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| तुलसी भाई पटेल (ब्लॉग) से साभार |
हलचल जो कई दिनों से हो रही है जनाब। हर रविवार मै सुनीता शानू करती हूँ आपके दिल-दिमाग में एक नई खुशनुमा हलचल। हलचल होनी भी चाहिये। कभी मुन्नी, कभी शीला, कभी राखी, तो कभी रामदेव हलचल मची रहे चारों और। पहले रामदेव ने मचाई हलचल और पहन कुर्ता-सलवार भागे दल-बल। और अब अन्ना जी काला धन भूल कर बस लोकपाल बिल के पीछे लगे हैं। मुझे लगता है अन्ना भ्रष्टाचार को मिटा कर ही मानेंगे।
मेंने तो बहुत समझाया और लोगों नें भी। यहाँ तक की अविनाश वाचस्पति ने गुगल पर सर्च करके भ्रष्टाचार मिटाने का फ़ार्मुला अन्ना को बताया। कि भ्रष्टाचार लिखों और मिटाओ इसमें परेशानी कैसी है? लेकिन प्रोबलम फ़िर वही आती है कि अन्ना जी को तो कम्प्युटर नही चलाना आता। तो कैसे कंट्रोल करते भ्रष्टाचार को बताईये? दूसरी तरफ़ रचना जी का भी कहना है कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण करें तो भई ये भ्रष्टाचार तो हर बच्चे ने बचपन से दूध में ही पी लिया। आप ही बताईये जब बच्चा कहता है कि माँ अगर मै आपका यह काम कर दूँ तो आप मेले को नया खिलौने लाकर दोगी। बस वहीं से शुरू हो जाती है घूस खोरी। जो बढ़ते-बढ़ते इतनी बढ़ जाती है कि हर युग में एक न एक गाँधी को अवतार लेना ही पड़ता है।
लेकिन सच कहूँ तो अन्ना ये तुमने ठीक नही किया। देश के लिये मरना कोई बड़ी बात नही होती। लेकिन जिस देश का प्रधान मंत्री निक्म्मा हो उस देश से भ्रष्टाचार कैसे भागेगा। यानि बात घूम-फ़िर के फ़िर वहीं अटक गई। आखिर ढाक के वही रहेगें तीन पात।
शानू जी आप चुप हो जाओ नाही तर माझी सटकेल। ओह्ह लगता है अन्ना ने मनमोहन को सिघंम मान ही लिया है तभी तो फ़िल्मी स्टाइल। बाप रे बाप अन्ना अनशन सचमुच बड़े काम की चीज़ है। आप बारह दिन में सात किलो वजन घटा कर दिखा दो भई।
शानू जी आप चुप हो जाओ नाही तर माझी सटकेल। ओह्ह लगता है अन्ना ने मनमोहन को सिघंम मान ही लिया है तभी तो फ़िल्मी स्टाइल। बाप रे बाप अन्ना अनशन सचमुच बड़े काम की चीज़ है। आप बारह दिन में सात किलो वजन घटा कर दिखा दो भई।
तो हमारे प्यारे अन्ना जी बहुत हो गया जुल्म आपकी काया पर। और अन्ना सोचो तो जरा बताओ तो आपके साथ-साथ कितने लोग अपना सिट्टा सेक रहे हैं। कितने लोग हैं जो सच्चे मन से बैठे है अनशन पर। बस अब बहुत हुआ टीम अन्ना सरकारी प्रस्ताव से नाखुश रहे तो रहे। अन्ना को जिंदा रहना है देश के लिये। महिलाएं और वृध्द तो बैठे ही हैं अब स्कूल के बच्चे भी तुम्हारे साथ हैं।
अन्ना तुम अनशन करो हम तुम्हारे साथ हैं। जागो हो गया सवेरा आने वाला कल होगा बस तेरा।
अन्ना तुम अनशन करो हम तुम्हारे साथ हैं। जागो हो गया सवेरा आने वाला कल होगा बस तेरा।
बस इंतजार है दस बजने का चलूँ तब तक गरमा-गरम आलू के पराँठें सेक लूँ कहीं घर वाले न बैठ जायें अनशन पर। तो चलूँ सब लोगों को लोकपाल बिल की घणी-घणी बधाई।

लोकपाल बिल की घणी-घणी बधाई गरमा-गरम आलू के पराठों के साथ.
ReplyDeleteनयी पुरानी हलचल पर पहली बार आयी . लेआऊट , संयोजन , प्रस्तुति सब अच्छा है । और सबसे बड़ी बात तो ये हैं कि ऐसा साझा मंच बनाने के लिए बहुत समय , सद्भावना और सद्प्रयास की आवश्यकता है आपने सब का बखूबी मिश्रण किया है । औऱ नये के साथ पुराने को रख कर सोने पर सुहागा कर दिया । बधाई और शुभकामनाएं
ReplyDeleteअन्नमय जगत, अन्नामय भारत।
ReplyDeleteपिछली बार आपने झांसा देकर कचौरियां तो खिलाई नहीं,अबकी बार गरम गरम आलू के परांठों से जी को और जला रहीं हैं.
ReplyDeleteकोई बात नहीं,बधाई अन्ना के अनशन को तुडवाने की.
अब तो दावत देनी ही पड़ेगी आपको.
नहीं .. तो कोई बात नहीं, अगली बार ही सही.
मेरी पोस्ट आपके दर्शन को तरस रही है शानू जी.
आपके दिए लिंक्स भी किसी दावत से कम नहीं.
आलू तो अपनी कमजोरी है। हफ्ते के सातों दिन यानि साल के 365 दिन बिना आलू अपना काम नहीं चलता और आलू के पराँठे मिलें तो सोने पे सुहागा ही होगा :)लगता है बिन बुलाए मेहमान बन कर आपके घर आना ही पड़ेगा :-/
ReplyDeleteआज की बहुत जोरदार हलचल रही । लिंक्स पढ़ने अभी बाकी हैं।
सादर
आलू के परांठों के साथ हलचल का मज़ा ही कुछ और है .. बढ़िया रही हलचल .
ReplyDeleteसार्थक प्रस्तुति ,आभार
ReplyDeletelage raho aise hi :) aapki bhi badhai!
ReplyDeleteबहुत सुन्दर हलचल्।
ReplyDeleteचारो तरफ अन्ना ही अन्ना तुम अन्ना मै अन्ना .
ReplyDeleteआलू के परांठों के साथ हलचल का मज़ा कुछ अलग ही स्वाद में..सब तरफ अन्ना ही अन्ना ..तुम्हें प्रणाम..
ReplyDeleteहलचल ही हलचल है इन दिनों।
ReplyDeleteयहां की हलचल भी अच्छी लगी।
चारों तरफ के अन्ना की हलचल .....बहुत खूब
ReplyDeleteरोचक प्रस्तुति...
ReplyDeleteअन्ना स्पेशल की मो-बाइक ने ख़ासा मनोरंजन किया बाकी पोस्ट भी सार्थकता में कहीं पीछे नहीं है .आभार
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