Sunday, December 18, 2011

दुनिया के बदलते रिश्तों से अनजान नादान छुईमुई सी मुस्कुराती हलचल

मोर तो राजस्थानी है जी अब कहाँ  ठहरा हुआ है बताया नही


नमस्कार..सुप्रभात!

मित्रों,

मेरी सुबह तो रात दो बजे ही हो जाती है जब आप सो रहे हैं नींद में और मै आपके ब्लॉग पर जाकर आपकी नई पुरानी रचनाओं को पढ़ने और हलचल मचाने में लगी होती हूँ...

आज फिर सुबह की इस खुशनुमा रंगीन हलचल में मै सुनीता शानू आप सभी का स्वागत करती हूँ। 

कुछ समय से एक बात का सांझा करना चाहती थी। क्या आप सबने भी रिश्तों के बदलने की चुभन महसूस की है कभी? क्यों वक्त के साथ हर रिश्ता बदल जाता है। जबकि कहते हैं प्यार कभी कम नही होता। मै मेरा और तू तेरा की भावना का जन्म क्यों होता है।


ऎसे ही कई सवालों से घिरी है मगर अनजान है दुनिया के बदलाव से, नादान है जो समझती है सबको अपना सा, फ़िर भी छुईमुई सी मुस्कुराती फ़िर आ गई है...लीजिये आज की हलचल...

मानव मेहताMy Photoका भी यही कहना है कि मौसम संग बदलते हैं रिश्ते। हाँ शायद रिश्तों की महक भी मौसम के साथ बदलती रहती है।

एक ही रिश्ता है माता-पिता का संतान से जो कभी बदलता नही।बाकि सभी समय के साथ बदल जाते हैं।
अंजु चौधरी जी को पढ़े तो रिश्तों के बदलाव का एक पहलू नजर आयेगा। पढिये बदलते रिश्ते पर उनकी यह कविता।

कभी-कभी मुझे लगता है पेड़ से सूखे पत्ते की तरह तमाम रिश्ते-नाते साथ छोड़ जाते हैं।
महिराज ब्लॉग पर मंजुकुमारी जी ने बदलते रिश्तों पर क्या लिखा है आप खुद ही पढिये...

जिंदगी भर यदि दुखों का रोना रोया जाये तो मुझे लगता है ज़िंदगी बहुत छोटी पड़ जायेगी। हम चाहते नही फ़िर भी दुख क्यों आते हैं ज़िंदगी में यही सवाल कर रहे हैंMy Photoनरहरी पटेल अब आप ही बताईये कौन चाहेगा दुखों को बुलाना?


कविता वर्माMy Photoजी कहती हैं दुखवा कासे कहूँ ? कविता जी यहाँ-वहाँ कहने से दुख कभी कम नही होने वाला। मेरी माने तो खुद से अच्छा कोई दोस्त नही है यकीन नही तो यशवन्त माथुरMy Photo जी से पूछ लें वो लिखते हैं...बातें खुद से...

सचमुच खुद से अच्छा दोस्त कोई नही। जब भी कभी कुछ कहना हो खुद से बातें की जायें। जब अपनी बातें हो अपने जज्बात हों खुद से शिकायतें कितनी खूबसूरत लगती हैं आईये चलते हैं चंदन जीमेरा फोटोके ब्लॉग पर जनाब लिखते हैं अब अपनी शर्तों पर बिकता हूँ मै।
आज बहुत दिन बाद मुझे मेरी सहेली बहुत याद आ रही है। किया भी क्या जाये?

प्रतिभा जीMy Photoलिखती हैं कोई प्यार काफ़ी नही होता उम्र भर के लिये...
सही है प्यार महसूस किया जाता है और मुझे लगता है प्यार खुद के भीतर होता है। यदि किसी को चाहते हैं तो पहले खुद से प्यार किया जाये J

तुम फुसफुसाई
पागल हो?
समझते ही नही
 मै तुमसे प्यार करती हूँ... कितनी खूबसूरत मनमोहक कविता है चण्डीदत्त शुक्ल My Photoजी की... आप भी महसूस कीजिये ठण्डी हथेली में मुसकान की गुनगुनाहट

सब ठाठ पड़ा रह जायेगा जब लाद चलेगा बंजारा शहनवाज़ भाईMy Photoआपका अपना ही अंदाज़ है

अब इजाजत दीजिये एक अंतिम लिंक के साथ... अशोक पाण्डेMy Photo जी की यह पोस्ट अवश्य पढ़ियेगा
आईये याद करें वही पुरानी हर रोज़ की सुबह आप मै और वही चाय J

फ़िर मिलेंगे शायद इस शनीवार न मिल पायें हम क्योंकि मुझे जाना होगा। एक हॉस्य कवि सम्मेलन में पच्चीस दिसम्बर की शाम पिलानी में हास्य कविताओं के साथ। लेकिन वादा है लौटते ही मिलेंगे आप, मै और.....वही चाय और क्या... J

आपका दिन मंगलमय हो...

सादर

सुनीता शानू




17 comments:

  1. नए लिंक्स खोज लायीं हैं आप ..कवि सम्मलेन के लिए बधाई और शुभकामनायें

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  2. अच्छी लिंक्स अच्छी हलचल |
    आशा

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  3. पढ़ने को बहुत सामग्री मिल गयी।

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  4. लेकिन वादा है लौटते ही मिलेंगे आप, मै और.....वही चाय और क्या...

    हम तो आपके लौटने का इंतजार करेंगें सुनीता जी.
    आपकी प्यारी बातें ज्यादा अच्छी लगतीं हैं,
    'लिंक्स' तो फिर खुद ही अच्छे हो जाते हैं जी.
    सोचता हूँ समय मिलने पर पढ़ ही लूँ.

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  5. प्रश्न पूछ कर आप जाते हैं कहाँ ?
    मोर मोरनी कहाँ ठहरे हैं,आप ही दीजिये न बता.

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  6. कवि सम्मलेन के लिए अग्रिम बधाई और शुभकामनायें………सुन्दर लिंक संयोजन्।

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  7. अच्छे सूत्र.... सुन्दर हलचल....
    कवि सम्मलेन कि लिये अग्रिम शुभकामनाएं

    सादर...

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  8. rishaton par achchhe links ke liye shukriya...kavisammelan ke liye shubhkamnayen.

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  9. गजब की हलचल है।
    कवि सम्मेलन अपनी प्रस्तुति रिकॉर्ड करवा लीजिएगा....हमे देखनी है :)


    सादर

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  10. सुनीता जी,...आज आपने बहुत अच्छे सुंदर लिंक्स खोजकर हलचल में प्रस्तुत किया,!!!!!!!!बधाई

    मेरी नई पोस्ट की चंद लाइनें पेश है....
    सब कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है
    चुल्लू भर जनता के हिस्से,इनके हिस्से सागर है,
    छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी
    अंधियारे बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी,
    पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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  11. अरे वाह सुनीता जी, आपका भी अपना ही अंदाज़ है इस नई-पुरानी हलचल का... बहुत दिनों बाद आपसे गुफ्तुगू हो पाई इस माध्यम से...

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  12. हां जी मोर तो राजस्थानी ही है !

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  13. bade hi khoobsurat dhang se aapne links pesh kiya hai.
    ssneh abhinandan
    Prritiy

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  14. शानदार और प्रभावशाली प्रस्तुति

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ब्लॉग्स्पॉट मे चल रही कुछ तकनीकी गड़बड़ी से कुछ कमेंट्स स्पैम मे जा रहे हैं जिन्हें तत्काल प्रकाशित करने का प्रयास रहता है फिर भी यदि आपका कमेन्ट यहाँ तत्काल न दिखाई दे तो निश्चिंत रहें आपका कमेन्ट प्रकाशित ज़रूर होगा।

आशा है सहयोग बनाए रखेंगे।