Monday, October 31, 2011

नयी पुरानी हलचल मे आज


नमस्कार! सोमवार की इस हलचल मे आप सभी का स्वागत है इन लिंक्स के साथ-
  1. मौत का कुआं से फार्मूला ट्रैक तक का सफर
  2. दिले नादां भी कुछ कह रहा है
  3. तितली को लुभाती है कठपुतली
  4. वाह रे रथ यात्री !!...तेरा जवाब नहीं
  5. अच्छी लगती है नन्ही मुस्कुराहट
  6. हर घर मे बसर करना है अब
  7. हर जगह बस तुम हो
  8. सीप और बूंदें ....कहती हैं कुछ
  9. Some Thoughts about Her Smile
  10. प्रेम और LOVE की बात
  11. वेदना मे होती है शक्ति सृजन की 
  12. नर हो न निराश करो मन को
  13. अपनी बेटी नाम करेगी,कुछ ऐसा काम करेगी  
  14. कुछ दोहे-सोरठे 
और अब सुनिए यह गाना --



इसी के साथ अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक।


Sunday, October 30, 2011

आज की हलचल,नही मिलावटी मिठाई, बस जरा सी डिमाण्ड और सप्लाई

पिलानी की गऊशला(गौशाला)






सुप्रभात!

आज की सुहानी सुबह मै सुनीता शानू आप सबका स्वागत करती हूँ। आज की हलचल चुन-चुन कर कुछ खूबसूरत फूलो से सजा एक बेशकीमती तोहफ़ा है आपके लिये।

रूपम की लिखी रचना श्याम से कहो पैसा कमाये...भावनात्मक रूप से बहुत ही खूबसूरत है तथा  वर्तमान के दृश्य को पूरी तरह से प्रस्तुत कर रही है। पैसा कमाने के चक्कर में राधा-मोहन का प्रेम सचमुच गायब हो गया है। आप भी अवश्य पढ़े और  अपने आशीर्वचनों से रचनाकार का उत्साह वर्धन करें।


लंदन मे रह रहीं पल्लवी जी आधुनिकता और नारी के विषय में एक सार्थक पोस्ट लिखने में सफ़ल हुई हैं। मेरा भी यही मानना है कि समय की बचत करते हुए जिस प्रकार इंसान घर को आधुनिक उपकरणों से सँवारता है उसी प्रकार आज नारी भी समय और स्थान को देख कर खुद को बदल रही है। पुरूष की अपेक्षा नारी में अधिक बदलाव अपेक्षित हैं। पुरूष के वस्त्र साधारण तथा कार्य करने में सहायक होते हैं। नारी के वस्त्र अगर सलवार सूट को छोड़ दिया जाये तो साड़ी कार्य करने की क्षमता में रुकावट उत्पन्न करती हैं। क्षमा करें...तमाम परेशानियों के बावजूद मुझे साड़ी ही अधिक पसंद हैं।J आप भी पढ़े और पल्लवी जी के इस विचार में अपने विचारों का मेल करें।



एक अरसे से एक कवि को निरन्तर पढ़ रही हूँ और कोशिश कर रही हूँ कि कविताओं के माध्यम से उनकी सोच तक पहुँच पाऊं। यह हैं राजेंद्र तेला पेशे से दंत-चिकित्सक हैं मगर जबसे कागज़ कलम हाथ में पकड़ी है मुझे लगता है कहीं खो गये हैं। मैने उनमें एक संवेदन शील कवि को तलाश किया है। लिखते-लिखते अपनी रचनाओं मे खो जाने वाले तेला जी बहुत ही खुशमिज़ाज़ हैं किसी से कह रहे हैं जरा फ़िर से मुस्कुरा दो... J



कभी सुना तो होगा जागती आँखों से स्वप्न देखना, लेकिन क्या कभी आपने भी देखें हैं स्वप्न जागती आँखों से। मैने तलाश किया है एक ऎसे इंसान को जो देखते हैं स्वप्न जागती आँखों से और किया है उन स्वप्नों को डायरी में कैद। आइये करते हैं चर्चा उनके कुछ स्वप्नों की शायद उन्हे भी अच्छा लगेगा... J




मन के किसी कोने से कब अंकुर बन फ़ूटती है, विश्वास और आशाओं के पानी से सींच मन की अनुभूतियाँ कब फ़लित हो वृक्ष का आकार ले लेती हैं। मैने तुझको देखा है .....कोई नही जानता ऎसे ही मन के -मनके पिरोती डॉ उर्मिला जी की यह रचना पढ़िये और कहिये उन्हे वाह-वाह... J



अरविंद त्रिपाठी जी पेशे से पत्रकार हैं साथ ही बहुत अच्छे व्यंग्य कार भी हैं लेकिन लगता है उनकी मेमोरी आजकल गजनी से इफ़ेक्ट हो गई है। मै नही कह रही भई आप खुद ही पढ लीजिये कितने कनफ़्यूज हो रहे अन्ना आंदोलन को लेकर...




अब देखिये इनके कार्य जाने क्या-क्या कहाँ-कहाँ से बटोरते हैं, इनकी कलम हमेशा ही लिखती है कुछ नया और दिमाग में है हर पल हलचल... नई पुरानी हलचल J जीहाँ ये हैं छत्तीसगढ़ के लिक्खाड़ नही नही कुख्यात रचनाकार संजीव तिवारी जी अब कुख्यात न कहें तो और क्या कहें आजकल जुटे है छत्तीसगढ़ की  कला,संस्कृति तथा साहित्य को हिंदी तथा अन्य छत्तीसगढ़ी भाषा में समझने व समझाने के लिये। और आजकल खोला है इन्होने पुस्तकालय... अब आप ही कहिये पुस्तकों का खजाना किसे पसंद नही? तो चले आईये आप भी खोजने अपनी पसंद इस खुले पुस्तकालय पर।



व्यंग्यलोक के अधिपति श्री प्रमोद भाई को कौन नही जानता कोई विषय उनसे अछूता नही है। आज मिठाईयों की वाट लगाई हुई है... J ( मुझे तो डाऊट है सबसे ज्यादा मिठाईयां यही खाते हैं इनकी सेहत का राज) अब दीपावली पर तो कमा ले बेचारे हलवाई। मुझे लगता है डिमाण्ड और सप्लाई का रूल समझा कर सरकार को यह भी झाँसा दे रहे हैं J




अब कुछ छेड़-छाड़ बुरा न मानो भाई तीन-तीन त्योंहार गुजरे मै कुछ बोली? नही न अब इतने दिन बाद कुछ हँसी-मजाक हो जाये...चलेगा मुझे लगता है कुछ लोग पक्का चिढ़ जायेंगे कुछ मेरे घर तक आ जायेंगे और कुछ...हेहेहे J



स्पंदन पर पढ़ा शिखा जी पका रही हैं गट्टे अरे रे कोई उन्हे समझाओ गट्टे बेसन के बनाओं J

महफ़ूज़ भाई के ब्लॉग पर जाना और लौट आना। आपकी टिप्प्णी दब जायेगी भोलाराम के जीव की तरह अरे भई पहले ही एक सौ सत्रह टिप्पणी लिये बैठे हैं... J



अब पढिये एक उल्लू की पोस्ट और लीजिये मजे ही मजे पोस्ट लिखी है ललित भाई ने और कोशिश की है उल्लू बनाने की ... J



आजकल सबकुछ इतना महंगा और मिलावटी, नकली हो गया है कि खाते हुए भी डर लगता है तो ठीक है न आवो बालम ककड़ी खायें इब ताऊ ठहरा हरयाणे का जाट तो भई ताई को ककड़ी ही खिला सकै है इब (ताऊ की पूरी पोस्ट पढते जायें J)



पोस्ट तो बहुत लम्बी हो गई भाई अभी तक ऋतुपर्णा से डिस्कशन कर रहे हैं। और राकेश जी कई महिने से सीता जी की जन्म कथा सुना रहे हैं। अनुपमा जी लगता है पिछले संडे से गायन में ही उलझी रही हैं। संगीता जी ने जलाया है मोहोबत का दिया ... हम भी सराबोर हुए उनके प्रेम की रोशनी में  लो जी सदा जी की भी हो जाये चर्चा जरा... ओह्ह यशवंत जी का ब्लॉग कभी रात के दो बजे मत खोलना वरना ... उठ जायेंगे सब सोने वाले सुनकर गाने की धुन।


सबको राम-राम। अब दीजिये इजाजत... फ़िर मिलेंगे आज ही के दिन अगले रविवार आज बस चाय से काम चलाईये।


सुनीताशानू


Saturday, October 29, 2011

नयी पुरानी हलचल मे आज

नमस्कार! आप सभी का स्वागत है आज की इस हलचल मे इन लिंक्स के साथ-
  1.  चलिये आज के लिये भारतीय क्रिकेट टीम को जीत की शुभकामनाएँ दे दें!!
  2. दीपावली पर पढ़िये फिराक गोरखपुरी को 
  3. मोहब्बत का दीया जला कर तो देखो  
  4. ज़रा तो पास आओ ना ज़रा तो मुस्कुराओ ना 
  5. दीपावली एक विरल दृष्टि 
  6. अवसाद कहीं आत्महत्या का कारण न बन जाए
  7. जानिए याददाश्त कम होने की एक अहम वजह
  8. हमारा  दिल तुम्हारी चाहतों की राजधानी है 
  9. मेरी एक बात सुन सखी  
  10. कहाँ मिलेंगे कोमल रिश्ते
  11. मैं नहीं जानता क्या सही या गलत
  12. वो बीता बचपन
  13. यह मेरी महबूबा की पहचान है
  14. आने वाला पल जाने वाला है 
  15. करें कुछ अपने मन की बातें 
  16. कर लें एक नव सृजन
और अब सुनिए यह गाना-



इसी के साथ अपने दोस्त यशवंत माथुर को इजाजत दीजिये कल की हलचल के आने तक!


Friday, October 28, 2011

भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा की आप सभी को शुभकामनाएँ!

नमस्कार! आज भैया दूज और चित्रगुप्त पूजा का दिन है;नयी पुरानी हलचल की ओर से यह दिन आप सभी को बहुत बहुत मुबारक हो!
पेश हैं आज के ये खास लिंक्स--
  1. धर्म भक्ति और युवा
  2. एक मुट्ठी माटी 
  3. देखो जल रहा है दीप  
  4. अभिव्यक्ति:One more time 
  5. एक दीवाली ऐसी भी
  6. दीपावली का आया है त्योहार शब-ओ-रोज़
  7. कहाँ गया पासवर्ड
  8. नहीं सुहाती ये तेरी खामोशी
  9. don't worry about failure
  10. ऐसा होता है आम आदमी
  11. यह गीत क्या आपको याद है 
  12. कुछ लोग इंसानियत भूल जाते जहां
  13. गोरी तुझ से फूटते फुलझड़ियों से रंग
  14. पीछा नहीं छोडती अदम्य इच्छाएँ......
और अब सुनिये यह गाना -

    इसी के साथ दीजिये इजाजत अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक।


      Thursday, October 27, 2011

      आज की नयी पुरानी हलचल में …


      बहुत दिनों बाद आज की हल चल ले कर आई हूँ … पर दीपावली पर्व के कारण कुछ कम ही लिंक्स चुन पायी हूँ …इस बार इतने से ही काम चलाइए …

      मुक्ता दत्ता जी  कह रही हैं ..हम वहीं हैं , जहाँ तुम हो ..

      मनीष कुमार जी ले आए हैं …अमावस की काली रात

      नित्यानंद ज्ञान जी मार्मिक प्रस्तुतिकरण दे रहे हैं …जिसे कभी देखा था

      सुमीत प्रताप सिंह सत्य को कहते हुए एक लघु कथा लाये हैं …ठेका

      अमृता तन्मय खासियत बता रही हैं …गीली मिट्टी  की

      सिद्धार्थ सिन्हा जी सच्चाई को बयाँ करते हुए कह रहे हैं कि ..कैसे कहूँ दीवाली है ..

      तिलक राजकपूर जी कि एक खूबसूरत गज़ल --गाँव तुम शहर की ज़मीनों में

      रामेश्वर काम्बोज “ हिमांशु “ जी  एक क्लर्क की व्यथा को शब्दों में व्यक्त कर रहे हैं ..साहब का क्लर्क.

      आराधना जी का मानना है कि ..दिए के जलने से पीछे का अँधेरा और गहरा हो जाता है.

      वंदना गुप्ता जी इस दीपावली पर कह रही हैं कि --सिर्फ एक आत्मदीप जला लिया है

      नागेश पाण्डेय जी कह रहे हैं --- कैसे दीपावली मनाऊं ?

      अरुण सी राय दिखा रहे हैं  --दीपावली : कुछ चित्र.

      आज के लिए बस इतना ही … दीपावली की आप सभी को  हार्दिक शुभकामनायें .. फिर मिलते हैं नयी हल चल के साथ --संगीता स्वरुप

      लीजिए आज मेरी पसंद सुनिए -




      Wednesday, October 26, 2011

      रोशन हो आपका हर पल--ये है दीवाली की हलचल

      आज मां लक्ष्‍मी की आराधना का दिन ... जहां नन्‍हें दिये अपने प्रकाश से अलौकिक करेंगे हर घर को और अब  वक्‍त है हलचल के लिंक्‍स का तो आइए देखते है किसकी कलम क्‍या कह रही है लेकिन इससे पहले आप सभी के लिए एक नई खबर ...  ऑनलाइन पत्रिका नज़रिया की शुरूआत इस पावन पर्व से होने जा रही है, यह पत्रिका हिन्दी और अँग्रेजी (Bilingual) भाषा मे निकलने वाली मैगजीन है इसमे सम-सामयिक आलेख व काव्य रचनाएँ प्रकाशित हुआ करेंगी।  इस पत्रिका की संरक्षक आदरणीया रश्मि प्रभा जी है और संपादक  विमल रतोड़ी जी व पूजा शर्मा जी हैं तो डालिए आप एक नज़र इस पत्रिका पर ...
      शुभ दीपावली  के साथ हर दिन में एक नई आस हो ... अर्चना चावजी की इस बात के साथ फिर एक बार ... नई हुई फिर रस्‍म पुरानी प्रभु आए थे अयोध्‍या पूरा करके अपना बनवास दीपावली का अर्थ है बस ह्रदय में उजाले का वास ...... साहित्‍य काव्‍य अध्‍यात्‍म पर ..  दीवाली के दीप जले जब बता रहे महावीर शर्मा जी वहीं  कह रही हैं जहां सुधा जी सारे गलियारों का एकाकीपन मुस्‍कानों से भर जाए दीप से दीप जलें जब  पर्व है प्रकाश का, दीप जगमगाइए दीन के कुटीर में भी इक दिया जलाइए डॉ. रूपचन्‍द्र शास्‍त्री जी की यह अभिलाषा है नन्‍हें दीप न डरना   सरस्‍वती आशीष दें, गणपति दें वरदान राजेन्‍द्र स्‍वर्णकार जी की नन्‍हें दीप को सांत्‍वना ... दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं  बिखर गई मुस्‍कान लिए घर-घर खुशहाली .. कुंवर कुसमेश जी तो दीप जले वटवृक्ष पर वंदना गुप्‍ता जी ...  शुभ हो केवल शुभ हो  सबको यह दिवाली राजेश उत्‍साही जी का यह शुभकामना संदेश के साथ तुम दीप हो मेरे आंगन का  लाखो दीप जल उठे हैं मन में रवि जी कह रहे हैं तो  आँधियों में भी जले दिव्य प्रकाश मिले ...दीवाली पर्व दिया रौशनी करे आंगन भरे  हरदीप कौर सन्‍धु जी ... दिवाली पर कुछ क्षणिकाएं ....  मोहब्‍बत का दिया जलाने आई हैं .. हरकीरत हीर जी की यह क्षणिकाएं से तो सुनील कुमार जी के माध्‍यम से ...दिवाली की कथाए दे रही कितनी शुभकामनाएं इन सबके साथ में ये दीपमाला .. भी देखें ...कैसा रहेगा आपके लिए 25 और 26 अक्‍तूबर का दिन ??  संगीता पुरी जी का ज्‍योतिष शास्‍त्र चलने से पहले क्‍या कह रहा है  ...अब एक यह गीत भी है दीपावली की अनन्‍त शुभकामनाओं के साथ .... तो सुनिए इसे ... यहां



      आपके विचारों का स्‍वागत है ...हलचल की इन लहरों के साथ सदा को इजाजत दीजिये ... कल फिर उपस्थित होंगे .. एक नई हलचल के साथ ...


      Tuesday, October 25, 2011

      दीपोत्सव की शुभकामनाएँ-तुकबंदी के साथ


      नमस्कार! दीपोत्सव की शुभकामनाओं और तुकबंदी के साथ लीजिये आनंद आज के इन लिंक्स का -
      और अब सुनिए यह गाना --


      इसी के साथ दीजिये इजाजत अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक। 


      Monday, October 24, 2011

      धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ !



      नमस्कार! आज से दीपावली पर्व की शुरुआत हो चुकी है। अप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
      प्रस्तुत हैं आज के ये खास लिंक्स-

      1. दीया करता चाणना 
      2. उफ़्फ़ ये एम एस टी वाले
      3. खजुराहो की नदी देवियाँ
      4. बात करें त्योहार समभाव  की
      5. टूटने नहीं देना यह विश्वास
      6. मेरी डायरी से सितंबर,२००७
      7. समझ नहीं आता, है ये कैसा सफर
      8. अन्ना आंदोलन और मीडिया कवरेज
      9. ध्यान रखिये टॉन्सिल जानलेवा भी हो सकती है
      10. क्या है फर्क कल ,आज और सच्चाई मे
      11. आज मिलेगा गिरमिटिया मजदूर
      12. मैक या विंडो वैवाहिक परिप्रेक्ष्य 
      13. क्या है यह कैद-ए-रिहाई 
      14. प्रश्न खड़े करती चरित्रहीनता ????
      15. पढ़िये Unfortunate Stories
      अब सुनिए यह गाना-



      इसी के साथ दीजिये इजाजत अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक।


        Sunday, October 23, 2011

        कैसी हो तुम खबर कोई लेती नही...लो जी फ़िर हुई नई पुरानी हलचल



        ग्रीन लीफ़ जिसे पंखों के सामने सुखाया जाता है

         

        नमस्कार दोस्तों,

         

        आज की सुहानी, ठंडी-ठंडी खुशनुमा सुबह में चाय के साथ आप सभी का स्वागत है। मुझे मालूम है,

         अनुपमा जी तो संडॆ का भरपूर आंनन्द ले रही होंगी और राकेश जी बार-बार सूरज निकलने का कर रहे होंगे इंतजार। बहुत समय से मैने उन्हे कचौड़ी, पराठें का लालच देकर टिप्पणी बटोरी हुई है :)

         हाँ जी हाँ... आज संडे है न तो ठहरिये जरा थोड़ा मै भी सुस्ता ही लूँ कल रात किया था रतजगा और चुन-चुन कर सजायी कुछ सुन्दर लिंक्स से यह पोस्ट। देखते हैं कितनी पसंद आती है आपको।  कुछ बुरा लगे तो नाराज न हो जाना दिवाली है...J

         

        कैसी हो तुम खबर कोई लेती नही...

        याद तक आती नही या नाम ही लेती नही... J(दूसरी पंक्ति मैने जोड़ दी है ) 

        दोस्तों यह शिकायत है मेरे बड़े भाई की ( अरे भई भाई बनना कोई आसान बात नही और वो भी बड़ा J)  .....कोई उन्हे समाझाये कि चाय का व्यवसाय ऎसा ही है और उस पर यह दीपावली का त्यौहार अब आप ही बताईये चाय न बेचूँ तो भला क्या करूँ...:)

         

        बहुत दिनों से संगीता जी नज़र नही आई यशवन्त माथुर जी से पता चला की एक्सिडेंट हुआ था। फ़ोन किया तो पता चला की वो अब ठीक है। तो भई दिन भर ऑफ़िस के काम से जब फ़ुर्सत न मिल पाई तो हमने रात ग्यारह बजे ही उनके घर बोल दिया धावा... J खबर न हो तो बता दूँ भैया अपुन की तो दुश्मनी ही नही दोस्ती भी डैंजरस है कभी भी आपके घर टपक सकते हैं...फ़िर मत कहना पहले नही बताया J


        सबसे पहले मै हमारी नयी सदस्या सदा जी यानि की सीमा सिंघल जी का स्वागत करती हूँ। बहुत समय से उन्हे पढ़ा। बहुत अच्छा लगा। और यह हमारा सौभाग्य की वो आ गई हैं हलचल मचाने।

         

        पिछली पोस्ट में मैने पूछा कि मै कैसी हलचल करूँ कि सचमुच हलचल हो जाये तो मुझे कई बेहतरीन सुझाव मिले। 

        सबसे पहला सुझाव मिला नवीन चंद्र चतुर्वेदी जी का। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद नवीन जी यशवन्त जी काफ़ी समय से इसी तरह की हलचल कर रहे हैं। मुझे तो कुछ टेड़ी हलचल पसंद आती हैं... J जैसे की प्रमोद भाई जब देखो यही लिखते हैं "क्या बहन जी सुस्त हो गई... क्या बहन जी आजकल जल्दबाजी में निपटा रही हैं।" ऎसा ही है, मगर जो भी है आप एक बार इनसे बात करके देखिये। सब समझ जायेंगे J  अब व्यंग्य लोक भी पढ लीजिये जनाब?   मनोज जी कहते हैं कि चर्चा को विस्तार दें... तो भई लीजिये आप तैयार हो जाये पढ़ने के लिये... चर्चा पूर्ण विस्तार के साथ :)

         

        ये हैं शिल्पा मेहता जी पेशे से एक इंजीनियर हैं मगर लेखन देख कर लगता है लेखन में अधिक इंट्रेस्ट है। मेरी खोजबीन में आज इनकी एक खूबसूरत पोस्ट भी शामिल है। आइये देखिये बेल्लारी के आयरन माइन्स।

         

        और ये हैं अजय कुमार झा एक पक्का कार्टून...ओह्ह हम नही यह तो खुद अपने आपको पक्का कार्टून बतलाते हैं। यकीन नही तो खुद ही इनके ब्लॉग पर देख आइये जनाब। वैसे सच तो यह है कि इनकी कलम खुद ब खुद खींच ले जायेगी आपको....जो तुम रिपब्लिक तो हम पब्लिक हैं बाबू...

         

        खुशदीप सहगल जी को कौन नही जानता हाँ ये और बात है कि ये मक्खन को लेकर बहुत चिंतित हैं विश्वास नही तो खुद ही देख लीजिये और आप भी मनाइये मक्खन के साथ दीपावली...मक्खन की दिवाली

         

        भारतीय डाकसेवा में अधिकारी कृष्ण कुमार यादव जी को पढ़कर लगा कि एक डाकिया हमारी जिंदगी के लिये कितना महत्वपूर्ण है। आप खुद क्यों नही जान लेते कि डाकिया डाक के साथ और क्या-क्या साथ लाता है...डाकिया डाक लाया

         

        निदा फ़ाजली ने भी लिखा है...

        सीधा-साधा डाकिया जादू करे महान

        एक ही थैले मे रखें आँसू और मुस्कान

         

         

        सुमित्रा नन्दन पंत जी की मानस पुत्री को कौन नही पढ़ना चाहेगा। दर असल उनसे मेरी एक ही मुलाकात हुई थी परिकल्पना ब्लॉगोत्स के अवसर पर। शब्दों का अथाह सागर खुद में समेटे हुए उनकी लेखनी आपको खुद उनका परिचय दे रही हैं.... सपनों वाली वो लड़की

         

        इसके साथ ही आज का चर्चा प्रकरण समाप्त होता है आप आनन्द लीजिये गरमा-गरम चाय और पकौड़े का और मुझे इजाजत दीजिये... फ़िर मिलेंगे आज ही के दिन कुछ नये और खूबसूरत लिंक्स के साथ।

         

        सादर

         

        सुनीता शानू

         

         

         



        Saturday, October 22, 2011

        नयी पुरानी हलचल मे आज -


        नमस्कार! आप सभी का स्वागत है आज की इस हलचल मे इन खास लिंक्स के साथ-
        1. बच्चों सुनो क्या कहता है लालची कुत्ता 
        2. यह कविता है सबसे अलग 
        3. बीती यादों का कोई अवशेष रह न जाए ...
        4. मत दीजिये विटामिनों के वहम मे मृत्यु को दावत 
        5. कुछ गीत गाएँ चलो दीपक जलाएँ हम 
        6. समानता है भारतीय रेल और तेलंगाना आंदोलन मे
        7. अब मनेगी फेसबुक पर सुहागरात
        8. सिंघाड़ा:गर्भवती महिलाओं के लिये अति उत्तम औषधि
        9. आखिर क्यों हैं बिखरे लम्हे
        10. किसी से कुछ कह नहीं पाता हूँ;पता नहीं क्यों??
        11. सुनिये मेरी यह एक गजल
        12. हलचल पर लगेगी पोस्ट सोचा न था :)
        13. मैं कुछ न जानूँ ...अब तुम्हारी लीला तुम्ही जानो
        14. बहुत दिनों बाद उनका ख्याल तो आया
        15. समझ नहीं आ रहा इस पोस्ट को क्या नाम दूँ
        16. दिल करता है वक़्त की लहर मे डूब जाने को 
         और अब सुनिये यह गाना -



        इसी के साथ इजाजत दीजिये अपने दोस्त यशवंत माथुर को कल की हलचल के आने तक।


        Friday, October 21, 2011

        नयी पुरानी हलचल मे आज


        नमस्कार! आप सभी का स्वागत है आज की इस हलचल मे कुछ खास लिंक्स के साथ-
        1. एक बेहतरीन सॉफ्टवेयर आपके मोबाइल के लिये
        2. दो शब्द देश के लिये
        3. आधुनिक जीवन शैली और ह्रदय रोग
        4. इस दिवाली पर जलेगा अमर प्रेम का दीपक
        5. खिली धूप तो मिलेगा अपनों का साथ
        6. देह से इतर कुछ कहानियाँ कुछ नज़्में
        7. यह है 50 वीं पोस्ट का प्रारब्ध
        8. मन का मौसम बहारा
        9. मन को  भा रही है नभ की सुषमा
        10. क्या होता अगर समय जो दिखता तो
        11. हैं ये आँसू या मोती क्या कहूँ
        12. कोई न जाने दीपक का दर्द 
        और अब सुनिये यह गाना-



        इसी के साथ इजाजत दीजिये अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक। 


        Thursday, October 20, 2011

        नयी पुरानी हलचल मे आज


        नमस्कार! आप सभी का स्वागत है आज की इस हलचल मे कुछ खास लिंक्स के साथ-
        1. सुनो यह जीवन की कहानी है 
        2. एक नया रिश्ता बनाएँ हलचल के साथ
        3. अपना ब्लॉग जगत कुछ ऐसा ही है 
        4. टंकी की नौटंकी मोबाइल  टावर तक 
        5.  क्या आप भी परेशान हैं गर्दन के दर्द से 
        6. पिछड़ेपन की निशानी है ये
        7. आज ये  संकल्प लेना है
        8. आज मैंने अपने प्रेम को लिखने  के लिए शब्द ढूँढे
        9. तनहाई बहुत अजीब होती है
        10. पत्नी पग पग पर परे,पल पल पति पतियाय
        11. समुद्र जितनी गहरी होती हैं कुछ बातें 
        और अब सुनिये यह गाना-



        इसी के साथ इजाजत दीजिये अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक!


        Wednesday, October 19, 2011

        स्वागतम! आज की हलचल में ....

        नमस्‍कार ..  आप सभी का स्‍वागत है ... आज की इस नई पुरानी हलचल में आपके सामने उपस्थित है एक नई सदस्‍या  'सदा'  जिसने ढूंढे हैं आपके लिये कुछ खास लिंक्‍स आपकी अपनी रचनाओं से ..तो आइये रूबरू होते हैं उन सभी से ...
          
        मुझे भी अपने द्वार का एक पौधा मान लो न राजेश उत्‍साही जी की कलम कहती है ... प्रेम : एक निवेदन  वहीं विजय मौदगिल जी ने बहुत खूब कहा है   इश्‍क .विच..न जीण दी सुध न मरण दी चाह ... की बात के साथ इमरान अंसारी जी की यह पेशकश ... आते आते मेरा नाम सा रह गया उसके होंठो पे कुछ काँपता रह गया ...तो फिर  इस तरह जाना और माना प्यार में प्यार से ऊपर कुछ भी नहीं ... रश्मि प्रभा जी की इस रचना के साथ... किसे कहें अपना, किसे पराया ...कह रही हैं पूनम माथुर जी क्रांति स्‍वर में समझना   के माध्‍यम से ..तो एक सवाल है संगीता स्‍वरूप जी का जा रहे हो कौन पथ पर.....?????? 

        साधना वैद जी का यह कहना ... हौसला चुकने ना दे ,होगी सुहानी भोर भी तू .. ..बेबस मन    की बात को ... छू लेता है ज़मीन को थक हार कर कह रहे हैं यशवन्‍त माथुर जी  हादसों की शक्‍ल में साजिशों का जलजला
          दरख्तों ने
        जमीन से जुड़े होने का वास्ता दे दिया .. कह रहे हैं एम. वर्मा  पापा को बना दिया  घर की खोल में चुपचाप पड़ा रहने वाला दुर्लभ थर्मामीटर ......देवेन्‍द्र पाण्‍डेय जी ने तो कह रहे यहां खुला आसमान  सबके लिए है ...कुश्वंश जी के बाद चलते हैं  किताबों की दुनिया   में पढ़ते हैं बशीर बद्र जी को नीरज गोस्‍वामी जी की कलम से ...
          
        चरित्रहीनता क्या है ?  में सबसे पहले हमें जानना होगा कि चरित्र कहते किसे हैं .. एक विस्‍तृत परिचर्चा .के साथ अब आप से इजाजत चाहूंगी ... लेकिन उसके पहले यह गीत ...







        Tuesday, October 18, 2011

        नयी पुरानी हलचल मे आज


        नमस्कार! आज की इस हलचल मे आप सभी का स्वागत है कुछ खास लिंक्स के साथ-

        1. स्मारकों से ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है स्मृतियों का होना 
        2. खामोशी को शब्द चाहिये 
        3. वातायन -मयंक अवस्थी जी की गजलें 
        4. काश मैं ऐसी होती 
        5. चले न चले हम उस राह पर 
        6. कोई संशय नहीं तुम पर 
        7. किसी के सुर नहीं मिलते बेसुरों के बीच
        8. वही अजमेर जाते हैं जिन्हें ख्वाजा बुलाते हैं
        9. मैं रूठ तो जाऊँ वो मनाने नहीं आते  
        10. कुछ एहसास हमारे तुम भी महसूस करो 
        11. जीवन एहसासों मे बसता है 
        12. संवेदना जब तक है कविता मारेगी नहीं 
        और अब सुनिये यह गाना --



        इसी के साथ दीजिये इजाजत अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक।


        Monday, October 17, 2011

        समय


        समय को रोकना हमारे वश मे नहीं है.... समय को बस चलते जाना है....एक एक पल अनमोल है बस कोशिश करनी है हर पल को भरपूर जीने की ...और यह सुख भी सब को नहीं मिलता।

        समय पर केन्द्रित आज की इस हलचल मे आप सब का स्वागत है--

        1.  चलते समय 
        2.  यह समय भी गुजरेगा समय के साथ 
        3. पारिवारिक समय का कत्ल कर रहे हैं अंतर्जाल और फेसबुकिया दोस्त
        4. कोरा कागज और  समय
        5. लेनी है समय की नाप 
        6. समय के देवता,थोड़ा रुको 
        7. समय कभी थमना नहीं
        8. सोशल नेटवर्किंग :नए समय का संवाद 
        9. शेष समय इतना करना प्रिय
        10. वीरान समय अजीब सा लगता है
        11. अब भी समय है खुद को बदलने का
        12. अपने समय की अकविता है यह
        13. समय के साथ होती जा रही है दुनिया रंग रंगीली
        14. आकाश और समय एक का एक
        15. बुरा समय एक परीक्षा
        16. वापस नहीं आता बीता हुआ समय
        17. चिंतन समय का
        18. अयथार्थवादी सोच,यथार्थवादी समय
        समय का पहिया लगातार चलता है.....यह गाना भी कुछ कहता है   ----



        इसी के साथ दीजिये इजाजत अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक।


        Sunday, October 16, 2011

        आप कैसी हलचल चाहेंगें? ... नई पुरानी हलचल में आज






        सुप्रभात!

        सच कहूँ मुझे सीधी-सच्ची बात कहने में कभी संकोच नही होता। और सीधी-सच्ची बात यह है कि मुझे सीधी-साधी हलचल में मज़ा ही नही आ रहा। यह भी कोई बात हुई कि हलचल हो मगर आवाज़ ही न आये। मज़ा तो तब है जब हलचल हो ऎसी की हिलाकर रख दे...

        तो दोस्तों इजाजत चाहूँगी कुछ ऎसी खट्टी-मीठी बातों के साथ हलचल हो जाये जो आपकी सुबह हँसी के फ़व्वारों और गरमा-गरम ब्रेकफ़ास्ट के साथ खुशनुमा बना जाये।
        टिप्पणी अवश्य दें आप कैसी हलचल चाहते हैं?   

        चर्चा पर चर्चा फ़िर एक चर्चा, क्या करें भई चंडीदत्त शुक्ल जी की कवितायें ही लाजवाब हैं।

        गहन चिंतन में डूबी हैं वन्दना जी चलिये हम रूबऊ होते है वंदना जी की तीन कविताओं से, 

        दोस्तों सच हमेशा कड़ुआ होता है। और इसी सच के चाथ हम पढ़ेंगे श्याम कोरी जी की कविता,” मै दलाल नही हूँ ।

        मेरी भावनाओं में रश्मि प्रभा जी से मुलाकात  हुई और पढ़ी एक कविता .”मुझे निकलना है इस भूलभुलैये से।


        लीजिये पढिये प्रतिभा जी की आत्म-विश्वास  से भरी यह कविता।

        बहुत कुछ लिखते हैं जनाब क्या आपने भी कभी पढ़ा है इन्हे--- मुकेश सिन्हा की यह खूबसूरत कविता।

        गज़ल पढ़ने का समय हुआ और लीजिये प्रस्तुत है लक्ष्मी शंकर वाजपेयी जी की यह गज़ल।
        तू है बादल
        तो, बरसा जल
        प्रमोद भाई बता रहे हैं कि की भातिं-भातिं के व्हिसिल ब्लाँगर हैं।

        कैसे कहूं में कविता वर्मा कह गईं है पचमड़ी के यात्रा का वर्णन ।

        आरम्भ से होना चाहिये था आरम्भ लेकिन क्या करें संजीव जी व्यस्त हैं “उड़ने को बेताब है यह नया मेहमान।“

        कृपया माफ़ी दें समय बहुत कम है आज की चर्चा बस यहीं समाप्त करती हूँ। अब दीजिये इजाजत सुनीता शानू को अगले रविवार होगी फ़िर नई खुशबूदार हलचल आपकी फ़रमाइश पर।

        सब लोगां नूँ घणी घणी राम-राम।



        Saturday, October 15, 2011

        नयी पुरानी हलचल मे आज


        नमस्कार! आप सभी का स्वागत है आज की इस हलचल मे इन कुछ खास लिंक्स के साथ-

        1.  यहीं कहीं है चाँद और वो 
        2. हाड़ा रानी की कहानी 
        3. मुझे कुछ कहना है ...गलतियों को दोहराना हमारी आदत है
        4. एक बार फिर हैवानों की हैवानियत ने किया इंसानियत को शर्मसार
        5. बहता रहे जीवन मे संगीत
        6. अब तो जागो....मेरी प्यारी धरणी 
        7. आइये चलें एनालॉग से डिजिटल की ओर 
        8. आज है कुछ समझना 
        9. कौन उद्दीपन रसों का...कौन छंद विधान हो तुम
        10. ऐसे हैं मेरे दोस्त
        11. एक नज़र यादों के साये मे इलाहाबाद पर
        12. कलम आज तू मेरी सुनना और सुनती जाना जब तक मैं कहूँ
        13. शायद फैमिली बैकग्राउंड बहुत बड़ी चीज़ है
        14. कभी नहीं मिटतीं यादें बचपन की
        15. काश मुझे दो पंख होते तो मैं भी उड़ जाती
        और अब सुनिए यह गाना--



        इसी के साथ अपने दोस्त यशवन्त माथुर को इजाजत दीजिये कल की हलचल के आने तक।


        Friday, October 14, 2011

        नयी पुरानी हलचल मे आज


        नमस्कार! आप सभी का स्वागत है आज की इस हलचल मे; और मैं स्वागत करना चाहूँगा आदरणीया सदा जी का भी जो अब इस ब्लॉग से जुड़ चुकी है। संभवतः प्रत्येक बुधवार हम सब उनके द्वारा दिये लिंक्स से रु ब रु हुआ करेंगे।

        अब डालिए एक नज़र आज के कुछ खास लिंक्स पर-
        1. आज कल पता नहीं कहाँ जा रहे हैं हम???
        2. कीजिये स्वप्न सुंदरी के दर्शन
        3. Beware:Incredibly Contageous
        4. समझ नहीं आता ये वक़्त बदलता है कैसे
        5. सोच रहा हूँ मैं भी अटेण्ड कर लूँ हिन्दी लिखने की खास क्लास
        6. कीमती तोहफा जल्द ही मिलने वाला  है 
        7. क्या है यह कोई ख्वाब...हकीकत या कोई ख्याल 
        8. ज़ोर से एक आवाज़ दे रहे हैं रजनीश जी ...ज़रा सुन तो लीजिये
        9. ओ आसमान के चाँद कब आओगे ज़मीन पर 
        10. माँ की तरह रोती  रही ...उस वक़्त 
        11. जिंदगी कैसी है पहेली
        12. यह कैसा घर ...कोलाहल से दूर
        13. सुनते हैं एक गजल
        14. किसी का इंतज़ार है कुमार को  
        15. To those who chose to co-exist with us - You are honored.
        16. भीगी आँखों मे, कभी अक्स नज़र नहीं आते  
          अब सुनिए यह गाना --



          इसी के साथ इजाजत दीजिये अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक।


          Thursday, October 13, 2011

          नयी पुरानी हलचल मे आज


          नमस्कार! आप सभी का स्वागत है आज की इस हलचल मे इन खास लिंक्स के साथ-

          1. प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से अब बनेगी सस्ती दर पर हाइड्रोजन और बिजली
          2. काजल कुमार जी का कहना है कि साइलेंट मोड के उपयोग और भी हैं
          3. क्यूँ एक आस दिल मे जगाई तुमने
          4. एक नज़र व्यापार और रंगभेद पर
          5. पूरा हो गया मैक पूर्ण अनुभव का एक माह
          6. अपने कंप्यूटर के लिए खींच दीजिये लक्ष्मण रेखा
          7. अरे भाई सब गोलमाल है यहाँ
          8. टकराइए हर शाम के बाद जाम
          9. हो आती है अक्सर स्मृति तुम्हारी
          10. दुख होता है दुर्गा पूजक देश मे कन्या भ्रूण हत्या देख कर
          11. कहने हैं दो शब्द तुम्हारे लिये
          12. कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि ये शब्द अनमोल हैं
          और अब सुनिए यह गाना--



          इसी के साथ अपने दोस्त यशवंत माथुर को दीजिये इजाजत कल की हलचल के आने तक।


          Wednesday, October 12, 2011

          नयी पुरानी हलचल मे आज

          नमस्कार! जिंदगी चलते जाने का नाम है। वक़्त के साथ चलने की हम कोशिश तो करते है लेकिन वक़्त की तेजी के आगे हारना तो एक दिन पड़ता ही है;इसलिए मुझे बिलकुल यकीन नहीं होता उन लोगों की बातों पर जो कहते हैं कि वो वक़्त के साथ चलते हैं। खैर ये तो थी अपनी बात; आप सभी का स्वागत है आज की इस हलचल मे कुछ खास लिंक्स के साथ -
          1.  पीड़ा अंतर्ध्यान हो गयी न जाने कब सुबह से शाम हो गयी 
          2. बहुत अच्छा लगता है तुम्हारा बिगड़ैल प्यार,जिद्दी दुलार 
          3. गए जो हो परदेस तो याद रखना ये बात
          4. इस दुनिया मे ऐसा भी होता है
          5. कोई आहट,कोई हलचल हमे आवज न दे जब तुम्हारा साथ हो 
          6. चाहत यही है कि कभी तो मर कर चैन आए मुझे
          7. अहसास की आवाज़ हलचल के साथ 
          8. नहीं सुहाती मुझको ये खामोशी 
          9. तुम थोड़ा वक़्त और रहते तो बहुत अच्छा होता
          10. आओ चलें तर्कसंगत टिप्पणी की पाठशाला
          11. वो रिश्ते अब बदल रहे हैं
          12. बच्चो के लिए लोरी का उपहार सो जा मेरे मन के हार 
          13. दक्षिण भारत एक दर्शन कीजिये बालाजी के साथ 
          14. श्रद्धांजलि शिव कुमार बटालवी और जगजीत सिंह जी को 
          15. बस इतना सा उपकार कर देना मुझ पर 
          और अब सुनिए यह गाना--



          इसी के साथ दीजिये इजाजत अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक।