Wednesday, January 18, 2012

ज़िन्दगी की बातें ...

नमस्‍कार ... आप सभी का स्‍वागत है बुधवार की हलचल में सदा की तरफ से ... जहां चर्चा हैज़िन्दगी का  बीज़ से फूल तक .. जिससे हम कभी सवाल करते हैं तो कभी ढूंढते हैं जवाब लेकिन ..  ज़िन्दगी की गाड़ी चलाने का लुत्फ़ तभी आ सकता है, जब आपकी जिंदगी रुपी गाड़ी में 'विवेक' रुपी वाइपर लगा हो ..कितने सहज़ शब्‍दों में जीवन को अर्थ दे रहे हैं ये शब्‍द किस विधि हम मन को मनाते हैं, एक बाई स्‍कोप में मानो तस्‍वीर घूम रही हो, हर सांस बस एक सवाल पूछती है .. जिन्‍दगी तू ऐसे जिन्‍दा क्‍यों है...  पहेली सी कभी हो जाती है जिन्‍दगी ... तो कभी एकदम ले आती है सबको एकदम करीब ...


ठहरे हुए वक्‍त ...  .. सरगोशी तो यही रही कि वक़्त ठहरता नहीं पर जाने कितने वक़्त ठहरे हुए हैं ...


जब आपकी जिंदगी रुपी गाड़ी में 'विवेक' रुपी वाइपर लगा हो .. " वाइपर और ज़िन्दगी ...."  ..


वो आँखें   .. कितनी खुशी थीं ...


कब होगी तरक्‍की ? कब बनुंगा .. अधिकारी ?


उम्‍मीद  .. इस बार, चेहरे नहीं, शब्द विजित होंगे !!


किस विधि हम मन को मनाते हैं ... कुछ भूले बिसरे पन्ने: २


स्मृतियाँ .... .. एक बाई स्कोप में मानो तस्वीर घूम रही हो ...


कोई नहीं समझ सकता ....   बंद दरवाजों का सच


ज़िन्दगी तू ऐसे ज़िंदा क्यों है ? .. हर साँस बस एक सवाल पूछती है ....


बदली दर्द की बरस कर पलकों पर रह गई .. बात दिल की फ़िर होंठों तक आ कर रह गई


खि‍ड़कियां  ... मैं कभी इनसे बोर नहीं होता ...


दो पल का ही सही ..वो एक ख्‍वाब था

क्या यही प्रेम है प्रभु ......?
  क्या इसी भाव से उपजती है कविता ....?


प्‍यार और नफ़रत
..  तब भी यह मेरा ह्रदय है



किसी भी कला के लिए ये ज़रूरी हैं .. ताल और रस

बीज़ से फूल तक
.. अपना सौंदर्य और सुरभि सौंप बच जायेगा ...

राधे तूने मुरली
  .. क्‍यूँ है चुराई



आप लगायें पता जब तक मुरली की चोरी का यहां .... और मुझे दीजिए इज़ाजत अगली हलचल तक ...


लेकिन चलने से पहले यह गाना ...आपके लिए 



आप सभी को शुभ दिन के साथ शुभ कामनाऍं .... 


22 comments:

  1. सदा जी ज़िन्दगी की बातें बताती आज की हलचल ....मन में हलचल मचा रही है ....!!बहुत खुशकिस्मत हूँ मैं आपने मुझे इस काबिल समझा कि हलचल के इस मंच पर मैं प्रेम ...और लय दोनों कि बात कर पा रही हूँ ... आभार ...आभार ......!!बहुत बढ़िया लिंक्स लिए हैं ....!!

    ReplyDelete
  2. इन जिंदादिल बातों को हम तक पहुंचाने का शुक्रिया।

    ReplyDelete
  3. हलचल में स्वयं को पाकर मन पुलकित हुआ और अन्य पोस्टों को पढ़ मन और भी ऊर्जित हुआ |

    आभार |

    ReplyDelete
  4. व्यस्तता के कारण अभी लिंक नहीं देख पा रहा हूँ। ..आभार।

    ReplyDelete
  5. निःसंदेह अपने लिंक को आपके संयोजन में
    देख कर अच्छा लगता है..
    सदा जी ..विभिन्न लिनक्स पर पहुँचने का पूरा प्रयास रहेगा..
    kalamdaa..blogspot.com

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन हलचल ..सारे लिंक्स अच्छे लगे ..आभार

    ReplyDelete
  7. जिंदगी की पहेली के हल तलाशती हुई आज की हलचल में अच्छे लिंक्स मिले, मुझे शामिल करने हेतु आभार!

    ReplyDelete
  8. बहुत सुन्दर हलचल | बहुत सारे उम्दा लिंक्स का संयोजन |

    ReplyDelete
  9. कहने का अंदाज भी ज़िन्दगी है ...चलूँ लिंक्स पर

    ReplyDelete
  10. आदरणीया सदा जी
    लगभग सभी लिंक्स देख लिए।

    बहुत ही अच्छी हलचल है आज की।


    सादर

    ReplyDelete
  11. सुप्रभात....
    सभी हलचल सुन्दर..
    "वाइपर और जिंदगी" बहुत अच्छी लगी...
    शुक्रिया सदा जी..
    :-)

    ReplyDelete
  12. सुन्दर हलचल... हमेशा की तरह!

    ReplyDelete
  13. हमेशा की तरह!बहुत सुंदर लिंक्स

    ReplyDelete
  14. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    ReplyDelete
  15. पुरानी और नै हलचल ज़िन्दगी के हर रंग से रु -बा रु रही .

    ReplyDelete
  16. बड़े सुन्दर ढंग स लिंक्स का संयोजन किया है.

    ReplyDelete
  17. बहुत ही बढ़िया लिंक्स के साथ सार्थक हलचल प्रस्तुति के लिए आभार!

    ReplyDelete
  18. नये प्रयोग, नये सूत्र, जीवंत संकलन..

    ReplyDelete


ब्लॉग्स्पॉट मे चल रही कुछ तकनीकी गड़बड़ी से कुछ कमेंट्स स्पैम मे जा रहे हैं जिन्हें तत्काल प्रकाशित करने का प्रयास रहता है फिर भी यदि आपका कमेन्ट यहाँ तत्काल न दिखाई दे तो निश्चिंत रहें आपका कमेन्ट प्रकाशित ज़रूर होगा।

आशा है सहयोग बनाए रखेंगे।