नमस्कार...आ गया फिर वही शनिवार और मैं ....anupama'ssukrity से अनुपमा त्रिपाठी भी |आपके लिए आज नयी-पुरानी हलचल पर...रे मन ..क्यूँ ठहरी है ...?सागर से गहरी है...आज तेरे मन की हलचल....लेकर..!!
चौबीस घंटों में सिमटा एक दिन....जैसे समग्र जीवन की झांकी है...!सात-सुर..नौ-रस ...हर दिन हमसे रू-ब-रू ज़रूर होते हैं ...प्रत्येक मनुष्य की एक ही कहानी है..बस समय का फेर है...!!चलिए आज ठहरी-ठहरी सी..समरस सी .. ज़िन्दगी की गहराईयों में डूब ही जाएँ .
- tarz.e.byaaN...पर ग़ज़ल सुनते ..सुनते..!!
- एक रोज़ ..कुछ रंग फिर फ़ैलने लगे थे पानी पर...मुझको मालूम था दिल से फिर कोई ख़्वाब लग गया था....
- और लगा भी ख़्वाब..तो कैसा ...कहता है ..जलना होगा ...
- पर मन में कहीं डर तो है ही..क्या उसे हम वो कुछ लम्हें दे सकेंगे जो उसे मिलना चाहिए या दुनिया की इन रीतियों में गुमनाम हो खो जायेंगे...
- मेरा भ्रम है..पर कल्पना को साकार तो करना ही है...
- मौका है ,मौसम है,दस्तूर है,kashish है...बढ़े चलो ...
- bamulahija ...एक कार्टून देखिये ....
- कभी-कभी चेहरे से साफ़ झलकता है इरादा क्या है ...आगे ...ये ग़ज़ल पढ़िए होता क्या है...
- वंदना जी आज मैं भी सोचने लगी हूँ ..ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है
- अब ..जो मेरा मन कहे ...आज कह रहा है...अपनी अपनी किस्मत ...
- गहन अभिव्यक्ति संगीता जी की संधि-विच्छेद पढ़ते हैं.........
- सर्जक को बहुत संभल कर कार्य करना होता है उसे एक एक शब्द गहरे से सोच समझ कर कहना होता है और उसका कहा हुआ शब्द अगर उसके कर्म में उतरा है तो निश्चित रूप से वह कालजयी है वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है , और ऐसी स्थिति में सर्जक पथप्रदर्शक बन जाता है तो सृजन और समाज का रिश्ता पढ़िए...
- मेरे अरमान मेरे सपने कहाँ-कहाँ ले जाते हैं मुझे .. इस बार गोल्डन टेम्पल अमृतसर ...
- पहुँच गए हैं अबअगली बार दर्शन भी हो जायेंगे..थोडा विश्राम करते हुए सोचिये ..क्या आप भी मुक्ति चाहते हैं.....?
- जीवन धीरे धीरे बढ़ता ही जा रहा है..वृद्धग्राम की ओर...जा रही हूँ पढ़ते हुए ..मौत से पहले का ख़त ..मन में चीत्कार करते हुए अनगिनत प्रश्नों की गूँज है..
- काव्य कल्पना पर पढ़ते है ...चल रही हैं दर्द की कुछ आंधियां ....
- वो हो गए बच्चों से पर माँ-बाप हैं फिर भी...दिगंबर जी बहुत कोमलता से प्रबल भाव जगा दिए आपने ....शुक्रिया आपका....!!
- अब निवेदिता जी के सुंदर भाव..क्यों करें तिरस्कार इस प्यारे अन्धकार का ...
- अनीता जी की डायरी के पन्नो से लिए हैं अप्रतिम भाव..ईश्वरीय प्रेम ....आइये पढ़ें...
- अब देश प्रेम की बात करते हैं...पूरे भारत में जो चर्चा जोर-शोर से हो रही है उसकी चर्चा किये बिना आज की हलचल अधूरी ही रहेगी आप भी मानते हैंन... ..ये क्रान्ति नहीं अब रुकनी है..... .
- प्रभु नमन करते हुए अब चलिए अंत में शिव महापुराण -६पढ़ते हैं... शिखा जी कीयह श्रंखला अद्भुत है..
आज के लिए इतना ही...उम्मीद है आपको आजकी ठहरी ...हलचल पसंद आई होगी ...कुछ तो प्रश्न उठे ही होंगे मन में ...!!
चलिए अब अगली हलचल तक के लिए नमस्कार ...!!
अनुपमा त्रिपाठी.

anupma ji
ReplyDeletebahut hi achha laga aapke blog par aakar .bahut se blagon ko janne ka awsar bhi mila aur jigysa bhi badhi .
in sbke liye aapko bahut bahut badhai
poonam
बढ़िया रही यह हलचल भी ....मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए आपका आभार ..!
ReplyDeleteबहुत सुन्दरता से आपने शब्दों में लिंक्स को पिरोया है......शानदार.......जिब्रान साहब की मुक्ति को यहाँ जगह देने का शुक्रिया|
ReplyDeleteBahut Sunder Links...Abhar
ReplyDeleteशानदार हलचल...
ReplyDeleteसुन्दर सूत्र।
ReplyDeleteAnupama ji, aapke blog par aakar bahut acha laga.aapne shabdon ki mala mein jis tarah se posts ko piroya hai wah lajawaab hai...meri kavita ko apne blog pe charcha ka vishay banane ke liye main aapki aabhari hun...saadhuwaad.
ReplyDeleteआदरणीय अनुपमा जी,
ReplyDeleteबहुत ही विश्लेषणात्मक प्रस्तुति और अच्छे लिंक्स दिये हैं आपने। नेट कुछ स्लो है फिर भी सभी लिंक्स पर पहुँचने का प्रयास है।
सादर
बहुत बढ़िया हलचल ... सारे लिंक्स बहुत अच्छे .. आभार
ReplyDeleteबहुत ही अच्छी हलचल ...ढेर सारे लिंक्स अब पढ़ना बाकी है ।
ReplyDeleteअनुपमजी, आपकी मेहनत स्पष्ट झलक रही है.. सुंदर हलचल में मुझे भी शामिल किया, आभार!
ReplyDeleteबढ़िया हलचल ...सभी लिंक अभी नहीं पढ़ पाया हु...किन्तु जितने पढ़े उनके बाद आपका शुक्रिया अदा करे बिना रहा न गया.......बहुत बहुत शुक्रिया..:)
ReplyDeleteबहुत सुंदर लिंक्स है
ReplyDeleteअनुपमा जी,
ReplyDeleteआपने मेरी रचना को यहाँ जगह दी...इसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया
आपका लिंक पोस्ट करने का जो अंदाज़ है...बह भी अपने आप में कमाल है...
शुक्रिया
बहुत ही अच्छी हलचल है जी
ReplyDeleteहलचल की अपनी शान अपनी पहचान है...सुन्दर लिंक्स है..
ReplyDeleteबहूत सुन्दर और रोचक हलचल...
ReplyDeleteक्या बात है...! आपकी सुकृति-सामर्थ्य का ये बेहतरीन सबूत है . जिस तरह आपने अपनी कृतियों को एक माले की तरह पिरो कर पेश किया है वह काबिले तारीफ़ है...
ReplyDeleteमैं ब्लॉग पर नया हूँ इस्ल्लिये कुछ त्रुटियों के लिए क्षमा चाहूँगा
ReplyDeleteहलचल को भी ठहरा सकती हैं आप, कमाल है अनुपमा जी.
ReplyDeleteलगता है 'कमाल' करने की आदत हो गई है आपको.
सुन्दर लिंक्स के लिए आभार.
अनुपमा जी नेट अंकल की मेहरबानी से देर से आयी हूँ (
ReplyDeleteअब सभी लिन्क्स पर जाने की कोशिश करती हूँ ....आभार !