआ और अन्य पोस्टों को पढ़ मन और भी ऊर्जित हुआ |
ReplyDeleteआभार |
व्यस्तता के कारण अभी लिंक नहीं देख पा रहा हूँ। ..आभार।
ReplyDeleteनिःसंदेह अपने लिंक को आपके संयोजन में
ReplyDeleteदेख कर अच्छा लगता है..
सदा जी ..विभिन्न लिनक्स पर पहुँचने का पूरा प्रयास रहेगा..
kalamdaa..blogspot.com
बेहतरीन हलचल ..सारे लिंक्स अच्छे लगे ..आभार
ReplyDeleteजिंदगी की पहेली के हल तलाशती हुई आज की हलचल में अच्छे लिंक्स मिले, मुझे शामिल करने हेतु आभार!
ReplyDeleteबहुत सुन्दर हलचल | बहुत सारे उम्दा लिंक्स का संयोजन |
ReplyDeleteकहने का अंदाज भी ज़िन्दगी है ...चलूँ लिंक्स पर
ReplyDeleteबढिया हलचल।
ReplyDeleteआदरणीया सदा जी
ReplyDeleteलगभग सभी लिंक्स देख लिए।
बहुत ही अच्छी हलचल है आज की।
सादर
बहुत सुंदर लिंक्स
ReplyDeleteसुप्रभात....
ReplyDeleteसभी हलचल सुन्दर..
"वाइपर और जिंदगी" बहुत अच्छी लगी...
शुक्रिया सदा जी..
:-)
सुन्दर हलचल... हमेशा की तरह!
ReplyDeleteहमेशा की तरह!बहुत सुंदर लिंक्स
ReplyDeleteसुन्दर हलचल...
ReplyDeleteबहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
पुरानी और नै हलचल ज़िन्दगी के हर रंग से रु -बा रु रही .
ReplyDeleteबड़े सुन्दर ढंग स लिंक्स का संयोजन किया है.
ReplyDeleteबहुत ही बढ़िया लिंक्स के साथ सार्थक हलचल प्रस्तुति के लिए आभार!
ReplyDeleteनये प्रयोग, नये सूत्र, जीवंत संकलन..
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