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| पिलानी की गऊशला(गौशाला) |
सुप्रभात!
आज की सुहानी सुबह मै सुनीता शानू आप सबका स्वागत करती हूँ। आज की हलचल चुन-चुन कर कुछ खूबसूरत फूलो से सजा एक बेशकीमती तोहफ़ा है आपके लिये।
रूपम की लिखी रचना श्याम से कहो पैसा कमाये...भावनात्मक रूप से बहुत ही खूबसूरत है तथा वर्तमान के दृश्य को पूरी तरह से प्रस्तुत कर रही है। पैसा कमाने के चक्कर में राधा-मोहन का प्रेम सचमुच गायब हो गया है। आप भी अवश्य पढ़े और अपने आशीर्वचनों से रचनाकार का उत्साह वर्धन करें।
लंदन मे रह रहीं पल्लवी जी आधुनिकता और नारी के विषय में एक सार्थक पोस्ट लिखने में सफ़ल हुई हैं। मेरा भी यही मानना है कि समय की बचत करते हुए जिस प्रकार इंसान घर को आधुनिक उपकरणों से सँवारता है उसी प्रकार आज नारी भी समय और स्थान को देख कर खुद को बदल रही है। पुरूष की अपेक्षा नारी में अधिक बदलाव अपेक्षित हैं। पुरूष के वस्त्र साधारण तथा कार्य करने में सहायक होते हैं। नारी के वस्त्र अगर सलवार सूट को छोड़ दिया जाये तो साड़ी कार्य करने की क्षमता में रुकावट उत्पन्न करती हैं। क्षमा करें...तमाम परेशानियों के बावजूद मुझे साड़ी ही अधिक पसंद हैं।J आप भी पढ़े और पल्लवी जी के इस विचार में अपने विचारों का मेल करें।
एक अरसे से एक कवि को निरन्तर पढ़ रही हूँ और कोशिश कर रही हूँ कि कविताओं के माध्यम से उनकी सोच तक पहुँच पाऊं। यह हैं राजेंद्र तेला पेशे से दंत-चिकित्सक हैं मगर जबसे कागज़ कलम हाथ में पकड़ी है मुझे लगता है कहीं खो गये हैं। मैने उनमें एक संवेदन शील कवि को तलाश किया है। लिखते-लिखते अपनी रचनाओं मे खो जाने वाले तेला जी बहुत ही खुशमिज़ाज़ हैं किसी से कह रहे हैं जरा फ़िर से मुस्कुरा दो... J
कभी सुना तो होगा जागती आँखों से स्वप्न देखना, लेकिन क्या कभी आपने भी देखें हैं स्वप्न जागती आँखों से। मैने तलाश किया है एक ऎसे इंसान को जो देखते हैं स्वप्न जागती आँखों से और किया है उन स्वप्नों को डायरी में कैद। आइये करते हैं चर्चा उनके कुछ स्वप्नों की शायद उन्हे भी अच्छा लगेगा... J
मन के किसी कोने से कब अंकुर बन फ़ूटती है, विश्वास और आशाओं के पानी से सींच मन की अनुभूतियाँ कब फ़लित हो वृक्ष का आकार ले लेती हैं। मैने तुझको देखा है .....कोई नही जानता ऎसे ही मन के -मनके पिरोती डॉ उर्मिला जी की यह रचना पढ़िये और कहिये उन्हे वाह-वाह... J
अरविंद त्रिपाठी जी पेशे से पत्रकार हैं साथ ही बहुत अच्छे व्यंग्य कार भी हैं लेकिन लगता है उनकी मेमोरी आजकल गजनी से इफ़ेक्ट हो गई है। मै नही कह रही भई आप खुद ही पढ लीजिये कितने कनफ़्यूज हो रहे अन्ना आंदोलन को लेकर...
अब देखिये इनके कार्य जाने क्या-क्या कहाँ-कहाँ से बटोरते हैं, इनकी कलम हमेशा ही लिखती है कुछ नया और दिमाग में है हर पल हलचल... नई पुरानी हलचल J जीहाँ ये हैं छत्तीसगढ़ के लिक्खाड़ नही नही कुख्यात रचनाकार संजीव तिवारी जी अब कुख्यात न कहें तो और क्या कहें आजकल जुटे है छत्तीसगढ़ की कला,संस्कृति तथा साहित्य को हिंदी तथा अन्य छत्तीसगढ़ी भाषा में समझने व समझाने के लिये। और आजकल खोला है इन्होने पुस्तकालय... अब आप ही कहिये पुस्तकों का खजाना किसे पसंद नही? तो चले आईये आप भी खोजने अपनी पसंद इस खुले पुस्तकालय पर।
व्यंग्यलोक के अधिपति श्री प्रमोद भाई को कौन नही जानता कोई विषय उनसे अछूता नही है। आज मिठाईयों की वाट लगाई हुई है... J ( मुझे तो डाऊट है सबसे ज्यादा मिठाईयां यही खाते हैं इनकी सेहत का राज) अब दीपावली पर तो कमा ले बेचारे हलवाई। मुझे लगता है डिमाण्ड और सप्लाई का रूल समझा कर सरकार को यह भी झाँसा दे रहे हैं J
अब कुछ छेड़-छाड़ बुरा न मानो भाई तीन-तीन त्योंहार गुजरे मै कुछ बोली? नही न अब इतने दिन बाद कुछ हँसी-मजाक हो जाये...चलेगा मुझे लगता है कुछ लोग पक्का चिढ़ जायेंगे कुछ मेरे घर तक आ जायेंगे और कुछ...हेहेहे J
स्पंदन पर पढ़ा शिखा जी पका रही हैं गट्टे अरे रे कोई उन्हे समझाओ गट्टे बेसन के बनाओं J
महफ़ूज़ भाई के ब्लॉग पर जाना और लौट आना। आपकी टिप्प्णी दब जायेगी भोलाराम के जीव की तरह अरे भई पहले ही एक सौ सत्रह टिप्पणी लिये बैठे हैं... J
अब पढिये एक उल्लू की पोस्ट और लीजिये मजे ही मजे पोस्ट लिखी है ललित भाई ने और कोशिश की है उल्लू बनाने की ... J
आजकल सबकुछ इतना महंगा और मिलावटी, नकली हो गया है कि खाते हुए भी डर लगता है तो ठीक है न आवो बालम ककड़ी खायें इब ताऊ ठहरा हरयाणे का जाट तो भई ताई को ककड़ी ही खिला सकै है इब (ताऊ की पूरी पोस्ट पढते जायें J)
पोस्ट तो बहुत लम्बी हो गई भाई अभी तक ऋतुपर्णा से डिस्कशन कर रहे हैं। और राकेश जी कई महिने से सीता जी की जन्म कथा सुना रहे हैं। अनुपमा जी लगता है पिछले संडे से गायन में ही उलझी रही हैं। संगीता जी ने जलाया है मोहोबत का दिया ... हम भी सराबोर हुए उनके प्रेम की रोशनी में J लो जी सदा जी की भी हो जाये चर्चा जरा... ओह्ह यशवंत जी का ब्लॉग कभी रात के दो बजे मत खोलना वरना ... उठ जायेंगे सब सोने वाले सुनकर गाने की धुन।
सबको राम-राम। अब दीजिये इजाजत... फ़िर मिलेंगे आज ही के दिन अगले रविवार आज बस चाय से काम चलाईये।
सुनीताशानू

बड़े ही करीने से सजाये गये सूत्र।
ReplyDeleteबहुत सुन्दर हलचल है....
ReplyDeleteबेहतर लिंक्स ....अच्छा अंदाज ....बस हलचल ही हलचल ....!
ReplyDeleteखूब की है हलचल .. बढ़िया लिंक्स
ReplyDeletehalchal dekh kar achha laga
ReplyDeleteउल्लू को हलचल में शामिल करने का आभार
ReplyDeleteकुछ पोस्टों के लिंक नहीं लगे हैं :)
ReplyDeleteआ.सुनीता जी,
ReplyDeleteबहुत ही अच्छे लिंक्स दिये हैं आपने। सभी पर पहुँचने का प्रयास है।
सादर
हलचल आखिर मचा ही दी………………सुन्दर्।
ReplyDeleteवाह! 'अनुपमा जी' पर भी 'सीता'जी.
ReplyDeleteआप अच्छे लिंक्स देतीं हैं,मेरे ब्लॉग को भी शामिल करके.
पर स्वयं क्यूँ नहीं आतीं हैं,कथा सुनने,
सुनीता जी,
क्या इतनी बुरी कथा है,जी.
काव्यमय हलचल बहुत गज़ब है ... शुक्रिया मुझे शामिल करने का ...
ReplyDeleteGood work.!
ReplyDeleteKeep it up!!
बहुत बढिया अंदाज .. सुंदर लिंकों की अच्छी प्रस्तुति !!
ReplyDelete:):)मस्त हलचल है एकदम.लिंक्स के साथ आपकी पंक्तियाँ गज़ब ढा रही हैं .
ReplyDeletemithaayee milawatee thee magar swaadisht thee .khilaane ke liye dhanywaad
ReplyDeleteसुंदर हलचल,बढिया अंदाज,लाजबाब लिंक्स.
ReplyDeleteअपने लिंक में कुछ नए लोगो को शामिल करे तो
उत्साह बना रहेगा,
बढ़िया हलचल... सुन्दर लिंक्स
ReplyDeleteसादर आभार...
@ललित शर्मा सर!....मैंने सभी लिंक्स चेक किये हैं और वो सभी खुल रहे हैं :)
ReplyDelete@धीरेन्द्र सर!----आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।
जैसा कि नयी पुरानी हलचल के उद्देश्यों मे भी स्पष्ट है हमारा प्रयास रहता है कि हम अपनी प्रस्तुति मे नए ब्लोगर्स को भी शामिल करें और समय समय पर हम ऐसा करते भी हैं।
आज आपके ब्लोगस पर जाना हुआ;हलचल की भावी प्रस्तुतियों मे आपको भी स्थान ज़रूर दिया जाएगा।
वाह !!! आज के लिंक्स प्रस्तुति का अंदाज बहुत मन भाया.सुनीता जी को बधाई.
ReplyDeleteबहनजी,
ReplyDeleteमेरी सेहत को नज्रर मत लगाइये, वैसे आपकी सेहत देखकर मुझे भी यही लगता है कि आपको ज़रूर मिठाइयों की दीवानी होना चाहिए। उम्दा हलचल रही। माहौल बनाऍं रखिए। शुभकामनाऍ।
अब पढिये एक उल्लू की पोस्ट और लीजिये मजे ही मजे...?...:)
ReplyDeleteसुनीता जी ...आपकी इस हलचल ने तो वास्तव में हलचल मचा रखी है ...बहुत खूब ...आभार ।
ReplyDeleteजय हो, बढि़या हलचल मचाया आपने. मेरे पुस्तकालय में आप सब का स्वागत है।
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