जल्दी जागने वालों को ..शुभप्रभात ...!!
देर आये दुरुस्त आये .....नमस्कार ...!
आ गया है ..मेरा दिन शनिवार ...!!
आज लेकर सुरों की भरमार ...!
....और आ गयी हूँ मैं भी ...रुक..रुक ..सुन-सुन ..हलचल की धुन लेकर .....धुन तैयार है ...सुर तैयार हैं ...फिर देर किस बात की है ......चलिए ...सा लगाईये ....हारमोनियम की आवाज़ आ रही है न ....?
देर आये दुरुस्त आये .....नमस्कार ...!
आ गया है ..मेरा दिन शनिवार ...!!
आज लेकर सुरों की भरमार ...!
....और आ गयी हूँ मैं भी ...रुक..रुक ..सुन-सुन ..हलचल की धुन लेकर .....धुन तैयार है ...सुर तैयार हैं ...फिर देर किस बात की है ......चलिए ...सा लगाईये ....हारमोनियम की आवाज़ आ रही है न ....?
- सा ....आशा जी की बहार से आज कर रही हूँ शुरुआत ..ऐसी बहार में आज कुछ नया करते हैं ...निधि जी की कविता पढ़कर ... ...
- रे ......वाणी जी की गीत मेरे पर ..समान्तर रेखाएं...
- ग ....जीवन पुष्प पर .. ...मनीष जी की कसक...
- म.....से माँ के लिए ..उन्मना पर साधना जी ..... बह चली वायु माँ को नमन करते हुए ...
- प ..से .. ...प्रकाश जी ...अकेला पंछी ...
- ध पर ध्यान दें...कुंवर कुसुमेश जी की सलाह पर .....उम्र भर चलाना संभलकर ज़िन्दगी में ...और अब विचार करें ...गाँधी जी पर मनोज जी का महत्वपूर्ण आलेख पढ़ें ...ब्रह्मचर्य का विचार ....
- नि .....कमज़ोर है श्रुति क्योंकि कभी कभी भूख इंसान को भटका भी देती है |फिर वो भूख ..पेट,पैसा ,ख्याति .... लम्बी लिस्ट है ......किसी भी चीज़ की ही क्यों न हो ....इसलिए मनसा वाचा कर्मणा पर राकेश जी का लेख हनुमान लीला -भाग १ भी पढ़िए और ज्ञान बढाईये ........
- सां .....आ ललना तोहे चलाना सिखाऊँ ....राजेश कुमारी जी के ब्लॉग से
सुर तो लग गए और बहुत बढ़िया लगे पर सुर पक्का करने के लिए ...चलिए फिर से षडज लगाइए इस बार चल स्वर भी लेते हैं ........
- सा .......कुश्वंश जी ..सही श्रुति ली है ...जागो समय नहीं रुकता है ...
- रे (कोमल ) .....ये राहें कोमल रे की मुश्किल सी श्रुति हैं .....संगीता जी की ..
- रे .....शुद्ध रे ..से राहें ढूँढते हुए ..मुकेश कुमार सिन्हा जी ...एक टुकड़ा आसमान ढूंढ लाये ...
- ग (कोमल )...सतीश जी ....कोमल ग बुनियाद है ...बहुत सारी रागों का ...जैसे काफी ठाट के अंतर्गत आने वाली राग ...बागेश्री ..भीमपलासी ..या तोड़ी थाट की भी ... आपको संगीत पढ़ना पड़ेगा ...
- ग(शुद्ध )....गुनगुनाते हुए अशोक जी गा रहे हैं उसकी महिमा ...जिसकी महिमा से सब हलचल है ....
- म ...से मोहब्बत पर दीपक जी ज्योत जला रहे हैं ....
- म तीव्र ....जब पलाश के फूल खिलते है .......जैसे जंगल में आग ही लग जाती है ...ऐसा ही नज़ारा होता है ...इसी तरह जब कभी-कभी तीव्र मध्यम की सही श्रुति लग जाये ...मिल जाये सही नाद तो मारु-विहाग ऐसा खिलता है कि चुप होने का मन ही नहीं करता ...कभी-कभी ....ये सिलसिला खत्म नहीं होता ....जब तक जीवन है .............आज स्वरोज सुर मंदिर से भी मारू-विहाग की ही आवाज़ आ रही है .....
- प ...प्रवीण जी आज क्या नया लाये हैं ...?बहुत बढ़िया पंचम लगाया है ...गार्गल करके आये हैं लगता है .......!!ओह ...उदासीन कुम्भकर्ण का श्राप मिटाने अब तो आ जाओ राम ....इतनी गहन सोच से लिखा है ...तभी खिल गया है पंचम ...
- ध (कोमल)......बहुत ध्यान से कोमल ध लगाया ...और पूजा जी ...हम इन लहरों पर बना ये आवाज़ घर देखते देखते ..... बंध ही गए आपसे .....
- ध ...से ध्यान देने वाली बात है ...रश्मि दी ...संगीत सिर्फ पागल होने से ही नहीं बचाता हैं हमें ...बल्कि आनंद भी देता है ...आप ये पढ़ कर ही मुस्कुरा रहीं हैं ...न ....की हंस रहीं हैं .. ...?
- नि (कोमल) भावनाओं से भरी ...बबली जी की शायरी ...
- नि ...निषाद निनाद करते हुए कहता है ...बचा लो पर्यावरण...शास्त्री जी आप की कविता में शुद्ध निषाद का बढ़िया प्रयोग है ....!!
- सां....तार सप्तक पर संजय जी की पुरज़ोर आवाज़ ....विदेश जाने की इच्छा छोड़ दें भारतीय ....
अगर मेरा बस चले तो सुरों का ये सफ़र यूँ ही चलता रहे हर प्रहर.. पर जानती हूँ आज बहुत सरे काम हैं आपको | आभारी हूँ आपने सुरों के इस सफ़र में.. हलचल का साथ निभाया ...!! हलचल की इस सुर लहरी में .. लहर-लहर लिंक्स पढ़ कर ... लिखने वालों का उत्साह बढाया .......!! कैसी लगी हलचल ...ज़रूर बताएं .... थोड़ा और साथ निभाते हुए.... अपने विचार भी बाँटते जाएँ ....!!
अगली हलचल तक के लिए ...नमस्कार .. इस गीत के साथ ...आपका ..पुनः आभार ...!

This comment has been removed by the author.
ReplyDeleteसुंदर प्रस्तुति सारे लिनक्स पर जाने का प्रयास रहेगा ....!
ReplyDeleteआपने तो हलचल मचा दी लिंक्स के द्वारा |
ReplyDeleteअच्छी हलचल के लिए बधाई और आभार बहार पर आने का |
आशा
बहुत अच्छे लिनक्स अनुपमा जी..... आभार
ReplyDeleteआज की हलचल बहुत बढ़िया रही!
ReplyDeleteबड़ा जोर है इन सात सुरों में ... चेहरे की उदासी हुई है गम ...तो फिर छेड़ सखी सरगम.... सा रे ग म प् ध नि सा ...
ReplyDeleteसात सुरों के माध्यम से साहित्य के अनमोल स्थलों की सुहानी सैर बहुत ही अच्छी लगी अनुपमा जी ! मेरी दीदी और मेरी माँ दोनों की रचनाओं को इस संगीतमय सफर में देख हार्दिक प्रसन्नता हुई ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार !
ReplyDeleteआज की संगीतमयी चर्चा पढ़कर नींद उड़ गयी।
ReplyDeleteइस तरह की चर्चा में चर्चा के साथ रचना पाठ का सुख भी मिल जाता है।
ReplyDeleteसुन सुन सुन .. सुन साहिबा सुन
ReplyDeleteमैंने तुझे चुन लिया, तू भी मुझे चुन.
आपने मेरी पोस्ट को चुन कर अपना असीम स्नेह
दर्शाया है.अब मुझे आपकी इस संगीतमयी हलचल
को चुन कर ' सा रे गा मा ....' के हर सुर
को पढ़ना होगा, समझना होगा.
'हनुमान लीला - भाग १' पर आपके अनुपम विचारों
की भी अपेक्षा है,अनुपमा जी.
kyaa bat hai, mazaa aa gaya
ReplyDeleteबहुत ही अच्छे लिंक्स का चयन किया है आपने ... बधाई के साथ शुभकामनाएं ।
ReplyDeleteराकेश कुमार जी ...क्षमा कीजियेगा ....जब स्वर गायें का कहें भी तो सा रे गा मा पा धा न कहकर सा रे ग म प ध कहें ...या गाएँ ...अन्यथा इसे विकृति माना जाता है ....पुनः क्षमा कीजियेगा ...संगीत से जुड़ी कोई त्रुटी देख कर मैं चुप नहीं बैठ पाती उसे तुरंत ठीक करना अपना कर्तव्य समझती हूँ ....
ReplyDeleteआ. अनुपमा जी
ReplyDeleteसंगीत के सुरों के साथ आज की मनभावन हलचल आपने बहुत मेहनत से बनायी है इसे पढ़कर जो आनंद आया उसे शब्दों मे बयान नहीं किया जा सकता।
लगभग सभी लिंक्स देख लिए हैं।
सादर
जी अनुपमा जी, गल्ती के लिए क्षमा चाहता हूँ जी.
ReplyDeleteबचपन से ऐसा ही सुनते आया था और फिर आप द्वारा प्रस्तुत
गीत में भी मैंने ऐसा ही सुना.इसीलिए यह गल्ती हुई
है.आपने तो 'सा रे ग म प ध..' ही लिखा है.
अनुपमा जी के द्वारा
ReplyDeleteबहुत सुन्दर हलचल की प्रस्तुति !
बधाई !
राकेश जी उपशास्त्रीय संगीत में जिसे हम light classical कहते हैं ,हम इसे फिर भी rhyming के लिए सा रे गा मा ... ले सकते हैं किन्तु शास्त्रीय संगीत में बिलकुल नियमानुसार चलना होता है ....
ReplyDeleteअच्छे लिंक्स...बढ़िया है हलचल ..
ReplyDeleteआपने यहां स्थान दिया। धन्यवाद
अनुपमा जी नमस्कार हमे हलचल पर स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार
ReplyDeleteआपने अच्छी जानकारी दी है मुझे.
ReplyDeleteशास्त्रीय संगीत क्या मुझे तो 'light classical'
का भी कोई ज्ञान नही.बहुत इच्छा थी संगीत सीखने की,
पर कभी सीख नही पाया.आप जैसी गुरू से जानकारी
मिलेगी तो मैं भी 'सुग्रीव' की सेना में शामिल हो जाऊं
शायद.
बहुत बहुत हार्दिक आभार आपका.
अनुपमा जी ,
ReplyDeleteआज की शास्त्रीय संगीत के साथ हलचल गज़ब की है .. अभी लिंक्स पर जाना बाकी है ... आभार... मेरी रचना को अपने संगीत में शामिल करने के लिए .
अनुपमा जी..
ReplyDeleteआपका आभारी हूँ..की आपने मुझे यह मान दिया...
बहुत बहुत धन्यवाद्...
दीपक शुक्ल
बहुत रोचक हलचल...सभी लिंक्स तक जाने का प्रयास होगा..आभार
ReplyDeleteबढ़िया अंदाज़ अच्छे लिंक ....
ReplyDeleteशुभकामनायें इस ब्लॉग को !
रुक..रुक ..सुन-सुन ..हलचल की धुन
ReplyDeleteबहुत ही प्यारी वाली धुन .... !!
सुन्दर सुर सजे हैं यहाँ... वाह!!! कुछ स्वर छूट गये हैं उन्हें उठाकर सरगम पूरा करने फिर आना होगा...
ReplyDeleteसादर...
That’s pretty exciting news and I really hope more people get to read this.
ReplyDeleteFrom everything is canvas
anupmaa ji sat suron k mala mai aaple palash k phool ko bhi goonth diya. bahut bahut sukriyaa apkaa. bahut janat se sab kuch chun kar laate hai , aur halchal par halchal machaa dete hai ..
ReplyDeletebahut khooob............
प्रस्तुतीकरण की विशिष्टता नयी पुरानी हलचल को सदैव यूँ ही जीवंत रखे!
ReplyDeleteलाजवाब और ज़बरदस्त हलचल रहा! मेरी शायरी शामिल करने के लिए धन्यवाद !
ReplyDeleteमन हर लिया इस सरगम ने ...
ReplyDeleteअपना लिखा ही याद दिलाती रहती है यह हलचल ...
बहुत आभार !