Sunday, July 31, 2011

रहे सलामत चिट्ठाचर्चा और ये चिट्ठाकारी...नई पुरानी हलचल में सुनीता शानू

मोर का नर्तन


सुप्रभात! दोस्तों आज मै लेकर आई हूँ, नई पुरानी हलचल में काव्यमयी कुछ खट्टी, कुछ मीठी हलचल। हो सकता है, आज भी आपके चिट्ठों के साथ कुछ छुपमछुपाई की जाये...:)



आओ करें मिलकर चर्चा,सबकी बारी-बारी
रहे सलामत चिट्ठा-चर्चा, और ये चिट्ठाकारी॥



बिखरे मोती पिरो कर माला क्यूँ न बनायें,
माला में गूँथे मोती पे नाम तेरा लिख जायें,
आज मेरा दिन है, बोली थी एक दिन वो,
नही डरेगी, डटी रहेगी आज भारतीय नारी,

आओ करें मिलकर चर्चा,सबकी बारी-बारी
रहे सलामत चिट्ठा-चर्चा, और ये चिट्ठाकारी॥




राहें जो अंजानी सी थी, मुझको ढूँढनी होगी,
जिंदगी एक खामोश सफ़र है सुननी होंगी,
वीणा के सुर में लिपटे,गीत सुन रहा हूँ मै,
मेरे गीत गुनगुनायेगी, आज ये दुनिया सारी,

आओ करें मिलकर चर्चा,सबकी बारी-बारी
रहे सलामत चिट्ठा-चर्चा, और ये चिट्ठाकारी॥


मै इक निर्जल सागर  यूँही ही बहता जाऊँ,
बस इक ज़िद है मेरी, तुझको साथ ले जाऊँ,
मोर का नर्तन कहाँ गया, बतला  स्वप्न मेरे,
लिखा था मैने जिस पल प्रथम प्रेम पत्र एक बारी,

आओ करें मिलकर चर्चा,सबकी बारी-बारी
रहे सलामत चिट्ठा-चर्चा, और ये चिट्ठाकारी॥




चोर बहुत हैं, लेकिन एक चोर पकड़ में आया
मेरी ही रचना से जिसने अपना ब्लॉग सजाया,
हाय टिप्पणी!! काहे टिप्पणी!! के चक्कर में,
ब्लॉग पोस्ट के चोरों की कैसे गई मतिमारी,

आओ करें मिलकर चर्चा,सबकी बारी-बारी
रहे सलामत चिट्ठा-चर्चा, और ये चिट्ठाकारी॥



आ सखी चुगली करें, कोई चाहे न चाहे
वसुधैव कुटुम्बकम बने जिंदगी की राहें
पिता के बाद भी, ढूँढ रही  दो जोड़ी आँखें
मेरी अम्मा के गाँव में ठहरती है वों जाके
कोई करे बातें मीठी कोई खट्टी कोई खारी

आओ करें मिलकर चर्चा,सबकी बारी-बारी
रहे सलामत चिट्ठा-चर्चा, और ये चिट्ठाकारी॥



अंत में इजाजत दीजिये सुनीता शानू को...फ़िर मिलेंगे अगले हफ़्ते आज ही के दिन...

शुभकामनायें...  आपका दिन मंगलमय हो...। 


सुनीता शानू


Saturday, July 30, 2011

घिर आई सावन की हलचल.....!!!!





 नमस्कार आज मैं  anupama'ssukrity से अनुपमा त्रिपाठी फिर हाज़िर हूँ ...नयी-पुरानी हलचल पर घिर आई सावन की हलचल लेकर ...सबसे पहले ...



आज के लिए इतना ही ....अगली हलचल तक के लिए ...नमस्कार....!!!!
                                                                                     
                                                                                 अनुपमा त्रिपाठी


    Friday, July 29, 2011

    नयी पुरानी हलचल में आज-

    नमस्कार!नयी पुरानी हलचल मे आज आपका स्वागत है इन कुछ चुनिन्दा लिंक्स के साथ-

     तो अब दीजिये इजाजत इन कुछ लिंक्स के साथ अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक। 



    Thursday, July 28, 2011

    आज की नयी पुरानी हल - चल में ..खामोशी भी कह देती है सारी बातें


    * आज की हलचल राष्ट्र कवि रामधारी “ दिनकर “  की कविता से कर रही हूँ …जो उनकी छंद रहित रचना है --भगवान के डाकिये

    * रश्मि प्रभा द्वारा प्रस्तुत परिकल्पना पर पढ़िए --कुछ उनकी कुछ इनकी

    * मीनाक्षी जी की एक ज्वलंत मुद्दे पर बहुत संवेदनशील रचना --अजन्मी बेटी का प्यारा सा खूबसूरत एहसास

    * बाबुषा विवेचना कर रही हैं चार लोगों की ---चौथा आदमी

    *निर्मला कपिला जी का कहना है कि ..रिश्ते   कभी आग हैं तो कभी बर्फ …

    * हरमिंदर सिंह जी जीवन के यथार्थ को कह रहे हैं … ज़रा इस पर विचार करें --बूढ़े हम भी होंगे इक दिन

    * समय के साथ  यूँ तो सब कुछ बदलता है … पर पढ़िए  मनोज कुमार जी क्या कह रहे हैं ?

    *प्रियंका राठौर  बता रही हैं कि रात का  सन्नाटा कैसे- कैसे  एहसास करता है ..

    *एस० एम० “हबीब”  बता रहे हैं बुनियादी फर्क ….इंसान और पत्थर कुछ दृश्य

    *अपर्णा त्रिपाठी “पलाश “ कह रही हैं कि अच्छा हुआ राधा ( कृष्ण की ) ने इस समय जन्म नहीं लिया … पढ़िए उनकी लघुकथा -- एक्स प्यार

    * मृदुला प्रधान जी कह रही हैं कि -तुम मेरी चिन्ता मत करना

    *प्रेरणा अर्गल जी दर्पण में धुंधली तस्वीर देख विचार कर रही हैं आखिर ऐसा क्यों ?

    * महेंद्र वर्मा जी का कथन कितना सत्य है …खामोशी भी कह देती है सारी बातें

    * रेखा श्रीवास्तव जी बता रही हैं कि मन के   फासले  कहाँ खत्म हो जाते हैं .

    * अनु ( अंजू चौधरी ) ख्वाहिश कर रही हैं कि --अच्छा होता हम बच्चे ही रहते

    * सागर जी की एक खूबसूरत रचना पढ़िए --मैं इक निर्जल सागर

    * कुछ ब्लॉग को उलट पलट कर ढूँढ लायी हूँ अनुपमा जी के --पलट गए पन्ने

    * मैं स्वार्थी  हूँ ..  यह मैं नहीं कह रही …यह कह रहे हैं यशवंत माथुर ..

    *अंजलि माहिल जी ख्यालों में गुम सोच रही हैं कि --वो मुझे भी सोचे कभी कभी

    * साधना वैद जी अपने विचारों की सरिता में चला रही हैं कविता की …कश्ती

    * मीनाक्षी पन्त जी बेटियों के नाम एक प्यारा सा सन्देश दे रही हैं ---प्यारी सी कली जब फ़ूल बन खिली

    * मुदिता गर्ग जी की एक अनुपम कृति पढ़िए और विचार कीजिये --रिश्तों के रखाव  में

    *अनामिका जी अपने अनुभवों के साथ कुछ प्रश्न पूछ रही हैं … क्या आपके पास उत्तर है  ? …. कैसे कम्प्लीट मैन हो ?

    आज के लिए बस इतना ही … फिर मिलते हैं अगले सप्ताह एक नयी हल - चल के साथ ---संगीता स्वरुप


    Wednesday, July 27, 2011

    हलचल का अर्धशतक (51 वां दिन)

    नमस्कार! स्वागत है आप सभी का 51 वीं प्रस्तुति और कुछ चुनिन्दा लिंक्स  के साथ बुधवार  की इस हलचल मे-
    और अब आनंद लीजिये इस गीत का -


      तो अब इन लिंक्स के साथ दीजिये इजाजत यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक।


      Tuesday, July 26, 2011

      नयी-पुरानी हलचल मे आज

      नमस्कार! मंगलवार की इस हलचल मे आपका स्वागत है कुछ चुनिन्दा लिंक्स के साथ-

      और इसी के साथ इजाजत दीजिये यशवन्त माथुर  को कल की हलचल के आने तक । 


      Monday, July 25, 2011

      नयी पुरानी हलचल में आज

      नमस्कार! सोमवार की इस हलचल मे आप सभी का स्वागत है कुछ चुने हुए लिंक्स के साथ-
      1. तूफ़ान का सामना   करवा रही हैं डोरोथी जी
      2. मृदुला जी पूछ रही हैं उस अमर बेल की लता कहाँ ...
      3. यूं लगे हैं खुदा मिला हमको -मुदिता जी के कुछ "एहसास अन्तर्मन के"
      4. संध्या आर्य जी के "हमसफर शब्द" - तलाश रास्तों की अभी बाकी है 
      5. हर बार  कुछ कहना चाहती हैं शबनम खान जी
      6. रेखा झा जी ने कुछ लिखा है मुकेश की याद में 
      7. आखिर कुछ तो नेता जी पूछते हैं आतंकवादियों से 
      8. सुस बैंक मे खाता खोल लीजिये अब आप भी 
      9. रतन सिंह शेखावत जी दिखा रहे हैं  कविता की करामात 
      10. एक आवाहन कर रही है डॉ किरण मिश्र जी 
      11. पढ़िये पाठकों को तरसती एक प्रतीकात्मक कविता
      12. प्रेम-प्रमाण-पत्र  है कोई जो हमको देगा?
      और अब अंत मे सुनिये मेरी पसंद का यह गीत -


      इसी के साथ दीजिये इजाजत अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक।


        Sunday, July 24, 2011

        चर्चा में अपुन के भाई लोगों की सीट पहलेईच बुक-आओ करे पलपल नई पुरानी हलचल

        रंगबिरंगी तितली जैसी

        मैने कह तो दिया की मै चर्चा करूँगी।  लेकिन कल मुझे यशवन्त माथुर कह सकते हैं, शानू जी आप रहने दीजिये। आपके बस की बात नही, क्योंकि आप तो बस अपने ब्लॉग परिवार को उठा लाई हैं। एक बार भी नही सोचा कि कुछ पुराने लोग भी अनवरत लिखे जा रहे हैं।  कुछ भी कभी भी और क्वचिदन्यतोयपि उनके क्रांति स्वर को कोई तो है जो  शब्दों के पंख देगा। 

        अगर अनुपमा जी ने भी मुझसे पूछ लिया कि आपने ऎसा क्यों किया एक हिंदुस्तानी की डायरी में जाने क्या-क्या लिख डाला। क्या उस समय भी मेरी कलम से प्रेम रस की कोई धारा बह पायेगी? क्या  अंतर्मथन में कुछ कुलबुलाहट सी आरम्भ नही हो जायेंगी? कैसे अभिव्यक्त कर पाऊँगी उस समय दिल की बातें? कैसे समझा पाऊँगी मेरे विचार किउसने कहा था।



        ये सब बना न दे बात का बतंगड़ इस लिये पल-पल हर पल चर्चा करनी ही होगी और वो भी कुछ विशेष तरह से कि कुश की कलम भी न लिख पाये वो लिख डालूं  कुछ मेरी कलम से मै 
        बिना किसी लाग लपेट के
        मै एक ही बात कहना चाहती हूँ कि बहुत दिनों से मन आवारा-बंजारा सा घूम रहा था कि अचानक किसी ने दिल के दर्पण पर लिख दिया प्रेम ही सत्य है। मै सुनते ही एक बार आवेश में आ गई, अभी सोच ही रही थी कि शायद यह सब किस्सा-कहानी की बातें हैं। लेकिन तभी मेरे अंतर्मन में किसी ने आवाज दी। यह आधा सच है मोहतरमा। यह प्रेम-व्रेम कुछ नही अच्छे खासे दिमाग का  कबाड़खाना बना के रख देता है सदा। मिले तो ठीक नही तो दर्द में भी डाल लो  आदत मुस्कुराने की वरना...।

        अब ये भी कोई बात हुई भला कोई भी फ़ुर्सत के पलों में आकर दस्तक देने लग जाये...:( चलो छोड़ो बहुत सुन लिया    मन पाये विश्राम जहाँ ऎ दिल ले चल मुझको आज वहाँ।



        अरे रे रे...मुझे तो चिट्ठों की चर्चा करनी है। ऎसा करती हूँ पहले-पहल उनका जिक्र करती हूँ जो मेरे नाते रिश्तेदार हैं। पता चला कल से मेरी चर्चा देख सब कहें शानू तो बदल गई। तो भैय्या सबसे पहले मै अपने भाई लोगों का जिक्र कर लूँ नही तो नाराज हो जायेंगे। एक भाई ऎसे हैं जिनके गीत वादियों में गूँजते रहते हैं। जो दूर होकर भी मेरे पास रहते हैं। और एक मोटा भाई कहने को ही मोटे नही हैं समझ लीजिये मै नाराज हूँ, उनसे मालूम भी है क्या करते हैं वो...मुझ जैसी सून्दर नारी को अपने पोते से कहकर दादी कहलवाते हैं...उह्ह ये भी कोई बात है।


        एक भाई हहहहह हँसिये मत उन्हें आ गई तो मूँछॆ भी हँसने लग जायेंगी। अरे भाई जो पेड़े लाये थे वो तो थप गये...:) 
        भाई तो बहुत है एक बहुत मासूम है  देखते ही लग जायेगा अपुन का ही भाईच है खुदा महफ़ूज़ रखे हर बला से।
        भाई की बात चली तो वो कहते हैं मै चाहूँगा भी तो आप मानेंगी नही मतलब भाई को भाई नही कहूँ तो भला क्या कहूँ।डीलडोल से भी भाई से लगते हैं भाई...:(।


        स्कूल में यही शिक्षा पाई थी। सभी भारतीय मेरे भाई-बहन हैं ये और बात है कि हम चुपके से यह भी कह देते थे” एक को छोड़कर” तो वही निभा रही हूँ मै भी क्या गलत कहिये? एक राज की बात बताना तो भूल ही गई सभी ब्लॉगर मेरे भाई बहन हैं तो है और मज़ेदार बात... मेरे पति को ब्लॉग बनाना आता ही नही।


        आपको बताऊँगी नही मुझसे दस साल बड़ी है मै बताऊँगी तो पीटेंगी बचपन में बहुत प्यार करती थी आजकल अचार बना रही हैं।ब्लॉग पर...:) अचार का स्वाद चखना हो तो चखना बहुत दिन से अचार बना रही हैं वो।

        मुझे पता है बहुत से ब्लॉग छूट गये हैं कारण सभी ने अपने घर की  पहचान  दी ही नही।... अरे वो भी नही मानती कितनी बार कहा मेरी माँ में आपका चेहरा मिलता है मगर नही वो तो सुनती ही नही।


        चलती हूँ आज का राशीफ़ल देख कर बताना की वो मुझे चर्चा करने देंगे या बस...हो गई..।

        जाने से पहले कुछ न गुनगुनाऊँ कुछ न सुनाऊँ तो लगेगा समोसे के साथ चटनी नही मिली तो लीजिये 

        यह भी आपको बहुत पसंद आयेंगे...



        इक श्वाँस महक उठी होगी.




        अब तो ज़िंदा रहने के लिए जियें






        सुनीता शानू




        Saturday, July 23, 2011

        गरजें बादल .. डरपे मनवा ..भीगे मन की हलचल ...

        नमस्कार आज anupama'ssukrity से , मैं अनुपमा त्रिपाठी फिर हाज़िर हूँ आपके समक्ष लेकर ..नयी-पुरानी हलचल पर ...गरजें बादल .. डरपे मनवा ..भीगे मन की हलचल ...
        ज़िन्दगी को समझने की कोशिश में और उलझता जाता है मन ...दुःख-सुख ,आशा-निराशा ,धुप-छाओं ,हँसना-रूठना ,मुखरित या मौन रूप  में,ये भाव ..हमारे आस-पास सदा ही विद्यमान रहते हैं |इसलिए आज आपके समक्ष भावनाओं का इन्द्रधनुष है .....गरजना भी है ...डरना भी है और भीगना भी है ...अपने पसंद का रंग लीजिये और हो जाइये शामिल इस हलचल में ...


        • आज सबसे पहले पढ़िए ..रश्मि जी की मेरी भावनाएं पर ...खिला हुआ इन्द्रधनुष ..
                                                      क्या सच में ?
        •   एक अलग  रंग ..पढ़िए कैसे जीवन की सच्चाई लिए ..सुनीता जी के साथ आज 
                                        मन पखेरू फिर उड़ चला ...तुम्हारे बगैर ही ...
        • पढ़कर देखिये ...अमृता तन्मय जी का पूर्णविराम ...बहुत सुन्दरता से लगाया गया है ... ...
        • अविनाश जी की क्षणिकाएं  ...परिकल्पना ..पर ...आइये पढ़ते हैं ...
                            देखें इस उत्सव में साधारण क्या है ....?
        •  सच कहूँ आपसे आज कुछ प्रभु कृपा हुई है ...मैं नहीं कुछ कर रही आज प्रभु करवा रहें है मुझसे ....अपने आप ही ऐसे लिनक्स सामने हैं की आत्मा विभोर हो गयी है ...चलिए अब आप भी ये अद्भुत काव्य पढ़ कर विभोर हो जाइए ..मन पाए विश्राम यहाँ ..पर अनीता जी ने कहा ...कबीरा खड़ा बाज़ार में ...
        • अमृता प्रीतम की याद में ..रंजना जी ..की पोस्ट पढ़ते हैं ...
                          सवाल का जवाब बनने वाले मुझे इस चुप का अर्थ समझा जाना !!
          • आज मेरा मन फिर आपसे कुछ बांटने को कर रहा है .......तो पढ़िए ...
                         मौसम गाए-- राग मरवा या मियां मल्हार ....?

          आज के लिए इतना ही ...!!उम्मीद करती हूँ आज की हलचल पर विभिन्न भावो का ये इन्द्रधनुष आपको भाया होगा ...!!
          नमस्कार अगली हलचल तक के लिए ...!!
                                                                                    अनुपमा त्रिपाठी.
                                                                        http://anupamassukrity.blogspot.com/



            Friday, July 22, 2011

            नयी पुरानी हलचल


            आपका स्वागत आपकी आज की नयी पुरानी हलचल में .......


            • सचिन मल्होत्रा 

            प्रेम शब्द से तो आप सब भली - भांति परिचित होंगे !!



            • रश्मि प्रभा 

            कभी - कभी अचानक एक हलकी-सी खरोच
            सारे ज़ख्मों को ताजा कर जाती है , 
            फिर उस वक़्त तलाश होती है!

            • संध्या शर्मा 

            उसकी इजाज़त के बगैर जब पत्ता भी नहीं हिलता है,वह ख़ामोशी से दुनिया का तमाशा क्यों देखता है ..!

            • अल्पना वर्मा 

            आज कुछ विचार हैं जो मेरे मन में आए और चाहा कि उन्हें आप के साथ बाँट लूँ !

            • अमित चंद्र 

            आज फिर किसी का कत्ल होगा शायद , आज फिर उनके रूख पे नकाब नहीं है।


            • दिनेश

            नदी को समझने , नदी जैसा तो नही , बन सकता, लेकिन जब भी इन , शुष्क कपोलों पे , दो बूंदें लुढकती हैं !

            • ज्योति सिंह 

            जा रही है जिंदगी , जी सके तो जी , बढ़ कर आगे थम ले ......


            • संजू कल्याण 

            शाम ढलती है जब कहीं पर बवाल रखती है....
            चेहरे पर वो अपने तो रंग सुर्ख लाल रखती है !!


            • अनु 

            क्या पाया क्या खोया है ...

            कभी सोचा था कि वक़्त को कसके मुट्ठी में बांधूंगी !
            ये जानते हुए भी - ना वक़्त रुकता है !!



            अब हमे दीजिए इजाजत .......आपकी नयी पुरानी हलचल से ...मिलेंगे फिर 
            आप की  ही कुछ नयी पुरानी कृतियों  के साथ ...
            धन्यवाद !!!

            -Anjali Maahil


            Thursday, July 21, 2011

            आज की नयी - पुरानी हल - चल में …उसकी आँखों में झिल मिल तारे

            नमस्कार , हाज़िर हूँ आपके लिए मिले जुले लिंक्स ले कर …

            * श्री प्रकाश डिमरी जी की गहन अभिव्यक्ति ---महाप्रयाण

            * सुनीता शानू जी कह रही हैं कि--चलो एक हास्य हो जाये

            * प्रियंका राठौर जी के पास ---शब्द नहीं कहने को

            * संध्या आर्य जी का कहना है कि -समंदर नहीं उफनता

            * वीनस “ जोया"  जी लायी हैं ---बिखरे पलों के बिखरे बिखरे ख़याल औ  लफ्ज़

            * प्रवीण पांडे जी जानकारी दे रहे हैं एक पर्यटन स्थल की --काबिनी

            * मृदुला हर्षवर्धन जी  देख रही हैं - उसकी आँखों के झिल - मिल तारे

            * शिल्पी तिवारी बता रही हैं कि --दिल के फैसले अक्सर हमें कम रास आए हैं.

            * एहसास के एहसास पढ़िए ---एक आम आदमी की मौत

            * मोनिका जी का यह कहना आज भी प्रासंगिक है --जागो देशवासियों

            * अनामिका जी कर रही हैं --- अनुसरण

            * शेफाली जी अचरज में हैं कि कैसे हज़म कर लेते हैं --- पत्थर के निवाले

            * आनन्द सकलानी कह रहे हैं कि --भूलना इतना आसान नहीं

            * बाबुषा दिखा रही हैं नज़ारा --- भीड़   का

            * पुष्पा सक्सेना जी की मर्मस्पर्शी कहानी पढ़िए --अनछुआ पल

            * मनोज कुमार जी पढ़ा रहे हैं --दिल से लिखी रचना

            * अनुपमा त्रिपाठी जी लायी हैं ---सागर सा विस्तार

            * यशवंत माथुर जी पूछ रहे हैं  ---कब तक चलना है.


            आज बस इतना ही … आशा है आपको यह नयी पुरानी हलचल पसंद आई होगी … आभार ..संगीता स्वरुप


            Wednesday, July 20, 2011

            नयी पुरानी हलचल में आज

            नमस्कार! बुधवार की इस हलचल में आपका स्वागत है इन कुछ लिंक्स के साथ-


            और अब सुनिए मेरी पसंद का यह गीत-

             
              इसके साथ ही दीजिये  इजाजत अपने दोस्त यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक.


                Tuesday, July 19, 2011

                नयी पुरानी हलचल में आज

                नमस्कार!नयी पुरानी हलचल में प्रस्तुतहैं आज के कुछ खास लिंक्स-

                 अब सुन लीजिए वह गाना जिसे मैं सब से ज्यादा पसंद करता हूँ और जो हमेशा  मेरी पसंद बना रहेगा-


                तो अब इन संक्षिप्त से लिंक्स और इस गीत के साथ दीजिये इज़ाज़त अपने दोस्त यशवन्त माथुर को.




                Monday, July 18, 2011

                सावन के पहले सोमवार की हलचल

                नमस्कार! सावन के मौसम ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है.यहाँ लखनऊ में मौसम बहुत ही सुहावना सा चल रहा है.तो आइये इस सुहावने मौसम में सावन के पहले सोमवार को करते हैं हम भी कुछ हलचल.
                चल चल कर आप भी देखिये क्या कुछ चुनिन्दा है आज यहाँ आपके लिये-

                और पेश है अब ये गीत खास आपके लिये-


                तो अब दीजिये इजाजत यशवन्त माथुर को कल की हलचल के आने तक.

                Sunday, July 17, 2011

                नयी -पुरानी हलचल में आज

                नमस्कार! रविवार की हलचल में आपका स्वागत है कुछ चुनिन्दा लिंक्स के साथ-

                सावन  के मौसम में आइये अंत में सुनते हैं ये गीत -



                Saturday, July 16, 2011

                कुछ सावन की है हलचल ..

                • नमस्कार आज मैं  anupamassukrity से
                  अनुपमा त्रिपाठी फिर हाज़िर हूँ  नई -पुरानी हलचल  पर कुछ सावन की है हलचल लेकर ....
                  .....




                1. अनुपमा पाठक जी कहतीं हैं सावन आ गया है तो.....  इन्द्रधनुष खिल जायेंगे...
                2.  निलेश माथुर जी कह रहे हैं आवारा बदल पर हाँ मुझे प्रेम है ...किससे...?
                3.   कविता जी की कविता पढ़िए ..अनछुआ स्पर्श सिहरन दे गया....
                4.  प्राची के पार पर  दर्पण साह जी की पढ़ते हैं .....डिवाइन कॉन्सपिरेसी 
                5. हेमंत कुमार जी फुलबगिया पर बुला रहे  हैं ..काले मेघा आओ न ... 
                6. झूम उठा है सुमन जी का बावरा मन ,,के ..तुम आये हो ...!!
                7. सुज्ञ जी बता रहे हैं ...चार  अक्षय मुक्ता ...!!
                8. समय चक्र पर है पंचतंत्र से रोचक कहानी ..नक़ल की मार ..
                9. रामेश्वर कम्बोज हिमांशु  जी की चिंता करना..वाजिब है .. पढ़े.....?
                10.  अब साधना पर कबीर के श्लोक पढ़ते हैं ...
                आज के लिए इतना ही ...अब अगली हलचल तक के लिए नमस्कार ....!!



                    Friday, July 15, 2011

                    नयी पुरानी हलचल में आज -


                    नमस्ते! शुक्रवार की इस हलचल में आज फिर लायी हूँ चुन कर ये कुछ मोती -


                    मुकेश कुमार सिन्हा 
                    जिंदगी बदली
                    बदली सोच
                    बदला सम्बन्ध और उसका मूल्य
                    तभी तो
                    मन के अन्दर...

                    रेखा  श्रीवास्तव 
                    हम कहाँ जा रहे हैं
                    पिछले दिनों एक जबरदस्त अवसाद का सामना करना पड़ा। नहीं सोचा था कि जिन्दगी में....

                    अखिलेश  
                    काश  मैं कठपुतली होता
                    काश मैं भी इंसान नहीं
                    खूबसूरत कटपुतली होता
                    किसी आलिशान महल की...

                    कृष्ण  कुमार यादव 
                    चिठ्ठी  में बंद यादें
                    कहते हैं व्यक्ति के निर्माण में उसकी जंक कुंडली के शुभ और अशुभ ग्रहों का विशेष प्रभाव होता है..,

                    अरविन्द 
                    सच्चे प्यार - मोहब्बत पर नफ़रतों की गश्ती है.
                    यह इंसानों की बस्ती है यह इंसानों की बस्ती है.

                    अरुण  चन्द्र रॉय 
                    छीलते हुए मटर
                    गृहणियां बनाती हैं
                    योजनायें
                    सदा
                    कागज उजला है फिर भी निखरा नहीं है वह
                    सुमन  
                    आजकल आधुनिक प्रेमियों में ब्रेक-अप शब्द बड़ा प्रचलित हो रहा है! जरासी विचारों में  कुछ अनबन हुई नहीं कि, ब्रेक-अप हो जाता है!
                    आशा है आपको ये लिंक्स पसंद आये होंगे.




                    Thursday, July 14, 2011

                    नयी पुरानी हल चल में आज --दर्द जब कागज़ पर उतर आएगा ..


                    नमस्कार , आ गयी है आज की हल चल कुछ हल चल करने ….. कुछ हल चल हुई क्या ??????????


                    प्रवीण पांडे जी न जाने क्यों ऐसा कह रहे हैं ---प्यार छुपाये फिरता हूँ


                    वाग्वैभव पर वंदना जी की एक समसामयिक रचना पढ़िए --गिद्ध शासन

                    मंजु जी अभिव्यक्ति पर विचार मग्न हैं --ना जाने क्यों ?

                    समीर लाल जी की ख्वाहिश जानिये --मैं नेता बन जाऊं

                    डा० मोनिका शर्मा एक गहन विषय पर  रख रहीं हैं अपने विचार --आम औरत की छवि बिगाड़ते टी वी धारावाहिक

                    डा० निधि टंडन कह रही हैं कि यह संभव नहीं ---शर्तों पर प्यार

                    अनुपमा त्रिपाठी जी की आवाज़ में सुनिए ---गणेश वंदना

                    वंदना गुप्ता जी पूछ रही हैं कि क्या होता है ? ---औरत का घर

                    आकांक्षा गर्ग जी कह रही हैं कि --इस दुनिया में ख्वाहिशें पूरी  कहाँ होती हैं ...

                    अजीत गुप्ता जी की कुछ लघु कथा पढ़िए --प्रभु की पूजा , बाबा और आम

                    नवोदित जी विचार रख रही हैं अहम् विषय पर --संतुलन और तनाव

                    दिगंबर नासवा जी की गज़ल --दर्द जब कागज़ पर उतर आएगा

                    नवनीत पांडे जी पढ़ा रहे हैं --स्त्री के मन कि किताब

                    वाणी शर्मा जी बता रही हैं -- प्रेम में विकल्प

                    मृदुला प्रधान जी लायी हैं --उपहार तुम्हारे लिए ...आज

                    शिखा वार्ष्णेय जी कुछ लिख नहीं पा रहीं और पूछ रही हैं ---तुझ पर मैं क्या लिखूं माँ ?

                    मनोज कुमार जी की कहानी ---अनपढ़ हूँ , साहब

                    अनामिका जी कह रही हैं ---आज एक बार फिर

                    और अंत में …परिकल्पना पर --नशा उतरा  बाज़ी खत्म

                    आज बस इतना ही ..फिर मिलते हैं अगले गुरूवार को ..तब तक के लिए आज्ञा दीजिए ..नमस्कार -- संगीता स्वरुप

                    Wednesday, July 13, 2011

                    आओ हलचल मचायें



                     दोस्तो हलचल आ गयी एक बार फिर हलचल मचाने




                    Untitled 

                    बेनाम हूं मै

                     

                    आक्रोश का बीज

                    कभी तो उगेगा


                    चवन्‍नी बुला रही है अठन्‍नी आ ... आ ...

                    जरूर आयेगी


                    बचपन हमारा

                    फिर ना आयेगा दोबारा


                    तीसरा नेत्र

                    जब खुलेगा प्रलय ही करेगा


                    देख पाती बूँद-बूँद में उसकी कृपा, गर मेरा भी मन होता तुझसा सरल.

                    सही कहा

                     

                    सपने जो सोने नहीं देते 

                    ऐसा भी होता है


                     

                    जीवन तुम्हारा है

                    मगर अधिकार नही है

                       

                    "बिखर जायेंगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

                     यही नियति है

                     

                    लगता है फिर किसी को दौरा आया है

                    होता है ऐसा भी

                     

                    अष्टमोऽध्यायः अक्षरब्रह्मयोग (शेष भाग)

                    स्वागत है


                    दंश ...

                    कब मिट पाते हैं


                    बस यूँ ही ...

                    बहुत कुछ कह दिया


                    प्रियंका गुप्ता की कहानी - इंतहा

                    कभी तो हद होती ही है


                    क्यूँ?

                     इसी का जवाब नही मिलता


                     

                    कैक्टस कौन ?

                    पता नही?




                    Tuesday, July 12, 2011

                    नयी पुरानी हलचल में आज -

                    नमस्कार! स्वागत है आप सभी का मंगलवार की इस हलचल में कुछ चुनिन्दा लिंक्स के साथ-

                    और  अंत में ये गीत सुनिये-

                      तो  अब इन कुछ लिंक्स और इस गीत के साथ दीजिये इजाज़त यशवन्त माथुर को.इस विनम्र आग्रह के साथ कि इन लिंक्स को पढिये और अपने सुझावों से अवगत भी कराइए.