Saturday, November 26, 2011

रुक..रुक ..सुन-सुन ..हलचल की धुन !! ......

जल्दी जागने वालों  को ..शुभप्रभात ...!!
देर आये दुरुस्त आये .....नमस्कार  ...!
आ गया है ..मेरा दिन शनिवार ...!!
 आज लेकर सुरों की भरमार ...!

....और आ गयी हूँ मैं भी ...रुक..रुक ..सुन-सुन ..हलचल की धुन लेकर .....धुन तैयार है ...सुर तैयार हैं ...फिर देर किस बात की है ......चलिए ...सा लगाईये ....हारमोनियम की आवाज़ आ रही है न ....?


    सुर  तो  लग  गए और बहुत बढ़िया लगे पर सुर पक्का करने के लिए  ...चलिए फिर से षडज लगाइए इस बार चल स्वर भी लेते हैं ........
                 
    • सा .......कुश्वंश  जी ..सही श्रुति ली है ...जागो समय नहीं रुकता है ...
    •  रे (कोमल )  .....ये राहें कोमल रे की मुश्किल सी श्रुति हैं .....संगीता जी की .. 
    • रे .....शुद्ध रे ..से राहें ढूँढते  हुए ..मुकेश कुमार सिन्हा जी ...एक टुकड़ा आसमान ढूंढ लाये ...
    •  (कोमल )...सतीश जी ....कोमल ग बुनियाद है ...बहुत सारी रागों का ...जैसे काफी ठाट के अंतर्गत आने वाली राग ...बागेश्री ..भीमपलासी ..या तोड़ी थाट की भी ... आपको संगीत पढ़ना पड़ेगा ...
    • ग(शुद्ध )....गुनगुनाते हुए अशोक जी गा रहे हैं उसकी महिमा ...जिसकी महिमा से सब हलचल है ....
    • म ...से  मोहब्बत पर दीपक जी ज्योत जला रहे हैं ....
    • म तीव्र ....जब पलाश के फूल खिलते है .......जैसे जंगल में आग ही लग जाती है ...ऐसा ही नज़ारा होता है ...इसी तरह जब कभी-कभी  तीव्र मध्यम की सही श्रुति लग जाये ...मिल जाये सही नाद तो मारु-विहाग ऐसा खिलता है कि चुप होने का मन ही नहीं करता ...कभी-कभी ....ये सिलसिला खत्म नहीं होता ....जब तक जीवन है .............आज स्वरोज सुर मंदिर से भी मारू-विहाग की ही आवाज़ आ रही है .....
    • प ...प्रवीण जी आज क्या नया लाये हैं ...?बहुत बढ़िया पंचम लगाया है ...गार्गल करके आये हैं लगता है .......!!ओह ...उदासीन कुम्भकर्ण का श्राप मिटाने अब तो आ जाओ राम ....इतनी गहन सोच से लिखा है ...तभी खिल गया है पंचम ... 
    •  (कोमल)......बहुत ध्यान से कोमल ध लगाया ...और पूजा जी ...हम इन लहरों पर बना ये आवाज़ घर देखते देखते ..... बंध  ही गए आपसे .....
    • ध ...से ध्यान देने वाली बात है ...रश्मि दी ...संगीत सिर्फ पागल होने से ही नहीं बचाता हैं हमें ...बल्कि आनंद भी देता है ...आप ये पढ़ कर ही मुस्कुरा रहीं हैं ...न ....की हंस रहीं हैं .. ...?
    • नि (कोमल) भावनाओं से भरी ...बबली जी की शायरी ...
    • नि ...निषाद  निनाद करते हुए कहता है ...बचा लो पर्यावरण...शास्त्री जी आप की कविता में शुद्ध निषाद का बढ़िया प्रयोग है ....!!
    • सां....तार सप्तक पर संजय जी की पुरज़ोर आवाज़ ....विदेश जाने की इच्छा छोड़ दें भारतीय ....

      अगर मेरा बस चले तो सुरों का ये सफ़र यूँ ही चलता रहे हर प्रहर.. पर जानती हूँ आज बहुत सरे काम हैं आपको |  आभारी हूँ आपने सुरों के इस सफ़र में..  हलचल का  साथ निभाया ...!! हलचल  की  इस  सुर लहरी में ..  लहर-लहर लिंक्स पढ़ कर ... लिखने वालों का उत्साह बढाया .......!!  कैसी लगी हलचल ...ज़रूर बताएं .... थोड़ा  और साथ निभाते हुए.... अपने विचार भी बाँटते जाएँ ....!!
      अगली हलचल तक के लिए ...नमस्कार .. इस गीत के साथ ...आपका ..पुनः आभार ...!
      anupama's sukrity. से अनुपमा त्रिपाठी.


    31 comments:

    1. सुंदर प्रस्तुति सारे लिनक्स पर जाने का प्रयास रहेगा ....!

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    2. आपने तो हलचल मचा दी लिंक्स के द्वारा |
      अच्छी हलचल के लिए बधाई और आभार बहार पर आने का |
      आशा

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    3. बहुत अच्छे लिनक्स अनुपमा जी..... आभार

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    4. बड़ा जोर है इन सात सुरों में ... चेहरे की उदासी हुई है गम ...तो फिर छेड़ सखी सरगम.... सा रे ग म प् ध नि सा ...

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    5. सात सुरों के माध्यम से साहित्य के अनमोल स्थलों की सुहानी सैर बहुत ही अच्छी लगी अनुपमा जी ! मेरी दीदी और मेरी माँ दोनों की रचनाओं को इस संगीतमय सफर में देख हार्दिक प्रसन्नता हुई ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार !

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    6. आज की संगीतमयी चर्चा पढ़कर नींद उड़ गयी।

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    7. इस तरह की चर्चा में चर्चा के साथ रचना पाठ का सुख भी मिल जाता है।

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    8. सुन सुन सुन .. सुन साहिबा सुन
      मैंने तुझे चुन लिया, तू भी मुझे चुन.

      आपने मेरी पोस्ट को चुन कर अपना असीम स्नेह
      दर्शाया है.अब मुझे आपकी इस संगीतमयी हलचल
      को चुन कर ' सा रे गा मा ....' के हर सुर
      को पढ़ना होगा, समझना होगा.

      'हनुमान लीला - भाग १' पर आपके अनुपम विचारों
      की भी अपेक्षा है,अनुपमा जी.

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    9. बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स का चयन किया है आपने ... बधाई के साथ शुभकामनाएं ।

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    10. राकेश कुमार जी ...क्षमा कीजियेगा ....जब स्वर गायें का कहें भी तो सा रे गा मा पा धा न कहकर सा रे ग म प ध कहें ...या गाएँ ...अन्यथा इसे विकृति माना जाता है ....पुनः क्षमा कीजियेगा ...संगीत से जुड़ी कोई त्रुटी देख कर मैं चुप नहीं बैठ पाती उसे तुरंत ठीक करना अपना कर्तव्य समझती हूँ ....

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    11. आ. अनुपमा जी
      संगीत के सुरों के साथ आज की मनभावन हलचल आपने बहुत मेहनत से बनायी है इसे पढ़कर जो आनंद आया उसे शब्दों मे बयान नहीं किया जा सकता।
      लगभग सभी लिंक्स देख लिए हैं।

      सादर

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    12. जी अनुपमा जी, गल्ती के लिए क्षमा चाहता हूँ जी.
      बचपन से ऐसा ही सुनते आया था और फिर आप द्वारा प्रस्तुत
      गीत में भी मैंने ऐसा ही सुना.इसीलिए यह गल्ती हुई
      है.आपने तो 'सा रे ग म प ध..' ही लिखा है.

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    13. अनुपमा जी के द्वारा
      बहुत सुन्दर हलचल की प्रस्तुति !
      बधाई !

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    14. राकेश जी उपशास्त्रीय संगीत में जिसे हम light classical कहते हैं ,हम इसे फिर भी rhyming के लिए सा रे गा मा ... ले सकते हैं किन्तु शास्त्रीय संगीत में बिलकुल नियमानुसार चलना होता है ....

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    15. अच्छे लिंक्स...बढ़िया है हलचल ..

      आपने यहां स्थान दिया। धन्यवाद

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    16. अनुपमा जी नमस्कार हमे हलचल पर स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार

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    17. आपने अच्छी जानकारी दी है मुझे.

      शास्त्रीय संगीत क्या मुझे तो 'light classical'
      का भी कोई ज्ञान नही.बहुत इच्छा थी संगीत सीखने की,
      पर कभी सीख नही पाया.आप जैसी गुरू से जानकारी
      मिलेगी तो मैं भी 'सुग्रीव' की सेना में शामिल हो जाऊं
      शायद.

      बहुत बहुत हार्दिक आभार आपका.

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    18. अनुपमा जी ,
      आज की शास्त्रीय संगीत के साथ हलचल गज़ब की है .. अभी लिंक्स पर जाना बाकी है ... आभार... मेरी रचना को अपने संगीत में शामिल करने के लिए .

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    19. अनुपमा जी..

      आपका आभारी हूँ..की आपने मुझे यह मान दिया...

      बहुत बहुत धन्यवाद्...



      दीपक शुक्ल

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    20. बहुत रोचक हलचल...सभी लिंक्स तक जाने का प्रयास होगा..आभार

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    21. बढ़िया अंदाज़ अच्छे लिंक ....
      शुभकामनायें इस ब्लॉग को !

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    22. रुक..रुक ..सुन-सुन ..हलचल की धुन
      बहुत ही प्यारी वाली धुन .... !!

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    23. सुन्दर सुर सजे हैं यहाँ... वाह!!! कुछ स्वर छूट गये हैं उन्हें उठाकर सरगम पूरा करने फिर आना होगा...
      सादर...

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    24. That’s pretty exciting news and I really hope more people get to read this.

      From everything is canvas

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    25. anupmaa ji sat suron k mala mai aaple palash k phool ko bhi goonth diya. bahut bahut sukriyaa apkaa. bahut janat se sab kuch chun kar laate hai , aur halchal par halchal machaa dete hai ..
      bahut khooob............

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    26. प्रस्तुतीकरण की विशिष्टता नयी पुरानी हलचल को सदैव यूँ ही जीवंत रखे!

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    27. लाजवाब और ज़बरदस्त हलचल रहा! मेरी शायरी शामिल करने के लिए धन्यवाद !

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    28. मन हर लिया इस सरगम ने ...
      अपना लिखा ही याद दिलाती रहती है यह हलचल ...
      बहुत आभार !

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